लंदन, 4 जुलाई.  ब्रिटिश कर्ज बेंचमार्क दर लिबोर को घटाने-बढ़ाने के मामले में अब भारतीय मूल की अर्थशास्त्री श्रीति वढेरा पर आरोप लग रहे हैं.

उन्होंने नवंबर, 2008 में लिबोर को घटाने के फायदों पर आलेख लिखा था. वढेरा गॉर्डन ब्राउन सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार थीं. प्रधानमंत्री डेविड कैमरन द्वारा इस मामले में दिग्गज बैंक बार्कलेज पर जाच बिठाने के बाद उनका यही आलेख अब विवादों के घेरे में आ गया है. इस घोटाले की वजह से बैंक के सीईओ बॉब डायमंड और चेयरमैन माक्र्स एजियस को इस्तीफा देना पड़ा है. वढेरा ने उस आलेख में लिखा था कि लिबोर को कम करके बैंकिंग सिस्टम को स्थायित्व प्रदान किया जा सकता है. साथ ही अर्थव्यवस्था की गति को भी तेज किया जा सकेगा. वढेरा ने लिबोर को जल्द से जल्द कम किए जाने का सुझाव दिया था.

ब्रिटेन और अमेरिका के नियामकों ने बार्कलेज पर लिबोर और यूरीबोर में हेरफेर करने के लिए 29 करोड़ पौंड का जुर्माना लगाया है. वढेरा के प्रवक्ता का कहना है कि तत्कालीन सरकार छोटी एवं मध्यम आकार की कंपनियों को सस्ते कर्ज उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत थी. वढेरा द्वारा लिखा गया आलेख इसी संबंध में था. इसका बेंचमार्क दरों में हुई हेरफेर से कुछ लेना-देना नहीं. बार्कलेज बैंक ने फायदा कमाने के लिए कई साल तक लिबोर को बढ़ाकर रखा. वहीं आर्थिक सुस्ती के दौरान इसे घटा दिया.

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