राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा ने सरकार को घेरा

  • सवालों के भंवरजाल में फंसे भाजपा नेता

नई दिल्ली 30 सितंबर. भाजपा में पीएम इन वेटिंग के जंग के बीच पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारणी में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का नहीं आना चर्चा का विषय बना हुआ है. अब चर्चा यह होने लगी है कि पार्टी बड़ी है या मोदी?

हालांकि भाजपा के ज्यादातर नेता इस सवाल से कन्नी काट रहे हैं लेकिन दबे जुबान से कह रहे हैं कि पार्टी से बड़ा कोई नहीं है. सूत्रों की माने तो पार्टी के वरिष्ठï नेता लालकृष्ण आडवाणी द्वारा अपनी प्रस्तावित रथ यात्रा के कार्यक्रम में बदलाव किए जाने के साथ-साथ पार्टी के कई वरिष्ठï नेताओं की ओर से मोदी को पीएम इन वेटिंग नहीं पेश करने से श्री मोदी खासे नाराज हैं. संभवत: इसी वजह से उन्होंने पार्टी के राष्टï्रीय कार्यकारणी में आने से साफ मना कर दिया. हालांकि पार्टी के लोग औपचारिक रूप से तर्क दे रहे हैं कि वे नवरात्र में उपवास रखते हैं इसलिए उन्होंने पहले ही बैठक में आने से अपनी असमर्थता व्यक्त कर दी थी. लेकिन सूत्रों की माने तो श्री मोदी ने बैठक में आने से पहले पार्टी नेताओं के सामने कुछ शर्त रखी थी जिसके मुताबिक बैठक में गुजरात को रॉल मॉडल राज्य के तौर पर चर्चा करने के अलावा उन्हें पीएम इन वेटिंग के तौर पर पेश करने की सैद्घांतिक मंजूरी देने की बात थी.

लेकिन पार्टी ने उनके दोनों प्रस्ताव पर कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया. इतना ही नहीं कार्यक्रम की रूप रेखा तैयार करते समय उनकी सलाह या मांग पर पार्टी रणनीतिकार गंभीरता नहीं दिखाए. जिसके कारण ही वे बैठक से दूरी बना लिए हैं. सूत्रों की माने तो मोदी ने अपनी अनुपस्थिति के संदर्भ में कोई औपचारिक पत्र भी नहीं भेजा है. लिहाजा कार्यकारणी की बैठक में आज प्रतिनिधि यह चर्चा करते चुने गए कि क्या मोदी का कद अब पार्टी से भी बड़ा हो गया है?
हालांकि कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के विरोध के बाद श्री आडवाणी व पार्टी की ओर से रथ यात्रा के आरंभिक कार्यक्रम में श्री मोदी को नहीं बुलाने के निर्णय से भी वे नाराज हैं.

तिहाड़ में होगी कैबिनेट : गडकरी

नई दिल्ली. भाजपा ने भ्रष्टाचार को लेकर मनमोहन सिंह और उनकी सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि जिस तरह एक के बाद एक मंत्री जेल जा रहे हैं या जाने वाले हैं, उससे लगता है कि कहीं निकट भविष्य में कैबिनेट की बैठक तिहाड़ जेल में न हो और घोटालों में प्रधानमंत्री की भूमिका की जांच करने की जरूरत भी पड़ जाए. साथ ही पार्टी ने कहा है कि 21 अक्टूबर को जनसंघ की स्थापना दिवस को कृतज्ञता दिवस के रूप में मनाएंगे.

शुक्रवार से शुरू हुई पार्टी की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के उद्घाटन भाषण में पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने यह बात कही. गडकरी ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में प्रधानमंत्री की भूमिका की जांच करने की भी जरूरत पड़ सकती है. अगर ऐसे साक्ष्य आते हैं तो ओहदे की परवाह किए बिना कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री हर बात पर दो तरह की टिप्पणी करते हैं कि मुझे नहीं मालूम या मैं देखूंगा. उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री देश और सरकार के सामने पेश समस्याओं के प्रति इतने ही उदासीन हैं तो वह पद छोड़ क्यों नहीं देते.

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद के अनुसार भाजपा अध्यक्ष ने उक्त बातों के साथ यह भी कहा कि देश के मौजूदा हालात में कुछ भी हो सकता है. संप्रग सरकार की साख गिर चुकी है.  देश में उसकी विश्वसनीयता खत्म हो गई है और दुनिया में उसके रूतबे को बहुत बड़ा धक्का लगा है. उन्होंने कहा कि अपनी गलतियों के कारण संप्रग नेतृत्व न सिर्फ अपनी सरकार को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि समूचे राजनीतिक समुदाय को भी बदनाम कर रहा है. गडकरी ने इसके साथ ही अपनी पार्टी के लोगों को खबरदार किया कि भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी व्यक्ति के लिए भाजपा में कोई जगह नहीं है. भ्रष्टाचार के मामले में हम जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहे हैं. 2जी घोटाला मामले में चिदंबरम को जेल भेजे जाने की बात कहते हुए गडकरी ने कहा कि राजा तिहाड़ में और चिदंबरम बाहर क्यों हैं? यह दर्शाता है कि एक ही घोटाले में दो पैमाने अपनाए जा रहे हैं। इस घोटाले में चिदंबरम की सहअपराधिता के साक्ष्यों के अंबार होने के बावजूद उनके विरूद्ध कार्रवाई नहीं हो रही है. सीबीआई को उनसे पूछताछ तक नहीं करने दी जा रही है.

अगले साल विधानसभा चुनाव का सामना करने जा रहे उत्तर प्रदेश में भाजपा के सत्ता में आ सकने का दावा करते हुए उन्होंने ऐलान किया कि राज्य में उनकी पार्टी सपा या बसपा से किसी स्थिति में समझौता या गठबंधन नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि इन दोनों दलों से गठबंधन करने की बजाए भाजपा विपक्ष में बैठना पंसद करेगी. मोदी और आडवाणी में नाराजगी की खबरों के बीच गडकरी ने आडवाणी की जम कर तारीफ की और सभी पार्टीजन से उनकी रथयात्रा को सफल बनाने में पूर्ण सहयोग देने को कहा.

आडवाणी के बारे में उन्होंने कहा कि भाजपा के इस वरिष्ठ नेता ने छद्म धर्मनिपरेक्षता का नया मुहावरा गढ़ा और सबको न्याय, पर तुष्टिकरण किसी का नहीं जैसे नारे देकर बहुत प्रभावशाली तरीके से समूची देशभक्त जनता की पीड़ा एवं आकांक्षाओं को अभिव्यक्त किया. सरकार की बीपीएल (गरीबी रेखा के नीच) की नई परिभाषा की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि आम आदमी का रोना रोने वाली इस सरकार ने शहरों में 32 और गांवों में 26 रुपये प्रतिदिन कमाने वालों को अमीर बता कर आंकड़ों की राजनीति की है. ऐसा करके वह गरीबी रेखा के नीचे वालों को बीपीएल में शामिल करने की बजाए यह उसमें पहले से शामिल लोगों को बाहर करने पर तुली है.

नोट के बदले वोट मामले में भाजपा के दो पूर्व सांसदों और आडवाणी के सहयोगी सुधीद्र कुलकर्णी की गिरफ्तारी का उल्लेख करते हुए गडकरी ने कहा कि अपराधबोध से ग्रस्त सरकार द्वारा हताशा में अपने कुकृत्यों को छिपाने का यह विचित्र उदाहरण है. उन्होंने मांग की कि ऐसे हथकंडे छोड़कर इस कांड को संचालित करने वाले असले दोषियों को सामने लाया जाए. अफजल गुरु को फांसी से बचाने के प्रयासों की निंदा करते हुए उन्होंने कहा जब फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है और राष्ट्र्रपति ने उसकी दया याचिका खारिज कर दी है तो पूरी तरह से निपट चुके मामले को फिर से शुरू करने की किसी भी कोशिश को कतई सहन नहीं किया जाएगा. अगर ऐसी अनुमति दी गई तो राजनीतिक कारणों से बहुत सारे मुकदमों को फिर से शुरू करने का सिलसिला शुरू हो जाएगा. हमें गलत परंपराएं नहीं डालनी चाहिए.

पाकिस्तान के बारे में उन्होंने कहा कि अमेरिका के पाकिस्तान के साथ राजनीतिक-राजनयिक संबंधों में आए तनाव पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि भारत के लिए अब समय आ गया है कि वह पाकिस्तान पर और अधिक अंतरराष्ट्रीय दबाव डलवाए. हमें याद रखना चाहिए कि चीन-पाकिस्तान की स्थापित धुरी के बावजूद चीन भी उससे असहज महसूस कर रहा है. ऐसी स्थिति में बहुत कुछ इस पर निर्भर करता है कि हम कितनी मुस्तैदी से काम करते हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अपनी स्थिति किस तरह से रखते हैं.

गडकरी ने चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी व्यक्ति के लिए भाजपा में जगह नहीं होगी और साथ ही कहा कि हम सभी को सतर्क रहना होगा कि हमारी कथनी और करनी पर लोगों की गहरी निगाह बनी हुई है और हमें किसी भी तरह का विवाद पैदा नहीं होने देना है. पार्टी में एकता बनाए रखने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी एकता को सांगठनिक उद्देश्य के रूप में विकसित नहीं कर पाए तो हम अपने उद्देश्यों के प्रति न्याय नहीं कर सकेंगे. उन्होंने कहा कि जनसंघ के स्थापना दिवस यानि 21 अक्टूबर को कृतज्ञता दिवस के रूप में मनाएंगे. उन्होंने राज्य इर्कायों से अनुरोध किया कि जनसंघ के दिनों से संघर्षरत व 75 की आयु पूरी कर चुके कार्यकर्ताओं का सम्मान करे.

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