नई दिल्ली, 2 दिसंबर, नससे. जनलोकपाल बिल की माग को लेकर आदोलन की तैयारी में जुटे अन्ना हजारे टीम के सदस्य यहां  रणनीति तय करने के लिए जुटेंगे.

संसद की स्थाई समिति के रुख को लेकर अन्ना हजारे 11 दिसंबर को जंतर मंतर पर एक दिन के अनशन पर बैठने जा रहे हैं. इसके बाद  टीम के सदस्य 14 -15 दिसंबर को रणनीति तय करेंगे. अन्ना ने पहले ही ऐलान किया है कि यदि संसद लोकपाल बिल को परित नहीं करती है तो वह 27 दिसंबर से रामलीला मैदान पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे. स्थाई समिति द्वारा पलट जाने के मुद्दे पर मनीष ने कहा कि यदि सी ग्रुप कर्मचारियों को लोकपाल से बाहर रखा जाता है तो इससे आम आदमी को कोई लाभ नहीं पहुंचेगा.

राहुल के इशारे पर सब कुछ : अन्ना हजारे

रालेगण सिद्धी. गांधीवादी अन्ना हजारे ने एक बार फिर कहा है कि प्रधानमंत्री और सरकार उनसे किए गए वादों से मुकर गए हैं. अन्ना ने यह भी आरोप लगाया कि संसद की स्थायी समीति कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के इशारों पर काम कर रही है.

अन्ना हजारे ने यह भी कहा कि लोकपाल पूरी तरह से स्वतंत्र संस्था होनी चाहिए. यह सीबीआई की तरह सरकार के नियंत्रण में नहीं होना चाहिए. अन्ना ने कहा कि समीति ने पहले तय किया था कि निचले स्तर के कर्मचारी भी लोकपाल के दायरे में आएंगे लेकिन अब राहुल गांधी के इशारे पर इस फैसले को वापस ले लिया गया है. अन्ना हजारे ने एक बार फिर सरकार को चेतावनी दी कि यदि मजबूत लोकपाल नहीं आया तो 27 दिसंबर से एक बड़ा आंदोलन होगा. अन्ना हजारे की चेवानी को एक बार फिर से दरकिनार करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि अन्ना अनशन करना चाहते हैं तो अनशन करें. उन्हें अन्ना की नहीं देश की चिंता है.

अन्ना हजारे से जब पूछा गया कि क्या उनके पास इस बात का कोई प्रमाण है कि राहुल गांधी के इशारों पर ही संसद की स्थायी समीति काम कर रही है अन्ना ने कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि जो भी हो रहा है वो अन्ना के कहने पर हो रहा है. अन्ना हजारे ने यह भी आरोप लगाया कि ग्रुप सी और ग्रुप डी के अधिकारियों को लोकपाल के दायरे से बाहर रखकर नेता खुद को बचा रहे हैं. अन्ना ने कहा कि बिना नेताओं के सहयोग के कोई भी अधिकारी भ्रष्टाचार नहीं कर सकता. भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने के लिए ही नेता जनलोकपाल को नहीं आने दे रहे हैं. हालांकि अन्ना हजारे ने यह भी स्पष्ट कहा कि उन्हें लोकपाल के संवैधानिक संस्था बनाए जाने पर कोई ऐतराज नहीं है लेकिन यह पूरी तरह स्वतंत्र और सरकार के नियंत्रण से बाहर होना चाहिए.

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