श्री अन्ना हजारे के बेतुके तौर तरीकों व धमकियों से  सरकार, राजनैतिक पार्टियां और बंबई हाईकोर्ट तक ने क्षुब्ध होकर उनके प्रति सख्त तरीका अपना लिया है. कांग्रेस एवं यू.पी.ए. की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने भी यह कह दिया है कि अब अन्ना से कोई संवाद नहीं होगा और मैदान में और चुनावों में निपटा जायेगा.

बंबई हाईकोर्ट ने अन्ना टीम की एक याचिका खारिज करते हुए कहा है कि संसद में लोकपाल विधेयक पेश हो चुका है वही उसका स्वरूप तय और पारित होगा. अन्ना अपने विचार घर बैठकर भी व्यक्त कर सकते हैं. उसके लिए मुफ्त या रियायती दरों पर मैदान उपलब्ध कराने के लिए  वह सरकार से नहीं कह सकते. केंद्रीय विधि मंत्री श्री सलमान खुर्शीद ने कहा है कि सरकार श्री अन्ना हजारे के विचारों को लोकपाल में जितना समाहित कर सकती है उतना किया जा चुका है. वे संसद के ऊपर नहीं है और न ही वे संसद या सरकार को कोई निर्देश दे सकते है. पांच सदस्यों की अन्ना टीम को ऐसा कोई अधिकार नहीं है. उन्हें अपने जेल भरो या चुनाव में कांग्रेस के विरुद्ध प्रचार की सीमायें स्वयं तय कर लेनी चाहिए. जांच के मामले में लोकपाल सी.बी.आई. के काम में हस्तक्षेप नहीं कर सकते. लेकिन लोकपाल किसी और संस्थान को जांच काम सौंप सकेंगे.

अन्ना ने घोषणा की है कि वे मुंबई में 27 से 29 दिसंबर 3  दिन तक अनशन पर बैठेंगे और 30 को दिल्ली में श्री सोनिया गांधी व श्री राहुल गांधी के निवास के सामने धरने पर बैठने के साथ देश में ‘जेल भरो’ आंदोलन प्रारंभ करेंगे. कांग्रेस महासचिव श्री दिग्विजय सिंह ने कहा है कि श्री अन्ना हजारे का विरोध भ्रष्टïचार के विरुद्ध नहीं बल्कि वास्तविकता में कांग्रेस के विरुद्ध है. वे कोई भी मुद्दा बनाकर कांग्रेस के विरुद्ध चुनाव प्रचार में जाना चाहते है. कांग्रेस के राज्य मंत्री श्री नारायण सामी ने कहा है कि लोकपाल विधेयक को किसी के द्वारा सड़कों या मैदानों में पास नहीं किया जा सकता और वह इस मामले में सख्ती से निपटेगी. पांच सदस्यों की अन्ना टीम सरकार पर एक विधेयक पारित करने के लिये दबाव नहीं डाल सकती. विधेयक को संसद में ही मतदान से पारित किया जा सकता है. इन दिनों अन्ना हजारे अपने गांव रालेगण-सिद्धि में हैं और बीमार हो गये हैं. यदि 27 दिसंबर तक उनकी हालत नहीं सुधरी तो हो सकता है कि उनके आंदोलन की तिथियों में कुछ परिवर्तन करना पड़े.

लोकपाल विधेयक पर भूतपूर्व राष्टपति श्री ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा है कि लोकपाल भ्रष्टïचारियों के विरुद्ध एक नया कानून होगा. लेकिन प्रश्न यह है कि हम ऐसे मामलों में कितनी शीघ्रता से काम करते हैं, यह देखना होगा. कितनी ठीक तरह से यह कानून भ्रष्टचार के मामले को जकड़ पायेगा. तुरन्त कार्यवाही करने की प्रक्रिया इस विधेयक में निर्धारित होनी चाहिए कि मामला पकड़ा और सजा दे दी. अन्ना के आंदोलन की राजनैतिक दिशा 30 से नव वर्ष के प्रथम दिन 1 जनवरी तक जेल भरो की रहेगी. उसके बाद वे कांग्रेस के विरुद्ध चुनाव प्रचार करने उन पांच राज्यों में जायेंगे जहां चुनाव विभिन्न तिथियों में 10 जनवरी से 3 मार्च तक उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर होने जा रहे है. अन्ना स्वयं संभवत: उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के विरुद्ध प्रचार करेंगे.

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