कोच्चि. केरल के इडुक्की और कंबम जिले में गर्म मौसम के चलते इस सीजन में इलायची के उत्पादन में कम से कम 8-10 हफ्ते की देरी होगी। तमिलनाडु में भी गर्म मौसम के चलते पौधों में पर्याप्त फूल नहीं लग पाए हैं। इलायची के कुल उत्पादन में इडुक्की जिले की हिस्सेदारी करीब 45 फीसदी है और यहां से मिली ताजा खबरों के मुताबिक, नई फसल अगस्त के मध्य से पहले बाजार नहीं पहुंच पाएगी। सामान्य तौर पर नीलामी केंद्रों पर फसल की आवक जून के मध्य से शुरू हो जाती है।

गर्म मौसम और इस दौरान कमजोर बारिश के चलते ज्यादातर बागान में फूल सूख गए हैं। हालांकि अब एक बार फिर से फूलों का लगना शुरू हो गया है, लेकिन इसके इलायची में तब्दील होने में कम से कम दो महीने का वक्त लगेगा। इस तरह से नई फसल की आवक में देरी होगी। गर्म जलवायु के चलते जिले के करीब 20 फीसदी बागानों को नुकसान पहुंचा है और किसानों के शुरुआती अनुमान के मुताबिक इस सीजन में उत्पादन में 30 फीसदी की गिरावट आएगी। ज्यादातर बागान उडूमबंचोला तालुके में हैं और वहां के उत्पादकों के मुताबिक, गर्मी में बारिश नहीं होने से पौधों को नुकसान पहुंचा है और इस वजह से उत्पादन में गिरावट आ सकती है।  गर्म जलवायु कट्टापाना, नेडुनकदम, वंडानमेडू, नरियानपारा और इरात्तयार इलाके में भी जलवायु गर्म है। इन इलाकों की मुख्य फसल इलायची है।

देश में 1.05 लाख हेक्टेयर में इलायची के बागान हैं और इनमें से अकेले इडुक्की जिले में 32,500 हेक्टेयर पर इलायची के बागान हैं। मोटे तौर पर कुल 20,000 टन इलायची का उत्पादन होता है और इसमें इडुक्की जिले की हिस्सेदारी करीब 9500 टन होती है। ऐसे में अगर इस जिले में बागानों को नुकसान पहुंचता है तो स्वाभाविक तौर पर उत्पादन में गिरावट आएगी।

एक उत्पादक ने कहा कि बिजली की आपूर्ति में बाधा और कम वोल्टेज से बागानों की समय पर सिंचाई प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि इलायची उत्पादक इलाकों में कम वोल्टेज गंभीर समस्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि केरल राज्य बिजली बोर्ड इस पर ध्यान नहीं दे रहा है क्योंकि इडुक्की जिले के करीब 30 फीसदी बागानों को पिछले कुछ सालों से इस समस्या से जूझना पड़ रहा है। इसके निदान के लिए बोर्ड ने गंभीरता से कदम नहीं उठाए हैं। केरल में मॉनसून का आगाज नहीं हुआ है और इसमें देरी की संभावना है। इससे केरल व तमिलनाडु में उत्पादकों की समस्याएं बढ़ेंगी। मॉनसून से पहले केरल में बारिश की स्थिति इतनी खराब थी कि दिन में तापमान 40 डिग्री सेल्यिसस से ऊपर था।

इस बीच, इलायची की कीमतें नीचे आई हैं। इससे पता चलता है कि बाजार में लगातार आपूर्ति हो रही है और नीलामी केंद्रों में भी ठीक-ठाक माल आ रहा है। किसानों ने कहा कि पुराने भंडार का ज्यादातर हिस्सा बेचा जा चुका है और इस सीजन में इलायची उत्पादन में देरी से आने वाले हफ्ते में कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। सोमवार को अच्छी गुणवत्ता वाली इलायची की कीमतें 1235 रुपये प्रति किलोग्राम थीं और औसत गुणवत्ता वाली इलायची 730 रुपये प्रति किलोग्राम पर बिक रही थी। मार्च में इलायची की औसत कीमतें 830 रुपये प्रति किलोग्राम रही थीं।

Related Posts: