अदालत में रिश्वत की पेशकश करने वाले को पहचानने से मना किया था

  • शून्यकाल में उठा था मामला

भोपाल 25 नवंबर.नभासं. मध्यप्रदेश विधानसभा में आज लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन द्वारा निलंबन समाप्त करने के लिए पांच लाख रूपये की कथित रिश्वत की पेशकश करने वाले कार्यपालन यंत्री को अदालत में पहचानने से इंकार करने के मामले को लेकर आज प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के सदस्यों ने उन्हें मंत्री पद से हटाने की मांग को लेकर हंगामा करने के बाद बहिर्गमन किया.

कांग्रेस सदस्य यादवेन्द्र सिंह ने शून्यकाल में यह मामला उठाते हुए कहा कि बिसेन के निज सचिव ने भोपाल के टी टी नगर थाने में 26 मई 2009 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी. इसमें कहा गया था कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री आर.एन.करैया ने अपना निलंबन समाप्त कराने के लिए अपने साथी श्री पवन व्यास के साथ मिलकर मंत्री बिसेन को पांच लाख रूपये की रिश्वत देने की पेशकेश की थी. पुलिस ने इस कार्यपालन यंत्री और उसके साथी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था. उन्होंने कहा कि मंत्री बिसेन ने कल 24 नवंबर को भोपाल में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व में पुलिस को दिए बयान से मुकरते हुए दोषी कार्यपालन यंत्री को पहचानने से इंकार कर दिया है.उन्होंने आरोप लगाया कि बिसेन ने पद रहते हुए इस मामले में अदालत में पक्षद्रोही होने का गंभीर अपराध किया है इसलिए इन्हें मंत्री पद से हटाया जाना चाहिए. इसके बाद कांग्रेस के अन्य सदस्यों ने एक साथ जोर जोर से बोलना शुरू कर हंगामें की स्थिति निर्मित कर दी. विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि सदस्य श्री यादवेन्द्र सिंह को शून्यकाल में अपनी बात कहने का अवसर दिया गया है और उनकी बात सदन के सामने आ गई है. इस मामलें को सदन में अन्य माध्यम से उठाया जा सकता है. अध्यक्ष के निर्देश के बाद कांग्रेस सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए बहिर्गमन कर दिया. इन सदस्यों ने सदन से बाहर निकलकर गलियारे में काफी देर तक बिसेन को मंत्री हटाने के लिए नारेबाजी की.

10 लाख लेकर बदले बयान –चतुर्वेदी

कांग्रेस विधायक दल के उपनेता चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) व सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने 10 लाख रुपए लेकर न्यायालय में अपने बयान बदल दिए हैं. विधानसभा परिसर में मीडिया के सामने चतुर्वेदी ने बताया कि एक पांच लाख रुपए की रिश्वत देने की कोशिश करने वाले पीएचई के कार्यपालन यंत्री के खिलाफ बिसेने के निज सचिव ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई. पुलिस ने प्रकरण की जांच के दौरान बिसेन के बयान भी दर्ज किए थे. जब पुलिस ने प्रकरण न्यायालय में पेश कर दिया तो बिसेन ने अपना बयान पलट दिया. चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि जिस इंजीनियर पर 5 लाख रुपए रिश्वत देने का आरोप लगाया. न्यायालय में बयान बदलने के लिए बिसेन ने 10 लाख रुपए की रिश्वत ली. उन्होंने कहा कि बिसेन के खिलाफ आईपीसी की धारा 281 के तहत मुकदमा चलाया जाना चाहिए.

Related Posts: