अहमदाबाद, 30 सितंबर. गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी और निलंबित आईपीएस अफसर संजीव भट्ट को शुक्रवार को गांधीनगर में गिरफ्तार कर लिया गया। संजीव भट्ट को साइबर क्राइम के एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया है।

गौरतलब है कि पिछले मंगलवार को संजीव भट्ट ने हाई कोर्ट में कहा था कि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य के गृह मंत्री अमित शाह ने उन पर हरेन पंड्या मर्डर केस में अहम सबूतों को खत्म करने के लिए दबाव डाला था। संजीव भट्ट ने अदालत में एक ऐफिडेविट दायर कर कहा था कि जब वह नवंबर 2003 में साबरमती की सेंट्रल जेल में पोस्टेड थे, तब हरेन पंड्या मर्डर केस में उन्हें कई महत्वपूर्ण सबूत मिले थे।

उन्होंने इन सबूतों को गृह मंत्रालय के पास भेज दिया था। इसके बाद उनके पास शाह का फोन आया। शाह ने उन्हें इन सबूतों को तुरंत नष्ट करने का आदेश दिया था। माना जा रहा है कि भट्ट के इसी बयान से नाराज गुजरात सरकार के इशारे पर एक पुराने मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया है। गौरतलब है कि सीनियर आईपीएस अफसर संजीव भट्ट को 8 अगस्त की रात गुजरात सरकार ने सस्पेंड कर दिया था। 2002 में गोधरा कांड के बाद गुजरात में हुए दंगों के मामले में भट्ट का गुजरात सरकार के साथ टकराव चल रहा है। भट्ट के निलंबन के जो खास कारण गिनाए गए थे, उनमें ड्यूटी से बिना बताए गैरहाजिर रहना, विभागीय समिति के सामने उपस्थित नहीं होना और सरकारी गाड़ी का दुरुपयोग शामिल था। भट्ट ने पहले मोदी पर गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के दौरान सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाया था।

उन्होंने हाल में आरोप लगाया कि दंगों के मामलों पर एसआईटी जांच का ब्योरा राज्य सरकार के टॉप लॉ ऑफिसर को लीक किया गया। उन्होंने मोदी पर यह भी आरोप लगाया था कि उन्होंने दंगों के दौरान मदद के लिए मुस्लिमों की ओर से लगाई जाने वाली गुहार की पुलिसकर्मियों से अनदेखी करने को कहा था।

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