स्वामीनाथन आयोग की सिफारिषें लागू करने आज राज्यपाल को ज्ञापन

भोपाल, 27 जून, नभासं. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने कहा कि जिस दिन केन्द्र सरकार ने किसानों के लिए आवश्यक रासायनिक खादों की मूल्य वृद्धि की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके पीछे समूची पार्टी ने इसका मुखर विरोध किया. प्रदेश भर में किसानों के समर्थन में और केन्द्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों के विरोध में आंदोलन किया गया.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केन्द्र की किसान विरोधी पहल के जबाव में मध्यप्रदेश में जीरों प्रतिशत ब्याज पर फसल कर्ज देने की घोषणा कर दी और केन्द्र सरकार को सबक दिया कि कृषि प्रधान देष में कृषि की उन्नति के बगैर देश समृद्ध नहीं हो सकता है. वह भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा की प्रदेष कार्यसमिति की बैठक का उद्घाटन कर रहे थे. कृषि कल्याण मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया और किसान मोर्चा के प्रदेष अध्यक्ष बंषीलाल गुर्जर ने भी बैठक को संबोधित किया.

प्रभात झा ने कहा कि मध्यप्रदेष में आने वाले 2013 के विधानसभा चुनाव में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और मिशन-2013 की सफ लता में किसान मोर्चा की निर्णायक भूमिका होगी. उन्होनें कहा कि 15 जुलाई को प्रदेश में किसान महापंचायत का आयोजन किया जायेगा, जिसमें प्रदेश भर के किसान प्रतिनिधि भाग लेंगे और खेती से जुड़ी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जायेगी.

उधर,कृषि कल्याण मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने किसान मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि आजादी के बाद किसानों की समस्याओं पर गंभीरतापूर्वक चर्चा करने में सरकारे उदासीन रही है. मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने कृषि कैबिनेट का गठन कर इस दिषा में सराहनीय पहल की है. किसानों एवं कृषि से जुड़ी खाद, बिजली, सिंचाई, राजस्व एवं भू-अभिलेख जैसी सभी समस्याओं के समाधान के लिए कृषि कैबिनेट की बैठक में विचार किया जाता है. केन्द्र सरकार ने कृषि उपज मंडी के अधिकार समाप्त करने के लिए एक कानून पर विचार किया था.

राज्यपाल को ज्ञापन-किसान मोर्चा 27 जून को राज्यपाल से भेंटकर राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन उन्हें भेंट किया गया. ज्ञापन में केन्द्र सरकार से स्वामीनाथन आयोग की सिफारिषें तुंरत लागू करने का आग्रह किया जायेगा.गुर्जर ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी ने खाद की बढी हुई कीमत वापस लेने और किसानी को घाटे से उबारने के लिये गेहंू का समर्थन मूल्य 1800 रू. क्विंटल किये जाने की मांग की है, लेकिन केन्द्र सरकार ने तदर्थ रूप से 1285 रू. क्विंटल समर्थन मूल्य पर किसानों से गेहंू की खरीद की है जिससे लागत मूल्य भी नहीं निकला है. स्वामीनाथन आयोग ने खेती से किसानों का पलायन रोकने के लिये लागत खर्च पर पचास प्रतिशत मुनाफा जोड़कर समर्थन मूल्य दिये जाने को कहा है. गेहंू का लागत खर्च प्रति क्विंटल न्यूनतम 1200 रू. आता है. ऐसे में 600 रू. क्विंटल जोडकर 1800 रू. क्विंटल खरीदी मूल्य दिया जाना चाहिए.

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