केंद्र सरकार की श्रम विरोधी नीतियों पर जताया आक्रोश

भोपाल, 8 नवंबर. केंद्र सरकार की जन एवं श्रम विरोधी नीतियों एवं दस सूत्रीय मांगों को लेकर आज यहां बैंक कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया.
म.प्र. बैंक एम्प्लाईज एसोसिएशन एवं म.प्र. बैंक आफिसर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आज शाम 5.45 बजे राजधानी की विभिन्न बैकों के सैकड़ों कर्मचारियों एवं अधिकारियों द्वारा महाराणा प्रताप नगर जोन-1 स्थित ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के रीजनल आफिस भोपाल के सामने केंद्र सरकार की जन एवं श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर प्रभावी प्रदर्शन किया.

प्रदर्शन के पश्चात सभा हुई जिसे ऑल इंडिया ब्लैंक एम्प्लाईज एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव काम. वी.के. शर्मा, ऑल इंडिया बैंक आफिसर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय उप महासचिव काम. डी.के. पोद्दार, स्टेट सेक्टर बैंक एम्प्लाईज एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव काम. जे.पी. झवर के अलावा बैंक कर्मचारी, अधिकारी, नेताओं साथी वी.के. सहगल, एमजी, शिंदे, नजीर कुरैशी, वी.एस. रावत, बलवीर सिंह आदि ने संबोधित किया. वक्ताओं ने केंद्र सरकार की जन एवं श्रम विरोधी नीतियों का विरोध करते हुये कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि 64 वर्षों की आजादी के बाद भी लोगों के शुद्घ पीने का पानी उपलब्ध नहीं है.

शिक्षा एवं स्वास्थ्य आम आदमी से दूर होता जा रहा है. महंगाई ने सारे रिकार्ड तोड़कर आम आदमी का जीना दूभर कर दिया है. आखिर सरकार में बैठे लोग क्या करते हैं? देश में पैदा हो रहे धन को अमीर उद्योगपति हथिया रहे हैं, गरीबों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है. इन परिस्थितियों में देश कैसे चलेगा? पूंजीपति वर्ग और सरकार के संयुक्त हमलों के खिलाफ मजदूर वर्ग की एकता अपरिहार्य है. वक्ताओं ने कहा कि आज का प्रदर्शन केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि वह जन एवं श्रम विरोधी नीतियों को विराम दे अन्यथा आगे आने वाले दिनों में मजदूरों की हड़तालों का सामना करने के लिये तैयार रहे. वक्ताओं ने कहा कि देश भर के बैंक कर्मी करोड़ों मजदूरों के साथ हैं. आने वाले दिनों में मजदूर वर्ग द्वारा हड़ताल की जाने की स्थिति में बैंक कर्मी भी उनके साथ सड़कों पर आकर हड़ताल करेंगे.

कर्मचरियों की प्रमुख मांगें –

  •   सरकार महंगाई रोकने के लिये ठोस कदम उठाये.
  • पूंजीपतियों को दिये जाने वाले राहत पैकेज में रोजगार सुरक्षा और नये रोजगार पैदा करने की शर्त रखी जाये.
  • श्रम कानूनों का बिना किसी अपवाद के सख्ती से पालन किया जावे.
  • असंगठित मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिये राष्ट्रीय समाजिक सुरक्षा कोष में एनसीईयूएस एवं पार्लियामेंटरी स्टैडिंग कमेटी ऑन लेबर की अनुशंसाओं के अनुसार पर्याप्त धन का आवंटन किया जावे.
  • केंद्र एवं राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेशीकरण को रोका जावे.
  • स्थायी प्रकृति के कामों को ठेका पर लगाने की प्रथा पर रोक लगाई जाये और ठेका पर काम करने वाले मजदूरों को वही वेतनमान और सुविधायें दी जायें जो उस काम के लिये प्रतिष्ठान/संस्था के नियमित कामगारों को प्राप्त हैं.
  •  न्यूनतम मजदूरी कानून में संशोधन करके न्यूनतम मजदूरी पाने का हकदार सभी कामगरों को बनाया जाये और न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण मूल्य सूचकांक के साथ जोड़कर कम से कम 10000 रु. मासिक निर्धारित किया जाये.
  • बोनस, ग्रेच्यूटी और भविष्य निधि की पात्रता को सर्वसुलभ किया जाये और इसमें वेतन सीमा की पाबंदी हटाई जाये तथा ग्रेच्यूटी की मात्रा बढ़ाई जाये.
  • कामगारों को पेंशन आश्वासित की जाये.
  • 45 दिनों के अंदर ट्रेड यूनियनों का पंजीयन अनिवार्य बनाया जाये और आईएलओ कनवेंशन क्र. 87 और 98 तुरंत संतुष्टिï की जाये.

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