भोपाल, 8 जून, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया ने कहा है कि वर्ष 2008 के चुनाव में भाजपा के दो नेताओं ने अनुसूचित जाति के फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर विधान सभा चुनाव जीता है और वे अब भी विधान सभा सदस्य के रूप में सारी सुविधाओं का उपयोग कर रहे हैं. एक नेता का जाति प्रमाण पत्र तो न्यायालय द्वारा भी फर्जी प्रमाणित हो चुका है, फिर भी वह विधायक पद छोडऩे को तैयार नहीं है.

उन्होंने कहा कि भाजपा नेता राजेन्द्र सिंह सलूजा ने म.प्र. की सांसी जाति का अनुसूचित जाति का फर्जी जाति प्रमाण पत्र प्राप्त कर उसके आधार पर वर्ष 2008 के विधान सभा चुनाव में गुना सुरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा और विजयी हुए. बाद में उनके खिलाफ राज्य सरकार की उच्च स्तरीय छानबीन समिति में शिकायत हुई. प्रकरण न्यायालय भी पहुंचा. प्रथम दृष्टतया यह साबित हो चुका था कि नरेन्द्रसिंह सलूजा का जाति प्रमाण पत्र फर्जी है, फिर भी सरकार ने प्रकरण में अंतिम कार्यवाही में ढि़लाई बरती. फलस्वरूप सलूजा अभी तक विधायक बने हुए हैं. सलूजा द्वारा युगल पीठ में लगाई गई याचिका भी 17 मई 2012 को खारिज हो चुकी है और संबंधित एसडीएम ने उनका जाति प्रमाण पत्र जब्त भी कर लिया है, किंतु सलूजा की विधायकी अभी भी कायम है.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है कि अनुसूचित जाति के अधिकारों को हड़पने का दूसरा मामला भी भाजपा की ही नेत्री डॉ. विनोद पंथी से संबंधित है. वे मूलत: अजमेर (राजस्थान) की रहने वाली हैं. शादी के बाद म.प्र. के बीना में बस गईं और ‘कोरी’ अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के आधार पर उन्होंने बीना सुरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से वर्ष 2008 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और जीतीं. वे राजस्थान की कोली जाति की हैं. उनके संदेहास्पद जाति प्रमाण पत्र की जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार गठित राज्य सरकार की उच्च स्तरीय छानबीन समिति कर रही है. बताया गया है कि इस मामले में भी जांच की कार्यवाही बहुत धीमी गति से चल रही है.डॉ. विनोद पंथी को इस महीने छानबीन समिति के सामने व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने बाबत नोटिस जारी हो रहा है. आशंका प्रगट की जा रही है कि आगामी विधान सभा चुनाव के पूर्व इस प्रकरण में अंतिम निर्णय शायद ही हो सके.

Related Posts: