मायूस अमेरिका ने दी साझा हितों की दुहाई

वाशिंगटन, 13 दिसंबर. अमेरिका ने कहा है कि वह चाहेगा कि भारत खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का रास्ता साफ करे, लेकिन यह निर्णय भारत सरकार को लेना है. विदेश विभाग के प्रवक्ता मार्क टोनर ने संवाददाताओं से कहा कि हमने पिछले सप्ताह कहा था कि हम महसूस करते हैं कि यह कदम अमेरिका और भारतीय लोगों के तथा व्यापारियों के, सबके हित में है और जाहिरतौर पर दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा.

सरकार खुद ले निर्णय
यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका भारत में खुदरा व्यापार के निर्णय के आगे न बढ़ पाने से निराश है, टोनर ने कहा कि हम चाहते हैं कि भारत इस दिशा में आगे बढ़े. लेकिन यह निर्णय भारत सरकार को लेना है. पिछले सप्ताह भी टोनर ने कहा था कि खुदरा व्यापार में एफडीआई दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा, लेकिन वह भारत जैसे लोकतंत्र में इस मुद्दे पर बहस पूरी होने का इंतजार करेगा. उधर, नई दिल्ली में खुदरा बाजार में एफडीआइ पर ब्रेक और परमाणु उत्तरदायित्व कानून को लेकर बरकरार अड़चनों के बीच अमेरिका ने भारत को आर्थिक क्षेत्र में साझा हितों की दुहाई दी है. भारत पहुंचे अमेरिकी उप विदेशमंत्री विलियम बन्र्स ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सरकार के आला मंत्रियों से मुलाकात कर मन टटोलने की कोशिश की. विदेश मंत्री एसएम कृष्णा से मुलाकात के बाद बन्र्स का कहना था कि भारत के साथ अपने रिश्तों को अमेरिका सर्वाधिक अहमियत देता है. बन्र्स ने जोर दिया कि रक्षा और आर्थिक क्षेत्र में साझेदारी में दोनों देशों के साझा हित हैं.

भारत के खुदरा बाजार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश [एफडीआइ] को इजाजत के फैसले को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाले जाने से अमेरिका असहज है. उप विदेश मंत्री बनने के बाद पहली बार भारत आए बन्र्स ने विदेश सचिव रंजन मथाई और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन के साथ मुलाकात में परमाणु करार के अलावा अफगानिस्तान और पाकिस्तान के हालात पर भी चर्चा की. सूत्रों के मुताबिक परमाणु जवाबदेही कानून में अमेरिकी आपत्तियों के समाधान की गुंजाइश तलाशने का एजेंडा लेकर आए बन्र्स को फिलहाल नई दिल्ली से कोई ठोस भरोसा हाथ नहीं लगा है. भारत के परमाणु उत्तरदायित्व कानून के प्रावधानों को अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा व्यवस्था से अलग बताते हुए अमेरिकी कंपनियां इसे लेकर आपत्तियां जता रही हैं.

यह मुद्दा बीते दिनों बाली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति की मुलाकात के दौरान भी आया था. अपने दौरे को ओबामा-मनमोहन मुलाकात का फॉलो-अप करार देते हुए बन्र्स ने कहा कि परमाणु करार को पूरी तरह अमल में लाना दोनों देशों का साझा संकल्प है. बातचीत के नतीजों के बारे में पूछे गए सवालों को बन्र्स टाल गए, लेकिन यह जरूर कहा कि रिश्तों को मजबूत करने के लिए हम प्रतिदिन मेहनत करते हैं. उन्होंने पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लै की उस टिप्पणी का खंडन किया कि लश्कर आतंकी डेविड कोलमैन हेडली पर सूचनाएं साझा करने में अमेरिका इछुक नहीं था. अमेरिकी उप विदेश मंत्री का कहना था कि आतंकवाद के खिलाफ सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था को दोनों देशों ने मिलकर मजबूत बनाया है और इस काम को हम जारी रखेंगे.

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