नई दिल्ली, 1 जनवरी. राजद नेता और राज्यसभा सदस्य राजनीति प्रसाद ने रविवार को भाजपा के इन आरोपों को खारिज कर दिया कि सदन में लोकपाल विधेयक की प्रति फाडऩे की उनकी कार्रवाई के पीछे लालू प्रसाद की सीख थी.

राजनीति प्रसाद ने कहा कि उनकी पार्टी के अध्यक्ष ने उनसे ऐसा करने को नहीं कहा था. उन्होंने कहा ‘मेरी कार्रवाई किसी के सिखाने की वजह से नहीं थी. जो कुछ मैंने किया, वह उन पलों में मेरी भावनाओं का इजहार था.’ राज्यसभा में मध्य रात्रि से कुछ पहले जब राजनीति प्रसाद ने विधेयक की प्रति फाड़ी थी, तब राजद प्रमुख लालू प्रसाद सदन में लोकसभा सदस्यों की दीर्घा में बैठे सब देख रहे थे. राजनीति प्रसाद को अपने किए पर पछतावा नहीं है. उन्होंने कहा कि जब तक अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यकों और महिलाओं को भ्रष्टाचार निरोधक पैनल में आरक्षण नहीं दिया जाएगा और प्रधानमंत्री को इसके दायरे से बाहर नहीं रखा जाएगा तब तक वह भविष्य में भी सदन में विधेयक को आगे नहीं बढऩे देंगे. यह पूछे जाने पर कि क्या वह फिर से विधेयक को फाड़ेंगे, उन्होंने कहा ‘मेरा विरोध परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.”

राजनीति प्रसाद की तरह ही उच्च सदन में उनकी पार्टी के सहयोगियों ने भी उनकी कार्रवाई का समर्थन किया है. राज्यसभा में राजद के नेता जाबिर हुसैन ने कहा कि सभी ने राजनीति प्रसाद की कार्रवाई को स्थिति के संदर्भ में देखा. उन्होंने कहा ‘केवल राजनीति प्रसाद ही नहीं, बल्कि राजद के सभी प्रतिनिधि इस बात को लेकर नाराज थे कि भ्रष्टाचार निरोधक पैनल में अल्पसंख्यक समुदाय को आरक्षण दिए जाने के बारे में सरकार ने कुछ नहीं कहा. राजनीति प्रसाद अपनी भावनाओं को रोक नहीं सके.’ करीब एक दशक तक बिहार विधान परिषद के अध्यक्ष रहे हुसैन ने कहा कि संसदीय इतिहास में यह पहला अवसर नहीं है जब कुछ ऐसा हुआ हो. राजद सदस्य रामकृपाल यादव ने कहा ‘जो कुछ राजनीति प्रसाद ने किया उसका कोई गलत उद्देश्य नहीं था.’ उन्होंने कहा कि संसद में और विधानसभा में पहले भी ऐसे विरोध हुए हैं.

संविधान के संघीय स्वरूप से समझौता नहीं : तृणमूल

कोलकाता। लोकपाल के प्रावधानों के बारे में अपने सख्त रूख पर कायम रहते हुए तृणमूल कांग्रेस ने रविवार को कहा कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत प्रशासनिक जांच अधिकारी बनाना चाहते हैं लेकिन संविधान के संघीय स्वरूप के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। पार्टी की ओर से पेश किए गए संशोधन को स्वीकार करना होगा। वह गृह मंत्री पी चिदंबरम के उस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे जिसमें गृह मंत्री ने कहा था कि लोकायुक्त के प्रावधान को पूरी तरह से समाप्त करने की तृणमूल की मांग को पूरा करना आसान नहीं होगा और सरकार एक या दो संशोधनों को ही स्वीकार कर सकेगी। भारत के राज्यों का संघ होने का उल्लेख करते हुए राय ने कहा कि केंद्र सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में इन विषयों को पूरी तरह से स्पष्ट किया गया है, इसमें भ्रम की स्थिति नहीं है।

राय ने दावा किया कि पार्टी सांसदों ने लोकपाल विधेयक में लोकायुक्त के प्रावधानों पर आपत्ति व्यक्त की थी क्योंकि सरकार के साथ तृणमूल कांग्रेस की यह समझ थी कि राज्यसभा में विधेयक पेश करते समय उसके सुझावों को ध्यान में रखा जाएगा। उन्होंने कहा, ‘इस आश्वासन को नहीं निभाया गया। ममता की आवाज देश के अन्य मुख्यमंत्रियों की ओर से व्यक्त किए गए विचार की अभिव्यक्ति है।’ राय ने कहा कि जिस तरह से राज्यसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित की गई, वह लोकतंत्र के लिहाज से ठीक नहीं है। उन्होंने महसूस किया, ‘सरकार को मत विभाजन का सामना करना चाहिए था।’ पार्टी के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि लोकपाल पर पार्टी का रूख स्पष्ट है और अब यह राष्ट्रीय मत बन गया है।

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