नई दिल्ली, 23 अप्रैल. उच्चतम न्यायालय ने नए सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह की नियुक्ति को सही ठहराया है।

कोर्ट ने नियुक्ति से संबंधित दायर जनहित याचिका को खारिज करते हुए साफ किया कि नियुक्ति से जुड़े सभी दस्तावेज सही है। सरकार ने इस मामले में सही प्रक्रिया का पालन किया है। इससे पहले इस मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार से रिकॉर्ड मांगे। कोर्ट ने कहा कि सरकार नियुक्ति से संबंधित हर जानकारी अदालत को मुहैया करवाए। कोर्ट ने बंद कमरे में मामले की सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

नियुक्ति का विरोध

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर बिक्रम सिंह की नियुक्ति का विरोध किया गया था। यह याचिका सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों, पत्रकारों एवं वरिष्ठ नौकरशाहों की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें एडमिरल रामदास और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी भी शामिल थे।

फर्जी मुठभेड़ का आरोप

बिक्रम सिंह की नियुक्ति का विरोध करने वाली याचिका सात लोगों की ओर से दाखिल की गई थी। 66 पन्नों की इस याचिका में आरोप लगाया गया कि बिक्रम सिंह मार्च 2001 में जम्मू-कश्मीर में हुए फर्जी मुठभेड़ मामले में शामिल थे. और इस मामले से संबंधित याचिका जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट में लंबित है।

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