राज्य के दो महानगरों भोपाल व इंदौर में यातायात व्यवस्था में आमूल परिवर्तन लाया जा रहा है. इसके लिए ट्राफिक  पुलिस का अमला बिल्कुल पृथक रहेगा. दोनों नगरों में ट्रैफिक पुलिस फोर्स के थाने, स्टाफ व उनके पुलिस अधीक्षक अलग होंगे. इसके 10 पुलिस थाने बनाये जायेंगे जहां प्रत्येक पर 80 पुलिस का स्टाफ रहेगा. इस व्यवस्था के लिये इन दोनों नगरों के लिए 50-50 करोड़ रुपये  दिये गये हैं. इस व्यवस्था को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री वी.के. सिंह अन्जाम देंगे. जो कर्नाटक की राजधानी बंगलौर से वहां की ट्राफिक व्यवस्था का अध्ययन करके आये है. इसके क्रियान्वयन के लिये नगर निगमों, लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, टेलीफोन और अन्य विभागों की एक समिति बनाई जायेगी. निश्चित ही यह व्यवस्था इसके परिणामों को देखते हुए राज्य के अन्य शहरों में कालान्तर में फैलाई जावेगी.

इस समय यातायात की समस्या सभी जगहों पर पैदा हो गई है. इसका एक बड़ा कारण वाहनों में आई अत्याधिक वृद्धि और सड़कों के किनारे या फुटपाथों पर दुकान लग जाना और उन पर पार्किंग करना भी है. कहा तो यह जाता है कि अभी लोगों को फुटपाथ पर चलने की आदत नहीं है. लेकिन यथार्थ यह है कि फुटपाथ भी अस्थाई दुकानों का बाजार बन जाते हैं. राज्य के कुछ महानगरों में तो जवाहर लाल नेहरू नगर नवीनीकरण के तहत काफी काम हुआ है. इस समय सबसे बड़ी जरूरत यह है कि न सिर्फ नगरों व कस्बों में बल्कि बाहरी सड़कों को और ज्यादा चौड़ा कर कई लेनों वाली सड़कें बनानी होंगी. बाहरी सड़कों पर बीच- बीच में पार्किंग व वर्कशाप व्यवस्था बनानी होगी. ऐसी दुर्घटनाएं भी बढ़ती जा रही है कि सड़क के किनारे पार्किंग या मरम्मत के लिये कोई वाहन खड़ा था और दूसरा तेज गति से आता वाहन उससे टकरा गया और मौके पर ही कई लोग मारे गये है. सड़कों के पुल भी इतने मजबूत नहीं है कि ये बढ़ते यातायात को ढो सके. पूरी ट्रैफिक व्यवस्था में ही आमूल परिवर्तन की जरूरत है और इसे फौरन पृथक योजना कर हल किया जाये.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
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