मध्यप्रदेश में पुलिस या व्यवस्था का एक तंत्र कितना ‘असहाय’ हो रहा है, यह आए दिन देखने को मिल रहा है. और यदि इस सबको केवल एक क्षेत्र में सतत देखने की इच्छा हो तो ग्वालियर क्षेत्र का मुरैना बड़ी मिसाल बन रहा है. कल फिर इसी तरह की दो घटनाओं ने तंत्र की पोल खोलकर रख दी और यह संकेत भी दे दिया कि आईपीएस नरेन्द्र की हत्या भले ही पूरे देश में ‘कलंक’ के रूप में चर्चित हो चुकी हो- माफिया तो वही करेंगे जो उनको करना है. उन्हें किसी की चिंता नहीं है.

मुरैना में एक और पुलिस अधिकारी जान गंवाते-गंवाते बचा. वह रेत और पत्थर माफियाओं के अवैध खनन को पकड़ऩे गया था. चिन्नोली……. थाना प्रभारी हितेन्द्र राठौड़ पर इन माफियाओं ने फायरिंग की और गाडिय़ां लेकर फरार हो गये. इसी तरह मुरैना थाने में दिल्ली से पकड़कर लाए गए एक आरोपी को ….. दिनदहाड़े करीब 25 लोगों के समूह ने थाने पर फायरिंग की. पुलिस वालों को ही पीटा और आरोपी को छुड़ाकर भगा ले गए.
आईपीएस नरेंद्र की शहादत और उसके बाद व्यवस्था द्वारा कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये तमाम आश्वासनों का आखिर क्या हुआ? क्या वे सब घडिय़ाली आंसू थे या फिर प्रदेश में वाकई माफियाओं के हौंसले इतने बुलंद हो गये हैं कि वे किसी को कुछ नहीं समझ रहे हैं? ऐसा इसलिये कहा जा रहा है कि आईपीएस हत्याकांड के दरमियान और बाद में खरगोन के मंडलेश्वर में शराब माफिया द्वारा आरक्षक की हत्या, भिंड के कपूरपुरा में पुलिस पर पथराव, मुरैना में सीएसपी शिवकुमार वर्मा की हत्या के प्रयास, देवास के कन्नोद क्षेत्र के कुसमान्या गांव में महिला तहसीलदार को भी जेसीबी से कुचलने की कोशिश आदि सहित अनेक और भी प्रसंग हैं, जिसमें अपराधियों के हौंसले बुलंद हो रहे हैं. दरअसल ये साधारण घटनायें नहीं हैं और व्यवस्था को भी इन्हें सतही तौर पर लेना ठीक नहीं है. यदि कतिपय कर्मचारी अपनी जान पर खेलकर माफियाओं से लड़ रहे हैं तो उनकी तरफ आंख उठाने वाले की खैर नहीं होना चाहिए. यह काम सरकार का है.

सरकार को यह भी देखना होगा कि पर्दे के पीछे दबंगों, राजनीतिक धाराओं और प्रशासन तंत्र में बैठे भ्रष्ट का गठजोड़ कहां-कहां कितना परिपक्व होता जा रहा है. और सरकार के पास इस ‘बीमारी’ के आपरेशन का कितना ठोस और दृढ़ ….. ‘एजेंडा’ है. अब वक्त आ गया है कि जिला शहर और गांव स्तर पर ऐसे माफियाओं की फेहरिस्त बनाकर कार्रवाई की जाए ताकि आगे किसी तंत्र पर जानलेवा हमले न हो..

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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