मप्र विधानसभा में बना अशोभनीय दृश्य, अध्यक्ष की मेज पर चढ़े और आंसदी पर लपके कांग्रेसी

कांग्रसियों ने किया मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष समेत सत्ता पक्ष का घेराव

भोपाल, 17 जुलाई. मध्यप्रदेश विधानसभा में आज उस समय अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गयी जब अभूतपूर्व हंगामे और दृश्यों के बीच मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के सदस्य अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी की अनुपस्थिति में उनकी मेज पर चढ़ गए और उन्होंने आसन पर आसीन सभापति ज्ञान सिंह को हटाने का भी प्रयास  किया.

मानसून सत्र के दूसरे दिन आज सदन की कार्यवाही शुरू होने के पहले नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सदस्य कल भ्रष्टाचार के मुद्दे पर दिए गए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग को लेकर श्री रोहाणी के कक्ष को बाहर से घेरकर बैठ गए. इस दौरान अध्यक्ष से मिलने आए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कक्ष में पहले से मौजूद संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी वहां कैद हो गए. इसके कारण सदन की कार्यवाही लगभग 15 मिनट तक शुरू नहीं हो सकी. इसके बाद सत्ता पक्ष भारतीय जनता पार्टी  के वरिष्ठ सदस्य ज्ञान सिंह ने सभापति के रूप में सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए प्रश्नकाल प्रारंभ कर दिया. निर्धारित समय 11.30 बजे प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद शून्यकाल के लिए सभापति ने कार्यवाही प्रारंभ कर दी.

इस दौरान कांग्रेस सदस्य सुश्री कल्पना पारूलेकर ने अध्यक्षीय दीर्घा में खडे होकर जोर से बोलना शुरू कर दिया और निर्दलीय सदस्यों को कांग्रेस सदस्यों के साथ आने का आव्हान किया. इस बीच कांग्रेस विधायक दल के उप नेता चौधरी राकेश सिंह चुतर्वेदी ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए नियमों का हवाला दिया और कहा कि कार्यवाही असंवैधानिक तरीके से चल रही है. सदन में कानून का प्रतीक दंड मौजूद नहीं है और आज की कार्यसूची में सभापति तालिका की घोषणा किए जाने का जिक्र है, इसलिए आसन पर बैठे सभापति को सदन की कार्यवाही चलाने का अधिकार नहीं है. नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री बाबूलाल गौर, उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने इस व्यवस्था के प्रश्न पर आपत्ति उठाते हुए कहा कि नियमों के तहत जब तक सभापति की नई तालिका घोषित नहीं हो जाती, तब तक सभापति की पुरानी तालिका के सदस्य सदन की कार्यवाही संचालित कर सकते हैं.

इसके बाद श्री चतुर्वेदी ने विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने संबंधी बात कहते हुए एक कागज विधानसभा सचिव को सौंप दिया और सदन में इसका जिक्र किया. इस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इसे ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया. शोरशराबे के बीच श्री विजयवर्गीय और अन्य सदस्यों ने कांग्रेस सदस्यों द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को सदन में आने से रोकने और बंधक बनाने के कृत्य के विरोध में उनके खिलाफ लाये गए निंदा प्र्रस्ताव को भाजपा सदस्यों ने पारित कर दिया. इस प्रस्ताव के पारित होते ही श्री चतुर्वेदी और कांग्रेस के अनेक सदस्य सभापति की मेज पर चढ़ गए और नारेबाजी करने लगे. इस दौरान कुछ सदस्य सभापति के साथ अशोभनीय व्यवहार करते हुए भी देखे गए.

जिससे सदन की कार्यवाही संचालित करने में व्यवधान उत्पन्न हुआ. इस बीच सभापति ने कार्यवाही स्थगित कर दी. इसके बाद स्थिति बिगडने पर मार्शल सभापति को कांग्रेेस सदस्यों के घेरे से सुरक्षित निकालकर ले गए. कांग्रेस और भाजपा सदस्यों की नारेबाजी के कारण सदन में हंगामे की स्थिति पैदा हो गई. लगभग दस मिनट बाद सभापति के रूप में भाजपा के वरिष्ठ सदस्य केदारनाथ शुक्ला ने सदन की कार्यवाही शुरू की. इस पर कांग्रेस सदस्य आरिफ अकील सहित उनके दल के अनेक सदस्यों ने आपत्ति जताते हुए फिर हंगामा शुरू कर दिया. इस पर सभापति ने स्पष्ट करते हुए कहा कि पूर्व के सभापति ने कुछ समय के लिए कार्यवाही स्थगित की थी. फिर से कांग्रेस और सत्तापक्ष के सदस्यों के शोरशराबे के कारण हंगामे की स्थिति पैदा होने पर सभापति ने कार्यवाही कल सुबह साढे दस बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

विधानसभा की प्रतिष्ठा तार तार हुई : शिवराज

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस सदस्यों के आचरण से आज का दिन विधानसभा के इतिहास में काले दिन के रूप में दर्ज हो गया है और इससे लोकतंत्र शर्मसार होने के साथ परंपराएं तार-तार हुई है. मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि कांग्रेस सदस्यों के अशोभनीय व्यवहार से उनको बहुत पीड़ा हुई और मन खिन्न है. उन्होंने कहा कि प्रदेश की विधानसभा की गौरवशाली परंपरा और प्रतिष्ठित छवि का उदाहरण देश में प्रस्तुत किया जाता रहा है, लेकिन कांग्रेस सदस्यों ने जो कृत्य किया है .

उससे हमारी विधानसभा की परंपरा और प्रतिष्ठा तार तार हो गई है.  विधानसभा के इतिहास में पहली बार किसी राजनैतिक दल के सदस्यों ने विधानसभा अध्यक्ष को कार्यवाही संचालित करने से रोका है.  सदन की कार्यवाही संचालित कर रहे  भाजपा के वरिष्ठ सदस्य और अनुसूचित जाति के विधायक ज्ञान सिंह के साथ कांग्रस सदस्यों ने जो दुर्व्यवहार किया है वह अत्यधिक निंदनीय है. इस दुर्व्यवहार के संबंध में राज्यपाल से मिलकर शिकायत की जायेगी. कांग्रेस सदस्यों के आचरण से यह समझ में नही आ रहा है कि उन्हें क्या हो गया है. जब वे सदन में आ रहे थे तो पता चला कि कांग्रेस सदस्य विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी के कक्ष के बाहर बैठे हुए हैं. इस पर वे अध्यक्ष के कक्ष में गए और वहां मौजूद संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा की उपस्थिति में अध्यक्ष से चर्चा करने के लिए नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह को आमंत्रित किया, लेकिन नेता प्रतिपक्ष चर्चा करने नहीं आये. मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चर्चा के लिए सत्ता पक्ष के कतराने के सवाल पर कहा कि सदन में किसी भी विषय पर चर्चा नियम और प्रक्रिया के तहत होती है. यदि नियम और प्रक्रिया के तहत चर्चा होगी तो हम इसके लिए तैयार हैं.

यदि कांग्रेस चाहेगी तो हम जनता के बीच और सड़कों पर उतरकर भी इसका जवाब देने को तैयार हैं. कांग्रेस केवल हंगामा कर सुर्खियां बटोरने का प्रयास कर रही है. श्री चौहान ने कहा कि कांग्रेस की जनता में जड़ें और साख नहीं बची है इसलिए बौखलाहट में इस तरह का कृत्य और प्रत्येक बात पर हंगामा कर रही है इसकी वे घोर निंदा करते हैं. उन्होंने कहा कि सदन में कांग्रेस सदस्यों के अशोभनीय व्यवहार और हंगामे के दौरान भाजपा सदस्यों ने संयम दिखाया और मर्यादा में रहते हुए विधानसभा की गरीमा को धुमिल नही होने दिया. मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि भाजपा सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ लडाई लड रही है. हम केन्द्रीय जांच एजेंसी के काम में हस्तक्षेप और टिप्पणी नही करना चाहते हैं. कांग्रेस के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है. हम सदन में जनहित में खाद के दाम वृद्धि को वापस लेने के संकल्प पर चर्चा कराना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस गैर मुद्दों को मुद्दा बना रही है. सदन में व्याप्त गतिरोध चर्चा से ही समाप्त हो सकता है.

शिवराज के करीबी भ्रष्टाचार में लिप्त

प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबियों पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी कारण मुख्यमंत्री विधानसभा में भ्रष्टाचार जैसे गम्भीर विषय पर चर्चा के लिए तैयार नहीं हैं। नेता प्रतिपक्ष सिंह ने  कहा कि मुख्यमंत्री चौहान भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लडऩे के दावा करते हैं और बाबा रामदेव तथा अन्ना हजारे के साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं। अब भ्रष्टाचार में करीबियों के फंसने की बात आई है तो चर्चा तक से कतरा रहे हैं। सिंह ने  कहा कि विस में कांग्रेस की ओर से भ्रष्टाचार पर चर्चा कराने के लिए 17 स्थगन प्रस्ताव दिए गए हैं.

लेकिन आयकर विभाग के छापों को केंद्र सरकार की कार्रवाई बताकर उन्हें अस्वीकार कर दिया गया। वास्तविकता यह है कि विधानसभाध्यक्ष ईश्वर दास रोहाणी सरकार से मिलकर इस मुद्दे पर चर्चा नहीं कराना चाहते। विधानसभाध्यक्ष रोहाणी को उनके कक्ष में बंधक बनाए जाने के आरोप से इंकार करते हुए सिंह ने कहा कि उनके दल के विधायक लगभग एक घंटे धरने पर बैठे रहे, लेकिन रोहाणी एक बार भी बाहर नहीं आए। मुख्यमंत्री चौहान व संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा आए तो उन्हें निकलने से नहीं रोका गया।

हंगामा क्यों बरपा?

कांग्रेस विधायकों ने सोमवार को विधानसभा में प्रदेश के भाजपा से जुड़े दो कारोबारियों दिलीप सूर्यवंशी और सुधीर शर्मा के यहां पड़े आयकर छापों को मामला उठाया था। कांग्रेस विधायक इस मामले पर स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा चाहते थे, अध्यक्ष ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि केंद्रीय एजेंसी से जुड़े किसी भी विषय पर विधानसभा में चर्चा नहीं कराई जा सकती है। कांग्रेस विधायकों ने अध्यक्ष को उनके कक्ष से सदन में नहीं जाने दिया।

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