नई दिल्ली, 7 नवंबर. गांधीवादी कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने घोषणा की कि देश भर के सभी जिलों में कोर कमेटी बनेगी। इसके अलावा, इंडिया एगेंस्ट करप्शन अभियान के तहत बनी अपनी कोर कमेटी का पुनर्गठन भी करेंगे।

इसके पीछे अन्ना का उद्देश्य कमेटी में धार्मिक अल्पसंख्यकों और युवाओं सहित समाज के सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देना है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह दावा किया गया है कि अन्ना के कोर कमेटी का पुनर्गठन करने का प्रयास उस आरोप की नतीजा है, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि टीम अन्ना कुछ शक्तिशाली व्यक्तियों के हाथों की कठपुतली बनकर रह गई है. जो अन्ना हजारे को बरगला रहे हैं और उकने आंदोलन को राजनीतिक रंग दे रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में  अन्ना ने कहा, ‘भ्रष्टाचार आंदोलन के खिलाफ कोर कमेटी में समाज के सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देना जरूरी है। इसलिए हमने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को मजबूती देने के लिए सभी क्षेत्रों के प्रतिष्ठित नागरिकों, अल्पसंख्यक समूहों के प्रतिनिधियों और युवाओं को को आमंत्रित करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा अन्ना हजारे ने अपनी टीम के प्रमुख सदस्यों को लक्ष्य कर निशाना बनाने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार पर तीखा हमला किया।

उन्होंने कहा कि लोकपाल आंदोलन से डरे लोग ही मेरे समर्थकों और करीबी सहयोगियों पर हमला कर रहे हैं। उन लोगों को डर है कि अगर एक मजबूत लोकपाल तंत्र प्रभाव में आता है तो उनका राजनीतिक कैरियर खतरे में पड़ जाएगा। गांधीवादी कार्यकर्ता ने यह भी चेतावनी दी है कि वह और उनकी टीम किसी से नहीं डरती है और सरकार को चुनौती दी कि उनकी टीम के सदस्यों द्वारा की गई अनियमितताओं एवं कदाचार के कोई सबूत सामने लाए। अन्ना ने यह भी कहा कि हमे किसी का डर नहीं है। सरकार हमारी टीम के किसी भी सदस्य के खिलाफ कोई जांच करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी। इस बीच, कांग्रेस पार्टी अन्ना के उस दावे पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है कि सरकार लोकपाल आंदोलन से डर गई है। पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि अन्ना का यह बयान गलत है कि केवल लोकपाल कानून ही भ्रष्टाचार को खत्म कर सकता है। अनना यह भी गलत कह रहे हैं कि केवल उनका रास्ता सही है और दूसरे लोग (सरकार) इस मुद्दे से निपटने के लिए आवश्यक कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। सिंह ने कहा कि न्यायपालिका, नौकरशाही, सरकार और पुलिस को शामिल करके एक व्यापक नीति को अमल में लाकर ही भ्रष्टाचार को खत्म किया जा सकता है, न कि केवल एक कानून बनाकर।

सिंह ने यह भी कहा कि कोई भी राजनीतिक पार्टी अन्ना के लोकपाल आंदोलन से नहीं डर रही है। गौरतलब है कि अन्ना के ब्लॉगर राजू पारुलेकर ने पिछले हफ्ते अन्ना की कोर समिति के पुनर्गठन योजना के बारे में कुछ खुलासा किया था। उसके बाद अन्ना ने कहा था कि अपने पैतृक गांव रालेगण सिद्धी पहंचने के बाद वे अपने ब्लॉग को बंद कर देंगे। क्योंकि उन्हें अपने और उनकी टीम के खिलाफ साजिश किए जाने का शक है। कमेटी के पुनर्गठन संबंधी बात उस समय सामने आई थी जब टीम अन्ना की सदस्य किरण बेदी हवाई यात्रा धोखाधड़ी और अरविंद केजरीवाल पर हजारे अभियान के पैसे अपने एनजीओ में ट्रांसफर करने के आरोप लगे थे। वहीं, प्रशांत भूषण के कश्मीर में जनमत संग्रह की बात से भी विवाद को बढ़ावा मिला था। विरोधियों पर हमला गलत – अरविंद केजरीवाल ने नागपुर कार्यक्रम के दौरान उनके विरोधियों पर उनके समर्थकों द्वारा किए गए हमले की भत्र्सना करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार का विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं को हिंसा में शामिल नहीं होना चाहिए. क्योंकि ऐसा करने से अभियान कमजोर होगा।

‘जनलोकपाल को बढ़ा-चढ़ा कर बता रहे अन्ना’

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि अन्ना हजारे अपने जन लोकपाल विधेयक को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहे हैं।  मुझे लगता है वह जन लोकपाल विधेयक को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहे हैं। न्यायपालिका, नौकरशाही, पुलिस और सरकार की व्यापक रणनीतियों से ही भ्रष्टाचार को हटाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सिर्फ कानून बना देने से किसी की मदद नहीं होगी और भ्रष्टाचार सिर्फ लोकपाल के जरिए नहीं हटाया जा सकता। भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सरकार की ओर से अलग-अलग विधेयक लाने की बात पर हजारे के विरोध पर उन्होंने कहा, एक कानून या अलग-अलग कानून बनाने का फैसला लोकसभा करेगी। यह कहना उचित नहीं है कि जो मैं कहूंगा, वही सही है। उन्होंने हजारे के सहयोगियों को निशाना बनाए जाने के दावे पर उन्हें चुनौती दी और कहा कि हजारे उस राजनेता या दल का नाम बताएं, जिसने लोकपाल विधेयक का विरोध किया है। दिग्विजय ने कहा कि हजारे की ओर से लोकपाल का मुद्दा उठाए जाने से काफी पहले कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में इसका वादा किया था। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् (एनएसी) ने जन अधिकार कार्यकर्ताओं हर्ष मंदर और अरुणा राय से इस सिलसिले में एक विधेयक का मसौदा तैयार करने को कहा था।

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