टीकमगढ़ 1 अक्टूबर नससे. नगर में शुक्रवार को आठ लोगों की मौत और चार लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की घटना देशी बम के विस्फोट से नहीं बल्कि सेना के रॉकेट के ब्लास्ट होने से हुयी थी.

यह जानकारी घटना की विशेषज्ञों द्वारा की यी जांच में सामने आयी है. बताया गया है कि कुचवंदियों द्वारा छुआरे एवं दाख के बदले में कवाड़ का धंधा किया जाता है और समीपस्थ बबीना केंट में सेनाद्वारा प्रशिक्षण के दौरान दागे गये राकेट के ब्लास्ट ना होने पर उक्त राकेट ग्रामीणों को जंगलों में मिल जाते है. उन्हे यह कुचवंदिया घर लाकर तोड़ फोड़कर ताबा, पीतल व वारूद को बेचकर खासा मुनाफा कमाते थे . इसी तरह के कार्य के समय उन निष्क्रिय राकेट लांचरों में से एक चोट पडऩे पर ब्लास्ट हो गया था.

विशेषज्ञ टीम के प्रभारी हेमंत त्रिपाठी, मनोज विश्वकर्मा, द्वारका प्रसाद आदि आर्मी के जबानों ने डीआईजी वेदप्रकाश शर्मा पुलिस अधीक्षक आकाश जिंदल के निर्देशों में घटना स्थल का निरीक्षण कर दो जिंदा राकेट लांचरों का नाम एनजीपीआर 9 जो 15 इंच लंबे एवं लगभग आठ किलो बजन के घटना स्थल से बरामद किये . जिन्हें विशेषज्ञो द्वारा बाद में निष्क्रिय कर दिया गया.यदि दोनो राकेट भी कल घटना के समय ब्लास्ट हो जाते तो नगर में और बड़ा दिल दहला देने वाला नसंहार हो सकता था अब इस स्थिति सामान्य बताई जा रही है.

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