पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने से किया था इनकार

लखनऊ, 17 अप्रैल. विवादित चमत्कारों के कारण चर्चा में आए निर्मल बाबा के खिलाफ सबसे पहले झंडा बुलंद करने वाले लखनऊ के दोनों बच्चों ने रिपोर्ट लिखाने के लिए अदालत का सहारा लिया है.

निर्मल बाबा के खिलाफ सबसे पहले 16 वर्षीय तनया ठाकुर और उसके 13 वर्षीय भाई आदित्य ने आवाज उठाई थी. वे रिपोर्ट लिखाने के लिए पुलिस के छोटे-बड़े अधिकारियों के पास गए. पुलिस ने शिकायत तो मंजूर कर ली लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की. दोनों बच्चों ने मंगलवार को इसके लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दायर की. भाई-बहनों के विरोध शुरू करते ही निर्मल बाबा के खिलाफ देश में धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया. कानपुर में दो दिन पहले उनका पुतला पूंका गया. कई स्थानों पर रास्ता भी जाम किया गया.

तनया ठाकुर ने कहा कि उसने अपने भाई के साथ रिपोर्ट लिखाने की हिम्मत दिखाई, लेकिन पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने की हिम्मत नहीं दिखा रही है. लखनऊ निवासी तनया ठाकुर और आदित्य ठाकुर ने सबसे पहले 10 अप्रैल की शाम थाना गोमती नगर में प्राथमिकी के लिए प्रार्थना पत्र दिया था. उनका कहना था कि निर्मल बाबा अत्यंत सरल समाधान प्रस्तुत करके लोगों को ठगते हैं. यह भारतीय दंड विधान की धारा-417, 419, 420 के तहत धोखाधड़ी और धारा-508 में ईश्वरीय नाराजगी का भय दिखा कर गलत लाभ लेना है. उन्हें यह कहा गया कि इस मामले में जांच करने के बाद ही प्राथमिकी दर्ज की जाएगी. 12 अप्रैल को उन्होंने पुलिस उप महानिरीक्षक लखनऊ को पत्र के माध्यम से इस घटना की जानकारी दी और प्राथमिकी दर्ज नहीं होने की बात बताई. 14 अप्रैल को उनके विराम खंड गोमतीनगर स्थित आवास पर गोमतीनगर थाने से एक पुलिस सब इंसपेक्टर आए और पूछताछ करके चले गए.

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