बाबा रामदेव संग आंदोलन पर एकमत नहीं

नई दिल्ली/नोएडा, 22 अप्रैल. टीम अन्ना कोर समिति की बैठक में उस वक्त हंगामा हो गया जब मुफ्ती शमीन काजमी बैठक की कार्यवाही की ऑडियो रिकॉर्डिंग कर बाहर भेज रहे थे। इस मसले पर काजमी और टीम अन्ना ने अलग-अलग मत जाहिर किए हैं। काजमी ने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए मुसलमानों की हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। काजमी ने भ्रष्टाचार के मसले के राजनीतिकरण पर भी अपनी आपत्ति जताई और केजरीवाल पर नाजायज फायदा उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि कोर कमेटी के सभी सदस्य चोर हैं।

उन्होंने मांग की कि इनके पीछे जो ताकतें हैं उनका पर्दाफाश होना चाहिए। इसके जवाब में टीम अन्ना ने कहा कि काजमी के बारे में यह पाया गया कि वह बैठक की कार्यवाही की मोबाइल फोन से ऑडियो रिकार्डिंग करके उसे बाहर भेज रहे थे। जब टीम के कुछ सदस्यों ने उन्हें ऐसा करते देखा तो उनको मोबाइल दिखाने को कहा, उनके ऐसा नहीं करने पर उन्हें निष्कासित कर दिया गया। टीम अन्ना की कोर कमेटी की बैठक में जोरदार हंगामा हुआ. बैठक के बाद मुफ्ती शमीन काजमी ने कोर कमेटी से त्यागपत्र दे दिया. अन्ना हजारे की मौजूदगी में हुई बैठक में अरविंद केजरीवाल, शांति भूषण, प्रशांत भूषण और किरण बेदी भी शामिल हुए. रामदेव के मसले पर टीम अन्ना के एक सदस्य ने नाम जाहिर न होने की शर्त बताया कि अगर अन्ना ने आंदोलन का फैसला किया होता तो इस पर किसी को भी ऐतराज नहीं होता। लेकिन, यहां मुद्दा यह है कि रामदेव ने मनमाने तरीके से इसकी घोषणा की और टीम अन्ना को इसके लिए विश्वास में नहीं लिया।

लोकपाल पर भी चर्चा
टीम अन्ना ने लोकपाल पर भी अपनी भविष्य की रणनीति के बारे में चर्चा की. सरकार राज्यसभा में लोकपाल विधेयक को ला सकती है. दो दिन पहले गुडग़ांव में एक संवाददाता सम्मेलन में अन्ना हजारे और रामदेव ने एक मई से सिलसिलेवार आंदोलन शुरू करने की घोषणा की थी. इसके बाद तीन जून को जंतर-मंतर पर संयुक्त अनशन की योजना थी. अन्ना हजारे एक मई को शिरडी से अपने अभियान की शुरुआत कर सकते हैं, वहीं रामदेव छत्तीसगढ़ के दुर्ग से यात्रा प्रारंभ करेंगे. पिछले एक साल से अन्ना हजारे और रामदेव के बीच सहयोग तथा मतभेदों की खबरों के बाद हजारे ने पिछले महीने घोषणा की थी कि टीम अन्ना और रामदेव दोनों एक-दूसरे का समर्थन करेंगे और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक दूसरे के अभियान में शामिल होंगे.

साझा आंदोलन नहीं
टीम में रामदेव को साथ लेने पर गहरे मतभेद हैं। मगर, इन मतभेदों के बीच भी इतना साफ हो गया है कि बाबा रामदेव के साथ साझा आंदोलन चलाने को टीम अन्ना राजी नहीं है। सूत्रों के मुताबिक टीम अन्ना के तीन अहम सदस्य प्रशांत भूषण, शांति भूषण और किरन बेदी बाबा रामदेव के साथ आंदोलन चलाने के सख्त खिलाफ हैं। इन सदस्यों का मानना है कि बाबा रामदेव विवादों में घिरे रहे हैं, ऐसे में उन्हें साथ लेने से आंदोलन की विश्वसनीयता पर असर पड़ेगा। गौरतलब है कि शनिवार को भी टीम अन्ना के एक मेंबर ने कहा था कि बाबा रामदेव अन्ना को विश्वास में लेकर आगे नहीं बढ़ रहे हैं। वह खुद को ही सबकुछ दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। अन्ना ने शुक्रवार को रामदेव के साथ गुडग़ांव में मुलाकात की थी। इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, पर टीम अन्ना का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्ना और रामदेव ने 1 मई से आंदोलन चलाने की घोषणा की थी। टीम अन्ना के एक सदस्य ने नाम जाहिर न होने की शर्त बताया कि अगर अन्ना ने आंदोलन का फैसला किया होता तो इस पर किसी को भी ऐतराज नहीं होता। लेकिन, यहां मुद्दा यह है कि रामदेव ने मनमाने तरीके से इसकी घोषणा की और टीम अन्ना को इसके लिए विश्वास में नहीं लिया।

Related Posts: