मध्यप्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की श्री शिवराज सिंह चौहान सरकार ने बिजली जैसे वस्तु पर अप्रैल फूल बनाया है. बजट में वैट के नाम पर 5 प्रतिशत टैक्स लगाया और बजट पारित होते समय उसे हटा लिया. कुछ ही दिनों पर बिजली के दरों में 7.27 प्रतिशत बढ़ौत्री कर दी. इधर हटा दिया उधर और ज्यादा बढ़ा कर लगा दिया. किसी जनतंत्रीय  प्रणाली में सरकार की जनता के साथ ऐसी चालबाजी औछी राजनीति है. कुछ दिनों पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की थी कि बिजली उपोक्ताओं के सीमा तक बिजली खपत पर सरकार बिल में सबसिडी देगी. कुछ दिनों तक की बिलों में यह सबसिडी दिखाई गई. कभी कुछ ऐसा गुणा भाग लगाये गये कि वह सबसिडी लगाई नहीं गई. लेकिन अब जो सरकार ने बिजली उपभोक्ता के लिये घोषणा की है वह चार्ज पर सरचार्ज लग रही है.

राज्य के विद्युत नियामक आयोग ने 7.17 प्रतिशत की वृद्धि की है. लेकिन इसकी गणना भी ऐसी रखी गई है कि वह उपभोक्ता को 7.27 प्रतिशत हो जायेगी. शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में अंतर रखते हुए दोनों ही क्षेत्रों मेंं बिजली पर स्थाई प्रभार भी बढ़ गया है. पिछले 8 सालों में बिजली की दरों को आठ बार बढ़ाया गया है. संसार में जबसे मानव विकास के साथ शासन व्यवस्था का विकास हुआ है. उसमें जनकल्याणकारी शासन व्यवस्था आने पर यह स्वत: स्थापित हुआ कि सरकार शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य, आवास, पानी, प्रकाश की व्यवस्था अनिवार्य जन सेवा के रूप में करेगी. लेकिन जबसे सेवा कर (सर्विस टैक्स) की प्रणाली वर्तमान प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने उनके वित्त मंत्री (नरसिम्हा राव सरकार) के रूप में लागू की है, तब से यह आभास होने लगा है कि सरकार शासन व प्रशासन नहीं है बल्कि सरकार चलाने की दुकान है जो भी वस्तु चाहिए उस पर सर्विस टैक्स के रूप में मूल्य देकर ले जाओ. सड़कें सरकार ही बनाती रही है अब उस पर बी.ओ.टी. व टोल टैक्स के नाम पर उसे धंधा बना दिया गया है.

अब सरकार जनता की सेवा नहीं कर रही है बल्कि सेवा को वस्तु के रूप में बेच रही है. शायद वह दिन भी आने वाला है जब कोई पीडि़त व्यक्ति पुलिस में अपराधी के विरुद्ध रिपोर्ट लिखाने जायेगा तो उससे पुलिस कार्यवाही करने के लिए सर्विस टैक्स लिया जायेगा. मुलजिम को पकड़वाने के लिये सर्विस टैक्स देना होगा. अब सरकार चलाना आमदनी का एक धंधा हो गया है. अभी तक दफ्तरों में रिश्वत मांगी है- अब आगे से उसी काम के लिये सर्विस टैक्स मांगा जायेगा. चुनावों पर करोड़ों रुपया इसलिए खर्च किया जाता है कि वह करोड़ों की कमाई का धंधा बन गया है. यह बिलकुल खुला हुआ है कि कोई किसी भी धंधे में जेब से पैसा नहीं लगाता है. एक अप्रैल से राज्य की बढ़ी बिजली दरों के साथ केन्द्र के ढेर सारे सर्विस टैक्स भी 10 से 12 प्रतिशत होकर लगभग वस्तुओं पर आ गये हैं. अब सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं है- सभी जनता को खरीदना व भुगतना है.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
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