भोपाल, 21 सितंबर, नभासं. भोपाल प्रवास पर आये भूटान के प्रधानमंत्री जिग्में वाय थिनले आज इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के अवलोकन के दौरान वहाँ प्रदर्शित भारतीय संस्कृति, कला और जन-जातियों की प्रदर्शनियों से काफी अभिभूत हुए.

थिनले ने कहा कि मैं और मेरा प्रतिनिधि मण्डल, संग्रहालय में विविधतापूर्ण भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर को जिस उम्दा तरीके से संजोया गया है उसे देखकर बहुत प्रभावित हुआ है. यह संग्रहालय भारत और भारतीयों को सदैव याद दिलाता रहेगा कि वे वैश्वीकरण और आधुनिकता की तेज आँधी में भी अपने रीति-रिवाज, परम्परा और संस्कृति को बचाकर रखें. प्रधानमंत्री थिनले ने वीथि संकुल में एक के बाद एक भारतीय जनजातियों की जीवन-शैली और संस्कृति पर आधारित प्रदर्शनियाँ अत्यन्त रूचि एवं उत्साह से देखी और कहते गए- ”वन्डरफुल… वन्डरफुल… वन्डरफुल….

प्रधानमंत्री जिग्मी थिनले वाद्य यंत्रों के दुर्लभ और अनूठे संग्रह को देखकर बहुत अभिभूत हुए. कुछ वाद्य का उन्होंने वादन करवाया और उसे सुना. थिनले ने कुछ वाद्य यंत्रों का वादन करने से स्वयं रोक नहीं पाये. भूटान के प्रधानमंत्री थिनले ने वन विहार में तेंदुआ, बाघ और सर्प-उद्यान को रुचिपूर्वक देखा और उद्यान के प्रबंधन और रख-रखाव की काफी तारीफ की. प्रधानमंत्री के साथ आये प्रतिनिधि-मण्डल ने भी वन विहार का भ्रमण किया. वन मंत्री सरताज सिंह ने प्रधानमंत्री थिनले को प्रतीक चिन्ह भी भेंट किए.

राज्यपाल राम नरेश यादव ने आज यहाँ राजभवन में भूटान के प्रधानमंत्री श्री जिग्में वाय. थिनले का आत्मीय स्वागत किया. श्री थिनले राज्यपाल श्री यादव से सौजन्य भेंट के लिए राजभवन पहुँचे थे. राज्यपाल श्री यादव ने भूटान के प्रधानमंत्री श्री थिनले को शाम की चाय पर राजभवन आमंत्रित किया था. इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान भी उपस्थित थे. राज्यपाल राम नरेश यादव ने भूटान के प्रधानमंत्री थिनले और उनके साथ आये छह सदस्यों के प्रतिनिधि-मण्डल का शाल और श्रीफल भेंट कर स्वागत किया.

श्री यादव ने सभी अतिथियों को ग्यारसपुर (विदिशा) की सुप्रसिद्ध शालभंजिका’ प्रतिमा की प्रतिकृतियाँ भी भेंट कीं. इस अवसर पर राज्यपाल यादव ने कहा कि साँची बौद्ध तथा भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के शिलान्यास के साथ मध्यप्रदेश के इतिहास में एक नया अध्याय जुडऩे जा रहा है. भूटान के प्रधानमंत्री थिनले ने चर्चा के दौरान कहा कि दोनों देशों के बीच एक समन्वयपूर्ण वातावरण बनेगा और भूटान के बौद्ध विचारक तथा बौद्ध धर्म से सम्बन्धित संस्थाओं का लाभ इस विश्वविद्यालय को मिलेगा. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच इस आपसी सहयोग से पूरे विश्व को सद्भाव का एक अच्छा और नया संदेश जायेगा.

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