भोपाल, 30 मार्च. विद्युत एक ऐसा आधार स्त्रोत है जिसका देश के आर्थिक विकास से अत्यंत घनिष्ट संबंध होता है. देश में सकल संस्थापित क्षमता में उल्लेखनीय वृद्घि के बावजूद हम अभी भी बिजली की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं. भारत में ऊर्जा की खपत तेजी से बढ़ रही है. पिछले एक दशक में ही ऊर्जा की मांग में 8.9 प्रतिशत की वृद्घि हुई है जो 2020 में लगभग 240000 मेगावाट होगी.

यह ऊर्जा की मांग वर्तमान में प्रयोग में लाये जा रहे पारंपरिक तरीके से पूर्ण नहीं हो सकती है. वर्तमान में भारत में इस्तेमाल हो रही ऊर्जा का लगभग 65.34 प्रतिशत थर्मल पॉवर से, 21.53 प्रतिशत हाइड्रो पॉवर से, 2.8 प्रतिशत परमाणु ऊर्जा से तथा 10.42 प्रतिशत गैर पारंपरिक अक्षय ऊर्जा स्त्रोतों से प्राप्त होता है. चूंकि देश में कोयले तथा गैस के भंडार सीमित हैं तथा जीवाश्म ईंधन प्रचलित बिजलीघरों से उत्पन्न होने वाली ग्रीन हाउस गैसों के प्रति विश्व की बढ़ती चिन्ताओं के कारण आने वाले समय में परमाणु ऊर्जा को प्रोत्साहित करना तथा प्रयोग में लाना अति आवश्यक है.

भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को दुनिया में सबसे आधुनिक तथा सुरक्षित श्रेणी में रखा जाता है. भारत का दीर्घकालीन परमाणु ऊर्जा विद्युत उत्पादन कार्यक्रम देश में उपलब्ध विशाल थोरियम भंडार पर आधारित है. देश में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को 42 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं. देश की वर्तमान न्यूक्लियर विद्युत क्षमता 4780 मेगावाट है. 11वीं पंचवर्षीय योजना के अनुसार मार्च-12 तक ही यह क्षमता बढ़कर 10080 मेगावाट हो जायेगी. 18 नये परमाणु ऊर्जा संयंत्र प्रस्तावित किये गये हैं जिससे अगले दो दशकों में परमाणु ऊर्जा क्षमता कुल खपत का 25 प्रतिशत तक होने का अनुमान है.

परमाणु ऊर्जा के नये संयंत्र महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक तथा उत्तर प्रदेश में निर्माणाधीन हैं तथा हरियाणा के कुमहारिया तथा मध्यप्रदेश के बरगी के अतिरिक्त गुजरात में हाईसिटी तिर्डी, पश्चिम बंगाल में हरिपुर तथा आंध्र प्रदेश में कोण्वाड़ा में भी परमाणु बिजलीघर स्थापित किये जाने का सैद्घांतिक अनुमोदन भी अक्टूबर-09 में ही हो चुका है.
परमाणु ऊर्जा के तकनीकी पहलुओं की जानकारी उपलब्ध कराने तथा जन साधारण में इस विषय में फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिये विज्ञान प्रसार जो भारत सरकार के विज्ञान एवं तकनोलॉजी विभाग की संस्था है, के द्वारा देश भर में जागरूकता कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं.

इसी श्रेणी में 30 मार्च को भोपाल में आईसेक्ट विश्वविद्यालय के सहयोग से एक दिवसीय परमाणु ऊर्जा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के छात्र-छात्रायें तथा कई समाचार पत्रों से जुड़े पत्रकारों ने भाग लिया. कार्यक्रम आईसेक्ट के मिसरोद स्थित स्कोप कैम्पस में आयोजित किया गया. वर्कशॉप के उद्ïघाटन सत्र के मुख्य अतिथि ए.के. पांडे अध्यक्ष म.प्र. निजी विश्वविद्यालय आयोग तथा विशिष्ट अतिथि विज्ञान प्रसार के पूर्व डायरेक्टर डॉ. अनूज सिन्हा थे. कार्यक्रम में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार ने भी अपने व्याख्यान दिये. परमाणु कार्यक्रम में विकिरण से संबंधित भ्रांतियों के बारे में जवाहरलाल कैंसर हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेन्टर के डॉ. गौरव गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त किये तथा संचार एवं पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिये मेपकास्ट के चक्रेश जैन तथा पत्रकारिता वि.वि. के पुष्पेंद्र पाल ङ्क्षसह ने अपने व्याख्यान दिये.

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