• धनतेरस पर बाजारों में करोड़ों की खरीदारी
  • अनब्रांडेड व ब्रांडेड वस्त्रों में लगी होड़

इंदौर/म.प्र. के विभिन्न क्षेत्रों से, 24 अक्टूबर. गुलाबी ठंड की आहट के साथ दीपावली का त्यौहार बहुत सारी सौगातें लाता हैं. गहने, मिठाई व अन्य चीजों के अलावा इस पर्व पर सजने धजने का विशेष महत्व हैं.

एक मान्यता के अनुसार दीपावली की पूजा में नये वस्त्र धारण करने के वर्षभर सुख-शांति से गुजरता हैं. एक जमाना था, जब घर पर दर्जी की बुलवाकर बाजार से खरीदे गये थान के घर के सदस्यों के लिए उनकी पसन्द के कपड़े बनवाये जाते थे, लेकिन अब वो दौर गुजर चुका हैं. पहले अनब्रांडेड और उसके बाद विकसित हुई माल संस्कृति के कारण एलेन सोली, कुटन्स, पैन्टालून, वेस्ट साईट, डिकाट, लेवाईस, पीटर इंग्लैंड, ली आदि अन्तर्राष्टï्रीय ब्रान्डों की सहज-सुलभ उपलब्धि के कारण घर में दर्जी को बिठाकर कपड़े बनवाने की बात युवा पीढ़ी को शायद हजम ही न हो.

बहरहाल किसी समय चरम पर रहने वाले राजबाड़ा, सीतलामाता बाजार और इनके आस-पास के अनब्रांडेड कपड़ों के बाजार की ग्राहकी भी मॉल्स की और रूख कर रही हैं. हालाँकि रेडीमेड कपड़ा व्यापारी संघ के शांति प्रिय डोसी इससे इन्कार करते हैं. ब्रांडेड कपड़े पहनने वाला अनब्रांडेड कपड़े नहीं खरीदता लेकिन वे यह बात स्वीकारते हैं. कि बढ़ती मंहगाई ने इस बाजार की ग्राहकी 20 प्रतिशत तक कम कर दी हैं, वहीं ब्रांडेड शोरूम द्वारा दिये जाने वाले एक से एक लुभावने ऑफर की वजह से ग्राहकी 10 से 15 प्रतिशत और भी कम हो सकती हैं.

दूसरी तरफ मॉल्स और अन्य स्थानों पर बिकने वाले देश-विदेश के ब्रांडेड कपड़े स्टोर्स द्वारा एक पर एक फ्री या 50 से 70 प्रतिशत तक छूट के ऑफर्स के कारण ग्राहकों की भीड़ आकर्षित जरूर कर रहे हैं. युवा वर्ग खास तौर से इसी सेगमेंट की और रूख कर रहा हैं. इसके पीछे वहां का चक-दक माहौल भी हैं, जहां युवा वर्ग को विशिष्ट दर्जे का ट्रीटमेंट मिलते दिखता हैं.

गृहणियों में दीपावली पर कम से कम एक नई साड़ी बजट अनुसार खरीदने की परम्परा सी रही हैं. उच्च व उच्च मध्यम वर्ग की महिलाएं जहां बनारसी और सिल्क की साडिय़ों को तवज्जों देती हैं, वहीं आम महिलाएं सूरत के विभिन्न ब्रांडस की साडिय़ाँ बजट अनुसार खरीदती देखी जा सकती हैं. बच्चों के कपड़ों का भी बड़ा बाजार हैं पर यहां भी लड़ाई ब्रांडेड व अनब्रांडेड निर्माताओं के बीच हैं. जो संपन्न हैं, वे मॉल्स का रूख करते हैं. और मध्यम तथा निम्न मध्यम वर्गीय वर्ग अनब्रांडेड रेडीमेड स्टोर्स की और. बहरहाल इस बार ‘एप्परेल्स’ का बाजार दुकानदारों को दीपावली जैसे पर्व पर ज्यादा व्यस्त होने का मौके देते नहीं दिख रहा.

ब्रह्ममुहूर्त में स्नान और पूजा
धनतेरस के साथ ही दीपोत्सव की रौनक बढ़ती ही जा रही है. प्रदेश के बाजारों में चांदी के सिक्के, वाहन से लगाकर तो परम्परागत तरीके से बर्तनों की करोड़ों की खरीद-फरोख्त हुई. शाम से ही घरों के आंगन दीपों की ज्योति से जगमगा उठेे. कल रूप चौदस है. मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में उठकर, स्नान कर पूजा करने का विधान है. इसके पौराणिक आख्यान भी हैं. जैसा कि भारतीय संस्कृति के व्याख्याकार प्रो. अजहर हाशमी कहते हैं कि रूप चौदस जागृति का निर्देश है, स्वच्छता का संदेश है और मुक्ति का आदेश है. कल तन और मन संवारने का दिन है.

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