भोजन-पानी के साथ डटे मैदान में, 168 गांवों की सप्लाई रोकी

देवास, 23 नवंबर.  खातेगांव के पास संदलपुर और गुजर गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने बुधवार को प्रशासन के सामने चुनौती खड़ी कर दी. ग्रामीणों ने यहां संदलपुर के बिजली ग्रिड़ को घेर लिया और दफ्तर पर ताला ठोंककर पूरे क्षेत्र का बिजली सप्लाय रोक दिया. देर रात खबर लिखे जाने तक विद्युत मंडल और आक्रोशित ग्रामीणों के बीच कोई सुलह नहीं हो पाई है. लिहाजा ग्रामीण यहीं डटे होकर बिजली ग्रिड के आसपास ही भोजन बना रहे हैं. ग्रामीण संदलपुर व गुजरगांव को शहरी फीडर से ग्रामीण फीडर में जोड़े जाने से नाराज हैं.

मिली जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह करीब 11 बजे सैकड़ों ग्रामीणों ने संदलपुर के बिजली ग्रिड को घेर लिया. नारेबाजी करते हुए आक्रोशित ग्रामीणों ने यहां पूरे खातेगांव इलाके का बिजली सप्लाय रोककर ब्लेक आउट कर दिया. यहां तक कि खातेगांव ब्लॉक के नेमावर तक की बिजली खबर लिखे जाने तक गुल है. इससे देवास के औद्योगिक क्षेत्र को जाने वाले नर्मदा पानी की बीओटी योजना भी प्रभावित हुई है. ग्रामीणों ने बिजली सप्लाय ठप्प करने के बाद बिजली ग्रिड पर ताला ठोंक दिया और सुबह 11 बजे से लेकर देर शाम खबर लिखे जाने तक वे वहीं डटे हुए हैं. यहां तक कि ग्रामीण अपने भोजन की तैयारी भी यहीं ग्रिड के पास में कर रहे हैं. आक्रोशित ग्रामीण जहां नारेबाजी कर रहे हैं. वहीं कुछ लोग उनके भोजन बनाने के लिए तैयारियों में जुटे हैं. देर शाम तक बिजली अफसर लगातार उनसे संपर्क में है लेकिन खबर लिखे जाने तक ग्रामीणों और विद्युत मंडल अफसरों के बीच कोई सुलह नहीं हो पाई है.

शहरी को ग्रामीण फीडर में जोडऩे से नाराज है लोग
आंदोलन कर रहे लोगों ने नवभारत को बताया कि दरअसल बीते करीब 40 सालों से संदलपुर और गुजर गांव को खातेगांव से जोड़कर शहरी फीडर में ही रखा गया था लेकिन विद्युत मंडल अफसरों ने तुगलकी फरमान जारी करते हुए अब गुजर गांव और संदलपुर को ग्रामीण क्षेत्र में जोड़े जाने के लिए अलग फीडर बना दिया है. यहां के लोग बिजली के बिल का टेरिफ यानी दर तो शहरी क्षेत्र का दे रहे हैं लेकिन इन्हें बिजली गांव के हिसाब से कटौती होकर मिल रही है. आंदोलनकर्मी राधेश्याम विश्रोई ने बताया कि सन 1975-76 में जब पहली बार इस इलाके को बिजली मिली, तब से लेकर आज तक संदलपुर और गुजर गांव शहरी क्षेत्र के खातेगांव फीडर से ही जुड़े थे. लेकिन अचानक इसे बदल दिया गया. इससे इलाके का व्यापार तो प्रभावित हो रही रहा है, किसानों की खेती भी प्रभावित हो रही है. यदि ग्रामीण क्षेत्र में जोड़ा गया है तो फिर बिजली का बिल शहरी दर से क्यों लिया जा रहा है.

बीते साल भी दिया था आश्वासन
विद्युत मंडल के अधिकारी अश्विन परवाल ने 8 नवंबर 2010 को लिखित रूप से ग्रामीणों को इस बात के लिए आश्वस्त किया था कि उनका फीडर नहीं बदला जाएगा. यथावत शहरी क्षेत्र से ही इसे जोड़कर रखा जाएगा. ग्रामीणों ने नवभारत को अश्विन परवाल के इस पत्र की फोटो कापी देते हुए बताया कि बीते साल भी विद्युत मंडल के अधिकारियों ने मनमानी करते हुए उनके गांवों को शहरी से काटकर ग्रामीण क्षेत्र में जोड़ दिया था तब 8 नवंबर 2010 को इलाके के लोगों ने जोरदार आंदोलन किया था. घंटों की मशक्कत के बाद यहां पहुंचे बिजली अफसर परवाल ने ग्रामीणों को लिखित में इस बात के लिए आश्वस्त किया था कि यथा स्थिति रखी जाएगी. लेकिन बीते दिनों अचानक फिर से इसे ग्रामीण फीडर से जोड़ दिया गया है.

घंटों की बातचीत के बाद भी कोई हल नहीं
सुबह 11 बजे से लेकर देर रात 8 बजे तक आंदोलन कारियों और प्रशासन के अफसरों के बीच लगातार बातचीत चल रही है लेकिन फिलहाल कोई हल नहीं निकल पाया है. एक तरफ ग्रामीण इस बात पर अड़े हैं कि उनकी समस्या का समाधान आज ही लिखित रूप में माना जाए. जब तक उनकी समस्या ही नहीं होगी तब तक वे लोग बिजली ग्रिड को छोड़ेंगे नहीं. उधर प्रशासन इस बात पर जोर दे रहा है कि फिलहाल आंदोलन स्थिगित कर दिया जाए, अगले दो चार दिनों में वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की जानकारी देकर समस्या का निराकरण किया जाएगा. लेकिन खबर लिखे जाने तक फिलहाल कोई सहमति नहीं बन पाई है.

पहले भी कर दिया था प्रशासन को आगाह
संदलपुर में आंदोलन कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने ने पहले ही जिला कलेक्टर, एसपी और विद्युत मंडल के अधीक्षण यंत्री को इस बात की लिखित शिकायत कर दी थी लेकिन कोई उनकी समस्या पूछने नहीं आया. जब ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटा तो उन्होंने बुधवार से आंदोलन पर जाने का निर्णय ले लिया. आंदोलन की जानकारी भी ग्रामीणों ने फैक्स के जरिए वरिष्ठ अधिकारियों को दी थी, लेकिन फिर भी प्रशासन की ओर से कोई कार्यवाही नहीं हुई. खातेगांव क्षेत्र के बिजली अफसर बातव ने नवभारत को बताया कि ग्रामीणों ने शिकायत तो की थी लेकिन उसमें आंदोलन की कोई निश्चित तिथि नहीं दी थी. इससे विभ्रम की स्थिति पैदा हुई. दरअसल  फीडर जोड़े जाने का अधिकार वरिष्ठ अधिकारियों का होता है और इस मामले में भी उनसे संपर्क कर मार्गदर्शन मांगा जा रहा था लेकिन इसी दौरान अचानक ग्रामीणों ने आंदोलन शुरू कर दिया. ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले बीते साल भी उन्होंने आंदोलन किया था तब कहीं जाकर यथा स्थिति बनाने के निर्देश किए गए थे. उन्होंने सवाल किया कि प्रशासन कभी शिकायतों को गंभीरता से क्यों नही लेता ताकि इस तरह के आंदोलनों की जरूरत ही नहीं पड़े. उन्होंने बताया कि प्रशासन उनकी मांग को काफी हल्के स्तर पर ले रहा है. जबकि इलाके का विकास इस पर निर्भर करता है.

विद्युत मंडल के अधिकारी पशोपेश में
विद्युत मंडल के खातेगांव क्षेत्र के अधिकारी बातव ने नवभारत को बताया कि शहरी फीडर को यथावत रखने का निर्णय वरिष्ठ अधिकारी ही ले सकते हैं. उन्हें मामले की जानकारी दे दी गई है. हमारा ग्रामीणों से आग्रह है कि वे फिलहाल आंदोलन खत्म कर दे. उनकी बात कों वरिष्ठ कार्यालय तक भेजा गया है निर्णय होने में कुछ समय लगेगा. अब तक ग्रामीणों से कई दौर की बातचीत की गई है. लेकिन फिलहाल ग्रामीण अपनी बात पर अड़े हुए हैं और घेरा डालकर यहीं भोजन बना रहे हैं. यदि समय पर इलाके की बिजली चालू नहीं की गई तो लोगों को परेशानी होगी. यदि ग्रामीण बात नहीं मानते हैं तो मजबूरन नियमानुसार कार्यवाही होगी.

पूरा खातेगांव इलाका हुआ हलाकान
पूरे खातेगांव ब्लॉक के करीब 168 गांवों सहित खातेगांव और नेमावर की बिजली गुल हो जाने से पूरे इलाके में खलबली मची हुई है. इससे जहां नेेमावर में नर्मदा नदी का पानी देवास आने का काम प्रभावित हुआ है वहीं खातेगांव के नल-जल प्रदाय योजना भी प्रभावित हुई है. बताया जाता है कि गांवों में बिजली नहीं होने से कई लोगों के रूके पड़े हैं. यहां तक कि अब इन्र्वटर और बेटरियां भी काम नहीं कर रही हैं.

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