पन्ना, 27 सितम्बर. बेशकीमती हीरों के लिए प्रसिद्घ पन्ना की धरती सदियों से लोगों के लिए रहस्य और रोमांच का केन्द्र रही है. अपनी किस्मत को चमकाने के लिए हर साल यहां हजारों लोग धरती की कोख में छिपे हीरों की खोज करते हैं, जिनमें से कई देखते ही देखते रंक से राजा बन जाते हैं.

जिला मुख्यालय पन्ना से लगभग 8 किमी. दूर ग्राम दहलान चौकी में गरीब आदिवासी शंभूदयाल कोंदर की किस्मत चमक गई है. यहां उसको निजी पट्टे की भूमि में 16 कैरेट 13 सेन्ट वजन का बेशकीमती हीरा मिला है. यह हीरा जेम क्वालिटी (उज्जवल) का है जिसकी अनुमानित कीमत 16 लाख रू. से भी अधिक है. हीरा कार्यालय पन्ना के हीरा पारखी आभाष सिंह ने बताया कि शंभूदयाल कोंदर पिता सुनवा कोंदर द्वारा इस नायब हीरे को विधिवत जमा करा दिया गया है, जिसे आगामी होने वाली खुली नीलामी में बिक्री के लिए रखा जायेगा. हीरा अधिकारी के.पी. दिनकर ने बताया कि इसके पूर्व गत वर्ष 25 अक्टूबर को 18.29 कैरेट वजन का हीरा जमा हुआ था, इस दरम्यान यह पहला बड़ा हीरा है जो हीरा कार्यालय में जमा कराया गया है.

मालुम हो कि पन्ना जिले में हीरों का अकूत भण्डार मौजूद है, लेकिन अधिकांश हीरा धारित क्षेत्र वन भूमि में आता है जहां हीरों का वैधानिक रूप से उत्खनन संभव नहीं है. ऐसी स्थिति में ज्यादातर लोग अब अपनी निजी पट्टे की भूमि में ही हीरों की खोज करते हैं. बृजपुर व पहाड़ीखेरा क्षेत्र के किसान तो खेतों में फसल उगाने के बजाय हीरा की खदानें चलवा रहे हैं. यह उन्हें फायदे का धंधा साबित हो रहा है. दहलान चौकी जहां 16.13 कैरेट का हीरा मिला है वह भी शासकीय भूमि पर नहीं अपितु निजी पट्टे के भूमि से प्राप्त हुआ है. खेतों में हीरा निकलने से अब इलाके के किसानों का रूझान खेती करने के बजाय हीरा खदान लगाने की ओर बढ़ रहा है.

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