दिल्ली. केंद्र मे सत्तारुढ़ कांग्रेस नेतृत्व वाली संप्रग सरकार की संसद के बजट सत्र की पहली अग्नि परीक्षा सोमवार को होगी. राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी केंद्र (एन.सी.टी.सी.) पर गैर कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की आपत्ति के बावजूद राष्ट्रपति अभिभाषण में उसे शामिल करना अब मनमोहन सिंह सरकार के गले की हड्डी बन गया है.

ऐतिहासिक रूप से प्रमुख विपक्षी दल भाजपा सहित सभी विपक्षी दलों ने एनसीटीसी सहित अन्य विवादास्पद मुद्दों को राष्ट्रपति के भाषण मे शामिल किए जाने के खिलाफ ढायी हजार से अधिक संशोधन दिए हैं. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर संसद के दोनों सदनों मे चर्चा पूरी हो चुकी है और अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जवाब देना है. सोमवार दोपहर 12 बजे के बाद प्रधानमंत्री जवाब देगे. आमतौर पर राष्ट्रपति को सम्मान के लिए विपक्ष ध्वनिमत से अभिभाषण पारित कराता है, लेकिन एनसीटीसी मुद्दे पर वह नरम रूख लेने को तैयार नहीं है. सरकार भी यदि राष्ट्रपति के भाषण से विवादित अंश हटाती है, तो यह राष्ट्रपति के सम्मान पर चोट होगी. और यदि विपक्ष संशोधन पर मतदान के लिए अड़ता है, तो बजट सत्र का यह पहला मतदान होगा, जिसके लिए सहयोगी दलों का मत जुटाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी.

वैसे भी केंद्र सरकार को बजट सत्र के पहले चरण में तीन परीक्षाओं से गुजरना है. इनमें सबसे बड़ा तो आम बजट ही है, लेकिन उससे पहले राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव व रेल बजट को पारित कराने की भी चुनौती है. तृणमूल कांगे्रस के इसके पक्ष मे खड़े होने से सरकार की मुसीबत और बढ़ गई है. संघीय ढांचे व राज्यों के अधिकार से जुड़ा मुद्दा होने पर तमाम क्षेत्रीय दल भी इसके खिलाफ हैं. रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी को हटाने के मुद्दे पर ममता व केंद्र सरकार मे तकरार से मामला ज्यादा पेचीदा हो गया है.राज्यसभा मे सरकार के अल्पमत मे होने से कामकाज प्रभावित होता है और उसकी नैतिक पराजय होती है. लेकिन सरकार गिरने का खतरा नहीं होता है, जबकि लोकसभा मे यह खतरा कदम-कदम पर मौजूद रहता है. ऐसे मे सोमवार को सबकी निगाहें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के जवाब पर टिकी होंगी. अगर उन्होंने एनसीटीसी पर पीछे हटने की घोषणा की तो विपक्ष अपने संशोधनों पर जोर नहीं देगा. ऐसा न होने पर मतदान की स्थिति में सरकार के अल्पमत मेंं रहने पर तो उसकी किरकिरी होगी.

 

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