लखनऊ, 12 सितम्बर. कोयला ब्लाक आवंटन में देश कों हुये एक लाख 86 हजार करोड के नुकसान के कारण आलोचनाओं से घिरी कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने आज इसे भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक .कैग. भारतीय जनता पार्टी और विदेशी मीडिया की बदनाम करने की साजिश करार दिया. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने  टाइम द इक्नामिक और वाशिंगटन पोस्ट जैसे पत्रिकायें और अखबार संप्रग सरकार के खिलाफ भाजपा की साजिश में शामिल हैं.

टाईम पत्रिका ने पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ टिप्पणी की और अब .द इकनोमिक ने पार्टी महासचिव राहुल गांधी पर निशाना साधा है . उन्होंने नियंत्रक और महालेखापरीक्षक विनोद राय का नाम लिये बिना कहा कि वह भी भाजपा से सांसद बनना चाहते है या पार्टी में और पद पाना चाहते हैं. दोनों नेताओं ने कहा कि भारत के पूर्व नियंत्रक और महालेखापरीक्षक टी.एन चतुर्वेदी ने 1985 से 89 तक दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ बोफोर्स घोटाले को लेकर रिपोर्ट दी थी और अब यही काम श्री राय टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले और कोयला ब्लाक आवंटन को लेकर कर रहे हैं . भाजपा ने श्री चतुर्वेदी को सांसद और राज्यपाल बनाया. वर्तमान कैग की भी कुछ ऐसी ही महात्वाकांक्षा है.
सर्वश्री गुलाम नबी आजाद और दिग्विजय सिंह ने कहा कि बोफोर्स तोप सौदे में घोटाले को लेकर भी विदेशी पत्र पत्रिकाओं ने दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी की काफी आलोचना की थी. भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार अपने छह साल के शासनकाल में इसे साबित नहीं कर पायी. उन्होंनें कहा कि भाजपा झूठ को कई बार बोल इसे सच बनाना चाहती है और ऐसा वह पहले भी करती रही है . कैग ने अपने रिपोर्ट में घोटाले की बात बिल्कुल नहीं कही है . रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि कोयला ब्लाक के आवंटन की जगह नीलामी होती तो राजस्व का नुकसान नहीं होता . कांग्रेस नेताओं ने कहा कि केन्द्र सरकार कोयला ब्लाक की नीलामी ही करना चाहती थी लेकिन भाजपा समेत विपक्ष की राज्य सरकारों ने इसका विरोध किया . उन्होंनें राजस्थान. मध्यप्रदेश. छत्तीसगढ और ओडिसा की राज्य सरकार का हवाला देते हुये कहा कि इन सरकारों ने यह कह कर नीलामी का विरोध किया कि इससे राज्य सरकार के अधिकार में कमी होगी .

 

भाजपा नेता राष्ट्रपति  से मिले

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज यहां राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से मुलाकात कर कोयला ब्लाक आवंटन मुद्दे पर हस्तक्षेप करने की मांग की . लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली तथा सांसद मुरली मनोहर जोशी ने राष्ट्रपति भवन जाकर श्री मुखर्जी को इस संबंध में एक ज्ञापन भी सौंपा. उन्होंने कोयला ब्लाकों का आवंटन रद्द करने और आवंटन मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखने के साथ साथ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तथा कांग्रेस द्वारा कैग की रिपोर्ट पर सवाल उठाये जाने पर चिंता जतायी.

कांग्रेस के सांसदों, उच्च पदाधिकारियों तथा स्वयं प्रधानमंत्री ने कैग की रिपोर्ट की आलोचना की है. पार्टी ने कहा है कि कैग पर राजनीतिक महत्वाकांक्षा के आरोप भी लगाये गये हैं. भाजपा ने प्रधानमंत्री द्वारा 27 अगस्त को संसद में और बाहर दिये गये वक्तव्य को स्तब्ध करने वाला बताया है श्री मुखर्जी से मुलाकात के बाद श्री आडवाणी ने संवादाताओं से कहा कि संविधान की रक्षा करना राष्ट्रपति का कर्तव्य है और इसी लिए उन्होंने उनसे इस बारे में मुलाकात की है.

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