नई दिल्ली, 4 अक्टूबर. गुजरात के मुख्यमंत्री के घोर विरोधी व गिरफ्तार निलंबित आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को लेकर केंद्र सरकार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच संजीव भट्ट को लेकर केंद्र-मोदी में खटास फिर से बढ़ गई है।

सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को राज्य सरकार को पत्र लिख कर निलंबित अधिकारी की तथा उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। गृह मंत्रालय ने यह कदम संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट द्वारा केंद्र सरकार को लिखे गए पत्र के बाद उठाया है। श्वेता ने लिखा था कि उसे और उसके परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं तथा उनकी जान को खतरा है। उधर भाजपा ने केंद्र के इस कदम का विरोध करते हुए इसे पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया है। इससे पहले आज संजीव भट्ट की रिमांड संबंधी फैसले की पुनरीक्षा से जुड़ी प्रदेश सरकार की याचिका पर फैसला सात अक्टूबर तक के लिए सुरक्षित रख लिया।

प्रदेश सरकार ने सोमवार को एक मजिस्ट्रेट अदालत के भट्ट की रिमांड नहीं दिए जाने के फैसले को सत्र अदालत में चुनौती दी थी। भट्ट को एक कांस्टेबल को कथित तौर पर धमकाने और एक झूठे हलफनामे पर हस्ताक्षर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मामले की सुनवाई कर रहे सत्र न्यायाधीश न्यायमूर्ति जीएन पटेल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान भट्ट के वकील आईएच सईद ने कहा कि प्रदेश सरकार की याचिका कायम रखने योग्य नहीं है। वकील ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया, जिसके मुताबिक, रिमांड देना या खारिज करना एक अस्थाई आदेश है.

और आपराधिक दंड संहिता की धारा 397 [दो] के अनुसार उसकी पुनरीक्षा नहीं की जा सकती। सईद ने कहा कि न्यायालय के फैसले की रोशनी में सरकार की याचिका कायम रखने योग्य नहीं है और खारिज कर दी जानी चाहिए। सरकार की ओर से लोक अभियोजक प्रवीण त्रिवेदी ने तर्क दिया कि एक बार खारिज किए जाने के बाद भी प्रदेश सरकार को रिमांड की पुनरीक्षा मांगने का अधिकार है।

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