नई दिल्ली. वाणिज्य मंत्रालय की इकाई काजू निर्यात प्रोत्साहन परिषद (सीईपीसीआई) ने 12वीं योजना के दौरान काजू प्रसंस्करण इकाइयों के आधुनिकीकरण के लिए आवंटन में कई गुणा बढ़ोतरी की मांग की है। वाणिज्य मंत्रालय को भेजे प्रस्ताव में सीईपीसीआई ने 100 करोड़ रुपये की मांग की है जबकि 11वीं योजना के दौरान उद्योग के आधुनिकीकरण के लिए महज 9 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। फिलहाल इस प्रस्ताव पर केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार है।

11वीं योजना की अवधि में सीईपीसीआई ने आधुनिकीकरण व विशाखन योजना लागू की थी और इसके तहत सदस्य निर्यातकों को अपने प्रसंस्करण व विनिर्माण इकाइयों के उन्नयन व सुधार के लिए वित्तीय सहायता दी गई थी। सीईपीसीआई के चेयरमैन हरि कृष्णन आर नायर ने कहा, 12वीं योजना के दौरान काजू प्रसंस्करण इकाइयों के आधुनिकीकरण, गुणवत्ता के उन्नयन, खाद्य सुरक्षा प्रमाणन और विदेश में भारतीय काजू के प्रमोशन से संबंधित प्रस्ताव हमने सौंप दिया है।

सीईपीसीआई की 57वीं सालाना आम बैठक में उन्होंने कहा कि विदेशी प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए काजू प्रसंस्करण क्षेत्र का आधुनिकीकरण अनिवार्य है। परिषद ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह काजू को न्यू स्टेटस होल्डर्स इन्सेंटिव स्क्रिप (एसएचआईएस) योजना के योग्य वस्तुओं की सूची में शामिल करे ताकि यह प्रतिस्पर्धा में टिक सके। उन्होंने कहा, नई योजना में गहन श्रम वाले क्षेत्र के स्टेटस होल्डर्स तकनीकी उन्नयन की खातिर पूंजीगत सामानों के आयात के लिए इस स्क्रिप का इस्तेमाल करने के योग्य हैं।

काजू भी ऐसा क्षेत्र है, जहां गहन श्रम की दरकार होती है। उन्होंने कहा कि वियतनाम व ब्राजील जैसे काजू उत्पादक देशों ने सरकारी सहायता से अपने उद्योग का आधुनिकीकरण किया है। साल 2011-12 में हुए निर्यात को संदर्भित करते हुए उन्होंने कहा कि काजू कर्नेल और इसके विभिन्न उत्पादों के निर्यात से देश ने 9280 लाख डॉलर यानी 4450 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित की है। देश से 1,31,760 टन काजू कर्नेल का निर्यात हुआ और इसकी कुल कीमत 4390.68 करोड़ रुपये रही। मात्रा और कीमत के लिहाज यह अब तक का रिकॉर्ड है।

साल 2010-11 के मुकाबले काजू कर्नेल के निर्यात में 24.59 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अमेरिकी क्षेत्र को 37 फीसदी, यूरोपीय क्षेत्र को 27 फीसदी, पश्चिम एशिया व अफ्रीका को 23 फीसदी, दक्षिण पूर्वी व पूर्वी एशिया को 12 फीसदी काजू का निर्यात हुआ है। भारतीय काजू कर्नेल के प्रमुख खरीदार हैं अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड और जापान आदि। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इसकी उत्पादकता में तीव्र बढ़ोतरी हुई है। हालांकि कर्नाटक, ओडिशा और गोवा में यह घट रहा है या फिर स्थिर है।  राज्य बागवानी विभाग राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत उपलब्ध संशाधनों का इस्तेमाल करे और काजू की खेती में महाराष्ट्र में मिली सफलता का दोहराव इन राज्यों में करे।

काजू निदेशालय के अनुमान के मुताबिक, महाराष्ट्र में 2.23 लाख टन कच्चे काजू का उत्पादन हुआ जबकि आंध्र प्रदेश में 1.10 लाख टन, ओडिशा में 97,000 टन, केरल में 73,000 टन और तमिलनाडु में 68,000 टन कच्चे काजू का उत्पादन हुआ। देश का उत्पादन 6.92 लाख टन रहा जबकि 2010-11 में 6.53 लाख टन काजू का उत्पादन हुआ था। इस तरह उत्पादन में 6 फीसदी की उछाल आई।

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