एसडीएम ने जारी किए आदेश ,उपचुनाव की संभावना बढ़ी

गुना 21 मई नससे. विधायक राजेन्द्र  सिंह सलूजा का अनुसूचित जाति का प्रमाण-पत्र जिला प्रशासन ने राजसात कर लिया है. इस आशय के आदेश सोमवार को एसडीएम गुना डीके जैन ने जारी कर दिए है.श्री सलूजा की अपील को पिछले दिनों उच्च न्यायालय ग्वालियर की डबल बैंच द्वारा खारिज कर दिया गया है.इसके बाद एसडीएम ने यह कदम उठाया है.

सनद रहे कि जाति प्रमाण-पत्र के मामले में गुना विधायक राजेन्द्र सिंह सलूजा को गत 17 मई को करारा झटका लगा था. इस प्रकरण में हाइकोर्ट की ग्वालियर डबल बैंच ने  न केवल श्री सलूजा की याचिका खारिज की, बल्कि पचास हजार का जुर्माना भी लगाया. इसके साथ ही फिर एक बार जिला प्रशासन के पाले में गेंद आ गई थी.वहीं इस निर्णय के बाद से लोगों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर लग गर्इं थी. खंडपीठ की डबल बैंच ने श्री सलूजा द्वारा दायर की गई याचिका खारिज कर दी . हाईकोर्ट की ङ्क्षसगल बंैच द्वारा जाति प्रमाण पत्र मामले में राज्य स्तरीय छानबीन समिति द्वारा दिए गए फैसले को सही ठहराया था. हाईकोर्ट के इस निर्णय के विरोध में श्री सलूजा ने हाईकोर्ट की डबल बैंच के समक्ष याचिका लगाई थी. इसी के चलते सुनवाई की तारीखें बढ़ती रहीं. विगत 14 मई को बहस के बाद बेंच द्वारा निर्णय अपेक्षित था. जिस पर सभी की निगाहें लगी हुई थी. अंतत: जस्टिस एमएन अग्रवाल व शील नागू की डबल बेंच ने अपरांह में श्री सलूजा द्वारा दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया.इसके तीन दिन बाद 21 मई को जिला प्रशासन ने विधायक राजेन्द्र  सिंह सलूजा का अनुसूचित जाति का प्रमाण-पत्र राजसात करने का कदम उठाया.

उपचुनाव होने की संभावना- इसके साथ ही गुना विधान सभा क्षेत्र में उपचुनाव होने की संभावना प्रवल हो गई है. इसको लेकर राजनीतिक हलकों में सरगर्मी बढ़ गई है. वहीं कई दावेदार अपने अपने राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं से संपर्क बढ़ाने में जुट गए हैं ताकि उप चुनाव की स्थिति में टिकट हासिल कर सकें . क्या संगीता को मिलेगा मौका- राजनीतिक हल्कों में गत विधानसभा चुनाव में गुना आरक्षित सीट पर दूसरे पायदान पर रहीं कांगे्रस प्रत्यासी संगीता मोहन रजक को भी मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है. जानकारों का कहना है कि कई ऐसे मामले सामने आए हैं,जिनमें विजयी उम्मीदवार अयोग्य घोषित होने पर निकटतम प्रत्यासी को मौका दिया गया है. मगर इसके लिए संगीता मोहन रजक को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा. कोर्ट का निर्णय उनके पक्ष में आया तो मौका मिल भी सकता है. सुप्रीम कोर्ट जाएंगे- सलूजा कहते हैं कि जिला प्रशासन जो चाहे सो करे वैसे उक्त प्रमाण-पत्र को विगत 13 सितंबर 2011 को ही सर्वाधिकार वाली राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने निरस्त कर दिया था. इसके बाद मामला कोर्ट में था. हाईकोर्ट के निर्णय के बाद हम सुप्रीमकोर्ट की शरण में जा रहे हैं. फैसला वहीं होगा.

क्या उन अधिकारियों पर भी होगी कार्यवाही
राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने गत 13 सितंबर 2011 को दिए अपने निर्णय में फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाने में सहयोगी अधिकारियों पर भी कार्यवाही करने का उल्लेख किया था. अब देखना है कि कलेक्टर इस ओर क्या कदम उठाते है.

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