विकास की चुनौतियों से निपटना जरूरी

भोपाल,14 अक्टूबर.उद्योग तथा वाणिज्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि देश में विकास के क्षेत्र में आ रही विभिन्न चुनौतियों का सामना करने के लिये यह जरूरी है कि हम नई तकनीकों को समझें और उन्हें बेहतर ढंग से अपनाकर देशवासियों तक उनका लाभ पहुँचायें.

विजयवर्गीय आज यहाँ भूस्थानिक तकनीक कारवाँ के प्रतिनिधियों द्वारा आयोजित सेमीनार के अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे. इस अवसर पर उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा समय में भूस्थानिक तकनीक का उपयोग विकास के सभी क्षेत्रों में बेहद आवश्यक है. इस तकनीक से शहर नियोजन, वन प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना विकास जैसे सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव है. विजयवर्गीय ने कहा कि जीआईएस और रिमोट सेंसिंग तकनीक का मध्यप्रदेश में बेहतर इस्तेमाल किया गया है. प्रदेश में वन विभाग तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद ने विभिन्न परियोजनाओं के लिये इस तकनीक का सराहनीय उपयोग किया है.

उन्होंने कहा कि भूस्थानिक तकनीक के जरिये आने वाले 5 वर्षों में राज्य में एक समन्वित प्लेटफार्म बनकर तैयार हो जायेगा, जिसका सभी विभाग इस्तेमाल कर संबंधित कार्यक्रमों और योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन कर सकेंगे. इस प्लेटफार्म में रिमोट सेंसिंग पद्धति का उपयोग कर हिस्टोरिकल डाटा की एक गुणवत्तापूर्ण श्रृंखला तैयार की जायेगी, जिसमें विभिन्न भौगोलिक इमेज उपयोग के लिये सुलभ रहेगी. इससे पहले जीओस्पेशियल मीडिया, कम्युनिकेशन के साउथ एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका रीजन के निदेशक प्रशांत जोशी ने सेमिनार के उद्देश्यों और भूस्थानिक तकनीक के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि विकास की तेज रफ्तार में इस तकनीक का महत्वपूर्ण योगदान है. देश के प्रमुख शहरों में इस बारे में जन-जागरूकता लाने तथा शासकीय विभागों तक इस तकनीक की जानकारी पहुँचाने के मक़सद से यह आयोजन किया जा रहा है. इस तकनीक में भूगोल और कम्प्यूटर विज्ञान का अनूठा संयोजन है.

यह तकनीक हमें पर्यावरण पर हो रहे दुष्प्रभावों और भूकंप जैसी घटनाओं की जानकारी देकर इनके समाधान में मदद करती है. कृषि प्रधान हमारे देश में इस तकनीक की मदद से कृषि विकास दर को गुणात्मक रूप से सफलतापूर्वक बढ़ाया जा सकता है. सेटेलाइट और सेंसर के माध्यम से यह तकनीक किसी भी क्षेत्र में हो रहे बदलाव की सही-सही जानकारी उस क्षेत्र के मानचित्र के माध्यम से आम लोगों तक पहुँचाने में सक्षम है. इस कारवाँ में भागीदारी कर रही बहुराष्ट्रीय फार्च्यून 500 कम्पनियों के प्रतिनिधियों ने भी सेमिनार में अपने-अपने संस्थानों के सॉफ्टवेयर की विशेषताओं से अवगत कराया. इस दौरान इंटरग्राफ कम्पनी के क्षेत्रीय प्रबंधक  सचिन अग्रवाल, डिजिटल ग्लोब कम्पनी के तकनीकी प्रबंधक  वी. वासुदेव राव, पिटनी बाउस बिजनेस इनसाइट के निदेशक मनोज जैन और ह्यूलेड पेकार्ड (एच.पी.) के प्रतिनिधि अविनाश भान सेमिनार में मौजूद थे. इस दौरान जीओस्पेशियल टेक्नोलॉजी कारवां देश के 10 प्रमुख शहरों में मेपिंग टेक्नोलॉजी के जरिये विभिन्न क्षेत्रों में पहुँचने वाले फायदों की जानकारी प्रदान करेगा.देश के प्रमुख शहरों गौहाटी, कोलकाता, गाँधीनगर, चण्डीगढ़, पटना, चैन्नई और मुम्बई के भ्रमण के बाद आज 14 अक्टूबर को यह कारवाँ भोपाल पहुँचा. भोपाल के बाद अब यह कारवाँ जयपुर और त्रिवेन्द्रम पहुँचेगा.

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