नई दिल्ली, 13 दिसंबर. अन्ना हजारे को तगड़ा झटका देते हुए केंद्र सरकार ने सिटिजन चार्टर, व्हिशल ब्लोअर प्रोटेक्शन बिल और ज्यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी बिल को लोकपाल से अलग करते हुए मंगलवार को इन तीनों बिलों को कैबिनेट की बैठक में मंजूर करा लिया. हालांकि खाद्य सुरक्षा बिल कैबिनेट में मंजूर नहीं हो पाया.

भ्रष्टाचार से लडऩे के लिए मजबूत जनलोकपाल बिल की मांग कर रहे अन्ना की इच्छा के विपरीत सरकार ने आज कैबिनेट में तीन अलग-अलग बिल पास करा लिए. इस तरह अन्ना के प्रस्तावित लोकपाल बिल के कई टुकड़े हो गए. न्यायिक जवाबदेही बिल के तहत न्यायपालिका पर नजर रखी जाएगी. जजों की संपत्ति का खुलासा भी इसी बिल के तहत होगा. लोकपाल पर होगी बैठक – लोकपाल बिल में जोड़-घटाव करने के लिए 19 दिसंबर को फिर कैबिनेट की बैठक होनी है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 15 दिसंबर को रूस जा रहे हैं और 17 को ही स्वदेश लौटेंगे. ऐसे में सरकार इन बिलों को पास कराने की हड़बड़ी में है.

क्या थी अन्ना की मांग

अन्ना हजारे की मांग की थी कि न्याय व्यवस्था को भी लोकपाल के ही दायरे में लाया जाए. इसके अलावा सिटिजन चार्टर के लिए अलग बिल लाया गया है. भ्रष्टाचार की शिकायत करने वालों की सुरक्षा से जुड़े ह्विसल ब्लोअर प्रोटेक्शन बिल भी आज की कैबिनेट में मंजूर करा लिया गया. अन्ना की मांग थी कि भ्रष्टाचार के मामले उजागर करने वालों की सुरक्षा के लिए भी लोकपाल में प्रावधान हो. सरकार ने इसे नजरअंजाद करके अलग बिल ला रही है. अन्ना और अधिकतर विपक्षी दलों की मांग है कि ये तीनों मुद्दे लोकपाल बिल में ही शामिल हों.

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