लंदन, 1 मई. अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन अंतिम समय तक अपने सहायक अयमान अल जावाहिरी और तालिबान सुप्रीमो मुल्ला उमर के संपर्क में था. ओसामा के एबटाबाद स्थित ठिकाने से प्राप्त दस्तावेजों से पता चलता है कि उनके साथ मिलकर वह नाटो सैनिकों के खिलाफ हमले की योजना बना रहा था.

गार्जियन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक दस्तावेजों से पता चलता है कि मुल्ला उमर और अलकायदा के शीर्ष नेताओं के बीच नजदीकी संबंध थे. इससे अफगानिस्तान में शांति के नए प्रयासों को धक्का पहुंच सकता है. इस बीच विश्लेषकों के बीच इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि तालिबान एक बार फिर अलकायदा को अफगानिस्तान में पनाहगाह उपलब्ध कराएगा या वह आतंक का रास्ता छोडऩे के लिए तैयार हो जाएगा. कुछ लोगों का मानना है कि तालिबान अफगानिस्तान के राष्ट्रीय एजेंडे का अनुसरण कर रहा है. दस्तावेजों से पता चलता है कि ओसामा, जवाहिरी और उमर के बीच त्रिकोणीय बातचीत हुई है. उमर के बारे में माना जाता है कि वह वर्ष 2001 से ही पाकिस्तान में है. अखबार का कहना है कि एबटाबाद से प्राप्त दस्तावेजों में से कुछ को शीघ्र ही गोपनीय श्रेणी से हटा दिए जाने की संभावना है.

कुछ दस्तावेज तो कई वर्ष पुराने हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो पिछले वर्ष दो मई को ओसामा के मारे जाने के केवल कुछ सप्ताह पहले के हैं. पश्चिमी देशों के खुफिया अधिकारियों का अनुमान है कि अफगानिस्तान में अलकायदा से जुड़े करीब 100 लड़ाके मौजूद हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरून कह चुके हैं कि अफगानिस्तान से वर्ष 2014 तक अधिकांश विदेशी सैनिकों की वापसी के बाद वहां स्थिरता के लिए जरूरी है कि तालिबान के साथ राजनीतिक समझौता किया जाए.

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