भरना पड़ेगा एक लाख रुपए जुर्माना भी

नई दिल्ली, 28 अप्रैल. दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत ने रिश्वत मामले में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष बंगारू लक्ष्माण को चार साल कैद की सजा सुनाई है. ग्यारह साल पुराने इस मामले में अदालत ने बंगारू पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी ठोका.

बहस के दौरान बंगारू के वकील ने अदालत से उनकी बीमारी और उम्र को देखते कम से कम सजा देने की गुहार लगाई थी, लेकिन अदालत ने उनकी अपील खारिज कर दी. वहीं सीबीआई ने बंगारू को पांच साल सजा देने की मांग की थी. बंगारू के वकील ने कहा है कि अदालत के फैसले को वे हाईकोर्ट में चुनौती देंगे.

एक लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप था
इससे पहले सीबीआई की विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार मामले में शुक्रवार को बंगारू लक्ष्मण को दोषी करार दिया था. बाद में बंगारू को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था. बंगारू पर अमेरिका की फर्जी कंपनी वेस्ट इंड इंटरनेशनल को रक्षा मंत्रालय से सौदा कराने के नाम पर एक लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप था.

लक्ष्मण पर आए फैसले से भाजपा असहज
लक्ष्मण को वर्ष-2001 में एक स्टिंग में रक्षा सौदा दिलाने के नाम पर एक लाख रुपये रिश्वत लेते हुए कैमरे में कैद किया गया था. लक्ष्मण पर आए इस फैसले से भाजपा भी असहज दिखी. उसने इसे लक्ष्मण का निजी मामला बताकर पल्ला भी झाड़ लिया.

सीबीआई की ओर से पेश तथ्य सही
सीबीआई की विशेष अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कंवलजीत अरोड़ा ने फैसले में कहा कि सीबीआई की ओर से पेश तथ्यों और सुबूतों से स्पष्ट है कि आरोप सही हैं. लक्ष्मण को भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा-9 के तहत दोषी करार दिया जाता है.

जमानत की अपील कोर्ट ने खारिज की
अदालत के फैसले के बाद 72 वर्षीय लक्ष्मण को हिरासत में लेकर तिहाड़ जेल ले जाया गया. इससे पहले दोषी करार दिए जाने के बाद लक्ष्मण के वकील ने अदालत से उन्हें जमानत देने की अपील की, लेकिन अदालत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि सजा सुनाए के बाद ही जमानत के बारे में विचार किया जाएगा.

भाजपा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा था
मामले के मुताबिक बंगारू पर अमेरिका की फर्जी कंपनी वेस्ट इंड इंटरनेशनल को रक्षा मंत्रालय से सौदा कराने के नाम पर एक लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप था. स्टिंग को न्यूज पोर्टल तहलका डॉटकॉम ने किया था. न्यूज पोर्टल का पत्रकार ही कंपनी का अधिकारी बनकर गया था. स्टिंग को मार्च-2001 में अंजाम दिया गया था और 13 मार्च-2001 को स्टिंग को सार्वजनिक कर दिया गया था. इसके बाद बंगारू को भाजपा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

फैसले से लगा सदमा
अदालत का फैसला सुनने के बाद लक्ष्मण बड़ी देर तक कठघरे में स्तब्ध स्थिति में खड़े रहे. फैसला सुनाए जाने के बाद उन्होंने किसी से भी कोई बात नहीं की. बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और तिहाड़ जेल लेकर चली गई. लक्ष्मण बेटी श्रुति और कुछ समर्थकों के साथ कोर्ट पहुंचे थे. फैसले के बाद श्रुति ने कहा कि मैं सदमे में हूं. उम्मीद नहीं थी कि यह सुनने को मिलेगा.

क्या था मामला
सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक 12 दिसंबर 2000 से लेकर 6 जनवरी 2001 के बीच तहलका के रिपोर्टर ने बंगारू लक्ष्मण से आठ बार हथियार डीलर के तौर पर मुलाकात की. बंगारू से थर्मल इमेजर की सप्लाई अपनी कंपनी मैसर्स वेस्ट एंड इंटरनेशनल को दिलाने को कहा. इसके लिए बंगारू को पांच लाख रुपये रिश्वत देने का प्रस्ताव था. पहली किस्त के तौर पर 5 जनवरी 2001 को उन्हें एक लाख रुपये देते हुए कैमरे में कैद कर लिया. बाकी रकम बंगारू ने डॉलर में मांगी थी. 13 मार्च 2001 को तहलका ने बंगारू का टेप जारी किया, जिसमें वे एक लाख रुपये लेते दिख रहे थे.

कौन हैं बंगारू
बंगारू लक्ष्मण भाजपा के अध्यक्ष थे, लेकिन मामले का खुलासा होने के बाद उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा था. बंगारू केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं

पोर्टल का उद्देश्य गलत नहीं था : कोर्ट
बंगारु लक्ष्मण को दोषी करार देते हुए अदालत ने कहा, हो सकता है कि न्यूज पोर्टल का स्टिंग करने का तरीका गलत हो लेकिन उद्देश्य गलत नहीं था. ऐसे में स्टिंग की सच्चाई को नकारा नहीं जा सकता है.

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