प्रदेश सरकार पर मंत्री ने लगाये आरोप

भोपाल, 25 अप्रैल. एक कार्यक्रम के दौरान राजधानी में आये उत्तरप्रदेश के राज्य मंत्री एवं मेडीसन बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र त्रिपाठी ने प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लेते हुए बताया कि म.प्र. में होमोपैथी की जितनी दुर्दशा है उतनी देश के किसी भी प्रदेश में नहीं है. गत दिवस हमसाई द्वारा आयोजित एक  राष्ट्रीय सेमीनार में डॉ. त्रिपाठी द्वारा कुछ ऐसे ही आरोप लगाये गये थे.

उक्त मौके प्रदेश सरकार के पशुपालप एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री अजय विश्रोई ने चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति डा. डीपी लोकमानी राज्य होमियोपैथी चिकित्सा परिषद के रजिस्टार डॉ. आयशा अली केन्द्रीय होमियोपैथी चिकित्सा परिषद के सदस्य डॉ. मो. जकारिया हमसाई के अध्यक्ष डॉ. अमित पान्डेय, उपाध्यक्ष डॉ. ओपेन्द्र मणी त्रिपाठी, राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. दीपक सिंह सहित कई हस्तियां मौजूद थी.

डॉ. शैलेन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि म.प्र. में अब तक न तो मेडीसन बोर्ड की स्थापना हो पाई है. और न ही फार्मेसी पाठ्यक्रम की शुरूआत इसके अलावा पीजी कोर्स जैसी तामंम विसंगतियां सामने है. प्रदेश सरकार द्वारा बीस होमोपैथी कालेज को मान्यता दे दी गयी. इनमें से एक मात्र शासकीय कालेज को छोड़ बाकी 19 कालेज प्रायवेट है. वहीं उत्तर प्रदेश में 7 शासकीय कालेज संचालित होते है. इसके अलावा उ.प्र. में मेडीसिन बोर्ड का गठन भी बहुत पहले हो चुका है. राज्य मंत्री डॉ. त्रिपाठी ने प्रदेश सरकार के मंत्रियों को उ.प्र. के होमोपैथिक कालेजों का मुआयना करनें को कहा है. ताकि इस बात का पता चल सके कि अखिर ऐसी कौन सी खास चीज है. जिसके चलते म.प्र. में होमोपैथिक  चिकित्सकों की दुर्दशा हो रही है.

वहीं उ.प्र. में अधिकांश होमोपैथिक चिकित्सक एलोपैथिक अस्पतालों में अपनी सेंवाऐं बहुत कम पैसे में दे रहे है. जबकि पड़ोसी राज्य उ.प्र. में ऐसी होमोपैथिक बहुत कम मिले है. जो किसी दूेसरी पैथी के प्रति आकर्षित जो दूसरी पैथी के प्रति आकर्षित हो, कार्यक्रम के दौरान डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि यहां के अधिकांश कलेजों में गुणवत्ता विहीन शिक्षा दी जा रही है. जिसके कारण आयोग्य होमोपैथिक चिकित्सकों की भरमार हो रही है. वहीं चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डीपी लोकमानी ने होमोपैथिक दुर्दशा के पीछे होमोपैथिक छात्रों को दोषी मानते हुए बताया कि कालेजों में लगातार शिकायतें मिल रही है. कि छात्रों की उपस्थिति 50 प्रतिशत भी नहीं हो पा रही है. यानि छात्र शिक्षा अर्जित नहीं करना चाहते इसके अलावा शोध कार्यो में बल देते हुए डॉ. लोकमानी ने कहा कि अगर कोई होमियो पैथिक चिकित्सा या छात्र शोध कार्य करना चाहते है तो विश्वविद्यालय सहयोग करेगा. होमियोपैथिक विकास हेतु शोध कार्य किये जाने की अवश्यकता है. अपने संबोधन में डॉ. अमित पान्डेय ने प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि सरकार होमियोपैथिक चिकित्सकों के साथ सौतेला व्यवहार अपना रही है.

एनआरएचएम के तहत वर्ष 2011-12 का आयुष चिकित्सकों के नियुक्ति हेतु अभी भी पद नहीं निकाले गये है. वहीं डॉ. ओपेन्द्र मणि त्रिपाठी ने मंत्री अजय विश्रोई से होमोपैथिक सभागार बनाने हेतु प्रस्ताव रखा गया केन्द्रीय होमोपैथिक चिकित्सा परिषद के सदस्य डॉ. मो. जकारिया ने कहा कि सरकार अपने गजेटस को भूल गई है. जिसमें साफ लिखा हुआ है कि यदि गांवों में एलोपैथिक चिकित्सा ज्वाईन नहीं करते है. तो तत्काल वहां होमियोपैथिक अथवा आयुर्वेदिक चिकित्सकों की संविदा नियुक्ति 15 हजार वेतनमान पर कार दी जाये. हमसाई के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. दीपक सिंह ने उ.प्र. के मेडीसन बोर्ड उपाध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र त्रिपाठी का समर्थन करते हुए बताया कि प्रदेश में होमियोपैथिक की दुर्दशा के पीछे सरकार की गलत नीतियां है. गांवों में स्वास्थ्य सुविधाऐं बेहद खराब है. आयुष चिकित्सक लम्बे समय से इंतजार कर रहे है. कि सरकार ग्रामीण ईलाकों में हमारी तैनाती कर दे. इन सब के बावजूद सरकार द्वारा एमबीबीएस छात्रों से वांड भरवाकर मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है. बुद्धिजीवी तबका सरकार के इस नीति का गलत मान रहा है.

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