सदन की सहमति बगैर आशय पत्र देना गलत : कांग्रेस

भोपाल, 23 नवंबर. नभासं. निजी विश्वविद्यालयों को बिना सदन की सहमति लिए आशय पत्र जारी करने कi मामल आज राज्य विधानसभा में इतना तूल पकड़ा की कांग्रेस विधायकों ने सरकार के मंत्री के जवाब का बहिष्कार किया और तभी सदन में लौटे, जबकि मंत्री का इस मामले पर जवाब पूरा हो गया.

मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन तृतीय संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान पाइंट आफ आर्डर का मामला उठाते हुए कांग्रेस विधायक दल के उप नेता चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार ने दो निजी विश्वविद्यालयों को सदन की सहमति लिए बगैर आशय पत्र जारी किया है. जो कि सरकार की ओर से जल्दबाजी में उठाया गया कदम दिखाई दे रहा है. उनका कहना था कि यह आशय पत्र पहले सदन में प्रस्तुत किया जाना चाहिए था. इस बीच उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने नियमों का हवाला देते हुए सरकार के निर्णय को सही बताया.

उनका कहना था कि केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने भी इस बात को महसूस किया है कि वर्ष 2021 तक यदि सकल प्रवेश अनुपात 30 फीसदी प्राप्त करना है तो हमें 30 से 40 हजार कालेजों और एक हजार विवि की जरुरत होगी. अलबत्ता इसी को ध्यान में रखते हुए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई जा रही है.उच्च शिक्षा मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होने के बाद नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सदस्यों ने जवाब का बहिष्कार किया.  इससे पूर्व इस विधेयक पर चर्चा की शुरूआत करते हुए चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार को इस मामले में एक समिति बनाना चाहिए जो निजी विश्वविद्यालय की स्थापना का उदेश्य, संपत्ति, आर्थिक आधार,संसाधन तथा शिक्षा के प्रति समर्पण का आंकलन करे. उन्होंने कहा कि समिति के आंकलन रिपोर्ट के आधार पर संशोधन विधेयक को आगामी बजट सत्र प्रस्तुत किया जाना चाहिए. इस पर भाजपा विधायक गिरजाशंकर शर्मा ने संशोधन विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि शिक्षा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लाने की जरुरत है क्योंकि उच्च शिक्षा देने की जिम्मेदारी व जवाबदेही सिर्फ सरकार पर नहीं डाली जा सकती. उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में निजी क्षेत्र की भागीदारी पर सरकार का नियंत्रण होना जरूरी है.

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