महंगाई का महावार

नई दिल्ली, 3 अप्रैल. महंगाई से आम आदमी परेशान है, लेकिन निकट भविष्य में इससे राहत के आसार नहीं दिख रहे हैं. सब्जियों और दूध के बाद खाने के तेल में आग लग गई है. पिछले एक महीने में खाद्य तेलों के दाम में 10 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई है. 

दिल्ली और मुंबई में खुले दूध के दाम 6 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं. अमूल ने भी पर्याप्त संकेत दे दिए हैं कि वह अगले कुछ दिनों में दूध की कीमत 2 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा सकती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई तेजी के बाद पाम ऑइल के दाम में 10 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है. रुपये का कमजोर होना इस महंगाई की एक बड़ी वजह है, क्योंकि भारत करीब 80 लाख टन पॉम ऑइल विदेश से आयात करता है. पाम ऑइल का इस्तेमाल खाने में किया जाता है और भारत में रिफाइंड तेल इस्तेमाल करने वालों में करीब 50 फीसदी पाम ऑइल ही इस्तेमाल करते हैं.

इसके अलावा सरसों समेत तमाम दूसरे तेल में भी पिछले एक महीने के दौरान जबरदस्त तेजी देखी गई है. सोयाबीन के तेल में तो करीब 19 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसकी वजह रबी के मौसम में खराब उत्पादन को माना जा रहा है. महंगाई की मार से बेहाल आम आदमी के लिए एक और बुरी खबर है. बढ़े हुए सर्विस टैक्स और एक्साइज ड्यूटी से महीने का बजट पहले ही बिगड़ चुका है, अब दूध की कीमत कोढ़ में खाज का काम करेगी. खुले दूध की कीमत बढऩे के बाद अमूल भी 2 रुपये प्रति लीटर कीमत बढ़ाने की तैयारी में हैं. गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन के एमडी आर. एस. सोढ़ी ने कहा कि इस बार कीमतों में बढ़ोतरी उतनी नहीं होगी, जितनी पिछली दो साल में हुई. फेडरेशन ने पिछले वित्त वर्ष में कीमतों में करीब 15 पर्सेंट बढ़ोतरी की थी. सोढ़ी ने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच किसानों को ज्यादा दाम देने की जरूरत है. तीन सालों में अमूल के दाम 20 रुपये से बढ़कर 38 रुपये हो गए हैं. संघ ने 2011 में स्किम्ड मिल्क पाउडर के निर्यात से प्रतिबंध को हटाने की मांग की है.

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