राज्य मंत्री ने बारदाना आपूर्ति और सरप्लस गेहूँ के उठाव के लिये लिखी चिट्ठी

भोपाल, 20 अप्रैल,राज्य सरकार ने इस साल समर्थन मूल्य पर गेहूँ की बम्पर खरीदी के मद्देनजऱ इसे भरे जाने के लिये चौतरफा कोशिशें तेज कर दी हैं. खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री पारस चन्द्र जैन ने आज पाँच जिलों में पहले एक बार गेहूँ भरने में इस्तेमाल हो चुके खाली बारदानों में फिर गेहूँ भरने के आदेश जारी करवा दिये हैं. गेहूँ भरे जाने वाले ऐसे बारदानों का एक ही जगह पर लेकिन अलग से भण्डारण होगा. इससे भारतीय खाद्य निगम को नये बारदानों में सुपुर्द किये जाने वाले गेहूँ की पहचान अलग से की जा सकेगी.

पहले दौर में पाँच जिलों का आदेश

गेहूँ की तेज खरीदी के चलते अगले हफ्ते तक बारदानों की ज्यादा दिक्कत वाले पाँच जिलों को आज पुराने खाली बारदानों के इस्तेमाल का आदेश जारी कर दिया गया. इसमें राजगढ़, हरदा, खण्डवा, खरगोन और विदिशा शामिल हैं. यह बारदाने सहकारी समितियों के पास उपलब्ध हैं. आदेश में यह साफ किया गया है कि पूर्व में सिर्फ एक बार गेहूँ से भरे गये बारदाने ही इस्तेमाल होंगे.

केन्द्र को चिट्ठी लिख भेदभाव पर जताया विरोध

राज्य मंत्री पारस चन्द्र जैन ने आज केन्द्र सरकार को दो अलग-अलग चिट्ठी लिखकर भेदभावपूर्ण रवैये पर विरोध जताया है. एक चिट्ठी केन्द्रीय खाद्य मंत्री को लिखी गई है जिसमें जैन ने केन्द्रीय संस्थान डायरेक्टर जनरल सप्लाई एण्ड डिस्पोजल (डीजीएसएनडी) कोलकाता को अग्रिम भुगतान के बावजूद वहाँ से प्रदेश को अप्रैल में बारदानों की सिर्फ 12 हजार गठानें ही भेजी गईं. संस्था को कुल 80 हजार गठान के खरीदी आदेश और इसका पूरा पैसा दिया जा चुका है.

दूसरी ओर अन्य राज्यों को बारदानों की पर्याप्त आपूर्ति की जा रही है. चिट्ठी में यह भी रेखांकित किया गया है कि केन्द्र की समर्थन मूल्य पर खरीदी की योजना पर बड़ी कार्रवाई करने वाला मध्यप्रदेश पूरे देश में तीसरे मुकाम पर है. बारदाना आपूर्ति को लेकर चि_ी में केन्द्र के अविलम्ब दखल की अपेक्षा की गई है. इसी तरह प्लॉस्टिक बैग्स इस्तेमाल की माँग फिर दोहराई गई है. राज्य मंत्री जैन ने दूसरी चिट्ठी भारतीय खाद्य निगम के प्रमुख को लिखी है. इसमें याद दिलाया गया है कि प्रदेश के सरप्लस का कोई पाँच लाख मीट्रिक टन गेहूँ उठाये जाने का आग्रह किया गया था, लेकिन अब तक निगम ने सिर्फ 40 हजार मीट्रिक टन गेहूँ ही उठाया है. दूसरी ओर अन्य राज्यों से सरप्लस गेहूँ उठाने में तत्परता की जा रही है. इस रवैये के चलते प्रदेश को बड़ी खरीदी को सहेजने में भण्डारण की दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं. यदि यह पूरा गेहूँ उठा लिया जाता है तो इतनी मात्रा को खुले कैप में नहीं रखना पड़ेगा.

किसानों को 4,000 करोड़ से ज्यादा का भुगतान

उधर प्रदेश में हर रोज बढ़ रही गेहूँ खरीदी के चलते आज तक किसानों को 4,058 करोड़ रुपयों का भुगतान किया जा चुका है. गुरुवार तक खरीदी का आँकड़ा 29 लाख 55 हजार 982 मीट्रिक टन तक पहुँच गया. अब तक 3 लाख 25 हजार 674 किसान अपना गेहूँ बेच चुके हैं. करीब 78 प्रतिशत गेहूँ सुरक्षित तौर पर गोदामों में पहुँचाया जा चुका है.

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