लखनऊ, 11 अप्रैल. समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खां और जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना सैय्यद अहमद बुखारी के बीच विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी) के लिए नए नामों को लेकर छिड़ी जुबानी जंग अब आर-पार की लड़ाई में तब्दील हो गई है.

बुखारी ने एसपी के मुखिया मुलायम सिंह यादव को टेलिफोन करके उन पर हमले कर रहे आजम खां जैसे लोगों को रोकने की ताकीद की है. वह आज शाम मुलायम से मिलने के लिए लखनऊ भी पहुंच रहे हैं. इस बीच, आजम खां पूरे मामले में मुलायम सिंह और सरकार की चुप्पी से काफी आहत बताए जा रहे हैं. अपना दर्द बयां करते हुए उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ मंत्री के खिलाफ इस तरह की अनर्गल बातें हो रही हैं, लेकिन सरकार और पार्टी तमाशाई बनी बैठी है.

आजम पार्टी और सरकार के रवैये से दो वजहों से आहत बताए जा रहे हैं. एक के बारे में तो उन्होंने खुद कहा कि कुछ भ्रष्ट अफसर और व्यवसायी उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं, क्योंकि वह उनकी दाल नहीं गलने दे रहे हैं, इसलिए उन पर यह तक इल्जाम मढऩे की कोशिश हो रही है कि वह अखिलेश सरकार को कमजोर करना चाह रहे हैं. आजम के आहत होने की दूसरी वजह यह है कि बुखारी के खिलाफ मोर्चेबंदी में कोई उनके साथ खड़ा नहीं हुआ. बुखारी ने यूपी सरकार में मुसलमानों को पर्याप्त नुमाइंदगी न देने का मुद्दा उठाते हुए समाजवादी पार्टी की नीयत पर सवाल खड़ा किया और मुलायम सिंह यादव को लिखे पत्र को सार्वजनिक कर दिया.

मुलायम की तरफ से आजम ने मोर्चा संभाल लिया.

लड़ाई आजम बनाम बुखारी में तब्दील हो गई. आजम को उम्मीद थी कि पार्टी और सरकार उनके साथ खड़ी होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. आजम ने मंगलवार को कहा भी यह सही है कि बुखारी का वह पत्र मेरे लिए नहीं था, मुलायम के लिए था. फिर भी उससे सरकार और पार्टी की छवि खराब हो रही थी, मैं डैमेज कंट्रोल के लिए आगे आया. पूरे मामले में मुलायम का रुख आजम के बजाय बुखारी की तरफ झुका दिख रहा है. सूत्रों के मुताबिक, मुलायम ने बुखारी को एमएलसी बनने-बनाने को लेकर हालिया विवाद को उन्हें दिल पर न लेने की सलाह दी. यह भी भरोसा दिया कि मिल-बैठकर इसका हल निकाल लिया जाएगा. गौरतलब है कि अमर सिंह और जया प्रदा को लेकर 2009 में भी आजम पार्टी से नाराज हो गए थे और इसके बाद उन्होंने पार्टी छोड़ी दी थी. लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन और अमर सिंह से मतभेद के बाद मुलायम आजम को मनाकर पार्टी में ले आए थे.

सपा से खफा बुखारी ने कहा नहीं चाहिए एक भी सीट

शाही इमाम सैय्यद बुखारी और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री आजम खान का विवाद और उलझ गया है. बुधवार को शाही इमान बुखारी ने लखनऊ आने से मना कर दिया है और एक सीट भी लौटाने की बात कही. सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने बुधवार को इमाम बुखारी से टेलीफोन पर बात कर उन्हें लखनऊ आने का न्योता दिया था. पहले यह खबर थी कि बुखारी ने मुलायम को शाम पांच बजे लखनऊ आकर मिलने को कहा था लेकिन बाद में बुखारी ने लखनऊ आने से मना कर दिया और कहा कि जो बात होगी दिल्ली में होगी. बुखारी ने कहा है कि मुसलमानों को हिस्सेदारी देने का मामला मुलायम सिंह यादव के साथ तय नहीं होने के कारण वो लखनऊ नहीं आ रहे हैं. शाही इमाम ने बताया कि मुसलमानों का 20 प्रतिशत हक बनता है. इस नाते विधानपरिषद की सात सीटों में से मुस्लमानों को दो सीटें मिलनी चाहिए. दूसरी तरफ मुलायम सिंह इसके लिए तैयार नहीं हैं, उन्होंने एक सीट दी है और बाकी छह का नामांकन भी करा दिया है. शाही इमाम ने यह भी कहा है कि एक सीट भी वो वापस कर रहे हैं. साथ ही यह भी कहा है कि यह भी किसी यादव उम्मीदवार को दे दी जाएं. इसका सीधा मतलब यह है कि बुखारी के दामाद अब पर्चा नहीं भरेंगे.

मालूम हो कि एसपी नेता आजम खान और इमाम बुखारी के बीच चल रहे विवाद के बाद मुलायम सिंह सुलह की कोशिश में जुटे हैं. बुखारी और आजम खां के बीच उस समय वाक युद्ध छिड़ गया जब बुखारी ने आजम खां को चुनौती देते हुए कहा था, आजम खां रामपुर की जगह किसी अन्य स्थान से चुनाव लड़ कर दिखाये. उल्लेखनीय है कि विधान सभा चुनाव में सैय्यद बुखारी के दामाद उमर अली खां को सपा का टिकट दिया गया था लेकिन वे न केवल चुनाव हार गये बल्कि उनकी जमानत जब्त हो गयी थी. इसके बाद सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अली खां को विधान परिषद का उम्मीदवार घोषित किया था, पर सैय्यद बुखारी राज्यसभा का टिकट चाहते थे जिसके चलते बुखारी ने विधान परिषद टिकट वापस कर दिया था.

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