नई दिल्ली, 5 अप्रैल. आज से ठीक एक साल पहले अन्ना हजारे ने अपने टीम के साथ जन लोकपाल के लिए लड़ाई की शुरुआत पहले अनशन के साथ की. वह ऐसा वक्त था जब देश के अंदर एक के बाद भ्रष्टाचार के खुलासे हो रहे थे और दुनिया के तमाम दूसरे देशों में मास मूवमेंट की बुनियाद पड़ रही थी. ऐसे बदलते वक्त में अन्ना का जन लोकपाल मूवमेंट बड़ी उम्मीदों के साथ आया.

अन्ना मूवमेंट को गजब का समर्थन मिला. कहा गया कि जेपी के बाद यह इस देश में चला सबसे बड़ा और प्रभावकारी आंदोलन है. समाज के हर तबके का समान समर्थन मिला. सरकार बैकफुट पर जाती दिखी. लेकिन हालात बदले और साथ में दिशा भी बदली. टीम अन्ना कई विवादों के बीच फंसी. लोकपाल के गैर राजनीतिक आंदोलन ने राजनीति की धारा पकड़ी और टीम अन्ना कांग्रेस के खिलाफ खुलकर सामने आई. आरोप – प्रत्यारोप का दौर चला. तेवर नरम भी पड़े. इस बीच लोकपाल संसद में मंजूरी के लिए राह ताकता रहा. कुल मिलाकर आज एक साल पूरा होने पर जन लोकपाल की लड़ाई वहीं पहुंच गई जहां एक साल पहले थी.

टर्निंग पॉइंट बना हिसार लोस चुनाव

लोकपाल के लिए टीम अन्ना की ओर से चलाए जा रहे आंदोलन की दिशा पहली बार अक्टूबर 2011 में हुए हिसार के लोकसभा चुनाव में मुड़ी. अब तक टीम अन्ना ने आंदोलन को गैर राजनीतिक बताया था. लेकिन हिसार में टीम अन्ना ने कांग्रेस के विरोध में वोट करने की अपील की. विरोध में चुनाव प्रचार किया. इसके बाद टीम अन्ना राजनीतिक विवादों में घिर गई.

लोकसभा से निकला बिल राज्यसभा में अटका

केंद्र सरकार ने किसी तरह लोकसभा से लोकपाल बिल को पास करा दिया. लेकिन राज्यसभा में बहुमत नहीं होने के कारण सरकार इसे पास नहीं करा सकी. टीम अन्ना और विपक्षी पार्टियों के साथ सरकार का इन बिंदुओं पर विरोध रहा. राज्यसभा में बिल को पास कराने को लेकर जमकर हंगामा भी हुआ.

* पहला अनशन- अप्रैल 5 अप्रैल 2011
* दूसरा अनशन- 16 से 28 अगस्त 2011
* तीसरा अनशन- दिसंबर 27 , 2011 मुंबई
* चौथा अनशन- 25 जनवरी 2012
* पांचवां अनशन- 25 मार्च 2012

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