राजनैतिक संकटों के कारण नाईजीरिया और इरान में पेट्रो क्रूड आइल में काफी कमी आ जाने से विश्व में पेट्रो पदार्थों में बड़े पैमाने पर उतार-चढ़ाव आने की संभावनाएं दिख रही है. अमेरिका इरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने के लिए राजनैतिक व व्यापारिक प्रतिबंध लगा रहा है. ओबामा सरकार नये अधिनियम के तहत न सिर्फ दूसरे देशों को इरान से पेट्रो क्रूड खरीदने पर रोक लगाता है बल्कि उन कंपनियों पर भी रोक लगाता है जो इरान के साथ अमेरिकी बैंक खाते में कारोबार चलाते है. इन प्रतिबंधों से इरान के साथ-साथ अन्य देशों को भी परेशानी होगी. इससें भारत, चीन और यूरोप के बड़े हिस्से को तेल की आपूर्ति की कमी झेलनी पड़ेगी. अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से इरान की मुद्रा रियाल का मूल्य काफी नीचे कर अब तक के सबसे न्यूनतम स्तर पर आ गया है. अमेरिका और यूरोपीय यूनियन संभवत: शीघ्र ही इरान से पेट्रोल क्रूड खरीदना बंद करने जा रहे है. इसमें इरान से तेल का उठाव रुकने से उस देश की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जायेगी. इसका राजनैतिक प्रभाव भी कुछ ऐसा हो सकता है कि वहां की सरकार भी गिर जाए. इरान के राष्ट्रपति व अन्य राजनेता इस हालात में दुनिया के अन्य देशों में अपने पेट्रो क्रूड के लिये नये बाजार तलाश रहे हैं. इरान सहित सभी अरब राष्ट्रों की अर्थव्यवस्था पूरी तौर पर पेट्रो क्रूड पर आधारित है.
इरान ने सब राष्ट्रों से अपील की है कि इरान पर तेल प्रतिबंध से दुनिया में इसकी आपूर्ति में जो कमी आयेगी उसका फायदा अरब राष्ट्र पेट्रो क्रूड का उत्पादन बढ़ाकर न उठाएं. अरब के कई तेल उत्पादक राष्ट्र पेट्रो व्यापार में भारी बिक्री से भारी मुनाफा कमाने के लिए उनके देशों में पेट्रो क्रूड उत्पादन खूब बढ़ाने के लिये तैयार हो गये है. दुनिया में सबसे ज्यादा तेल भंडार सऊदी अरब में है. उसके बाद क्रम में इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इरान का नंबर आता है. सऊदी अरब के पेट्रोलियम मंत्री अली अल नायमी ने घोषणा कर दी है उनका देश अपने उपभोक्ता देशों की जरूरत के लिये पेट्रो क्रूड का उत्पादन कितना भी बढ़ाकर पेट्रो पदार्थों में कमी नहीं आने देगा. सऊदी अरब की इस घोषणा का यह असर होगा कि दूसरे अरब राष्ट्र भी अपने यहां भारी व्यापार करने के लिये पेट्रो क्रूड का उत्पादन सर्वाधिक मात्रा में बढ़ा देंगे.
इन दिनों इराक, कुवैत व लीबिया पूरी तरह से अमेरिका पर फौजी संरक्षण के लिये आश्रित है. इरान इन दिनों सऊदी अरब के बाद सबसे ज्यादा प्रतिदिन 3.5 मिलीयन बैरल पेट्रो क्रूड का निर्यात करता है. अन्य अरब देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने से इस कमी की पूर्ति आसानी से हो जाएगी. ऐसी हालत में इरान अरब राष्ट्रों के समूह में भी अलग पड़ जायेगा और उसकी सरकार व अर्थ व्यवस्था दोनों ही ध्वस्त हो सकती हैं. इरान में सत्ता पलटने की स्थिति से इस बात की संभावना हो गई है कि वहां भी इराक, सऊदी अरब की तरह अमेरिका के प्रभाव की सरकार बन जाये और वर्तमान सरकार का इराक की सद्दाम हुसैन सरकार की तरह खात्मा हो जाए. इरान ने भी धमकी दी है कि यदि उस पर प्रतिबंध लगाये गये तो वह भी हुरमुज की समुद्री खाड़ी से सऊदी अरब सहित सभी अरब राष्ट्रों के पेट्रो क्रूड जहाजी टैंकरों का आवागमन ही रोक देगा. स्थिति बहुत ही गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी है. नाईजीरिया में अशांति बढऩे से वहां तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका से सोमवार को एशियाई बाजारों में पेट्रो क्रूड की कीमतों में तेजी दर्ज की गई.
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