नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर, देश के इतिहास में कम ही ऐसे चुनाव परिणाम होते हैं जिस पर राजनेताओं के साथ-साथ समाज के हरेक वर्ग की नजर होती है. हिसार चुनाव को लेकर शुरू से उत्सुक्ता दिख रही थी और चुनाव होने के बाद तो अन्ना फैक्टर के काम करने को लेकर कौतूहल चरम पर था.

अब जब परिणाम सामने है तो राजनीतिक दलों के साथ-साथ समाज के अन्य वर्ग के लोग भी समीक्षा करने में लगे हैं. कांग्रेस ने जहां अन्ना फैक्टर को खारिज किया तो भाजपा ने अन्ना फैक्टर को स्वीकारने में स्वर को सुस्त कर दिया. लेकिन अरविंद केजरीवाल ने अन्ना फैक्टर का ढोल पीटते हुए लगे हाथों यह कह दिया कि सावधान हो जाए अन्यथा यूपी में हार की मुंह देखनी होगी.

बहुप्रतिक्षित हिसार चुनाव परिणाम सामने आने के बाद भले ही कांग्रेस चुनाव में हार गई हो लेकिन ये बात साफ हो गया कि अन्ना फैक्टर उतना नहीं चला जितना प्रचार प्रसार किया जा रहा था. चुनाव परिणाम के पहले ही ये अनुमान लगाया गया था कि कांग्रेस तीसरे स्थान पर हो सकती है. हालांकि हिसार चुनाव परिणाम को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि हार दुखदायी होता है और इसकी समीक्षा की जाएगी. विशषकों की माने तो इस चुनाव परिणाम के बाद आपाधापी में कांग्रेस कोई कदम नहीं उठायेगी. कांग्रेस रणनीतिकार इस बात को मानते है कि हिसार चुनाव परिणाम में कोई आश्चर्यजनक परिणाम सामने नहीं आया है. पार्टी रणनीतिकार इस बात को लेकर आशान्वित थे कि भजनलाल के परंपरागत सीट पर उनके पुत्र कुलदीप बिश्रोई को सहानुभूति के कारण विजय मिल सकती है. ऐसे में पार्टी के लिए कोई बड़ा झटका नहीं है. हालांकि अन्ना फैक्टर से कांग्रेस वोट में कुछ कमी जरूर आई है. पिछले चुनाव में कांग्रेस को यहां पर 24 फीसदी मत प्राप्त हुए थे.

जबकि इस बार मतो के प्रतिशत में गिरावट आयी. सूत्रों की माने तो हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए भी यह परिणाम परेशानी का सबब बन सकता है. उनकी कुर्सी को फिलहाल तो कोई खतरा नहीं है लेकिन चौधरी वीरेन्द्र सिंह की रणनीति उन पर हावी हो सकती है. इस हार से भले ही कांग्रेस का नुकसान हुआ हो, पर हुड्डा विरोधी इस परिणाम से खुश होंगे वहीं दूसरी ओर भाजपा इस जीत का श्रेय अन्ना को देने से हिचकिचा रही है. लेकिन दबे जुबान से उसके नेता भी कह रहे हैं कि यदि कांग्रेस का वोट कम नहीं होता तो यह सीट फंस सकती थी.

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