टॉउन एंड कंट्री प्लानिंग को लोगों की सलाह

भोपाल, 3 जून, नभासं. झीलों की नगरी भोपाल की खूबसूरती बनी रहे इसके लिए कैचमेंट एरिया में किसी भी निर्माण की अनुमति झील संरक्षण प्राधिकरण नहीं दे.

यह सुझाव शनिवार को संचालनालय नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा मध्यप्रदेश संरक्षण प्राधिकरण के सभागृह में आयोजित संगोष्ठïी में राजधानीवासियों ने दी. इस अवसर पर टॉउन प्लानिंग कमिश्रर केसी गुप्ता ने लोगों के सुझावों को अमल करने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि प्राधिकरण झीलों की सुंदरता बनाए रखने के लिए ऐसा कोई निर्णय नहीं लेगा, जो झीलों की प्राकृतिक खूबसूरती को बिगाड़े. उन्होंने कहा कि राजधानी में नवनिर्मित बहुमंजिला इमारतों में सोलर ग्रीन योजना को अमल में लाया जाएगा. इसके अलावा कृषि योग्य भूमि या बड़े फार्म हाउसों पर बहुमंजिला इमारतों का निर्माण नहीं होने के लिए भी नया प्रावधान बनाया जाएगा. गुप्ता ने कहा 2031 में शहर की आबादी 33 लाख के आसपास हो जाएगी. इसको ध्यान में रखकर मास्टर प्लान 2005 में संशोधन किया जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक 2013 में शहर का फैलाव  813 वर्ग किमी में होगा. इसमें शहरी आबादी के लगभग 60 गांव भी शामिल होंगे.

प्लॉन में 313 वर्ग किमी सरकारी जमीन का बेहतर और सुव्यवस्थित उपयोग करने पर जो दिया गया है. शहर की जमीन को उपयोगी-अनुपयोगी और कम उपयोगी के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा. वहीं वाटर बाडीज, एयरपोर्ट और इसरो के आसपास 500 मीटर का बफर जोन बनाया जाएगा. वहीं, टॉउन प्लानिंग संयुक्त संचालक बीपी कुलश्रेष्ठï ने बताया कि राजधानी के नवस्वारूप को लेकर टॉउन प्लानिंग लोगों के सुझावों पर पूरी तरह से अमल करेगा. उन्होंने कहा कि टॉउन प्लानिंग प्रोजेक्ट-2005 के कुछ स्वारूपों में बदलाव की आवश्यकता है. राजधानी की पहचान लो राइज बिल्डिंग डवलपमेंट के रूप में है इसलिए इसका विकास वर्टिकल नहीं होरिजेन्टल होना चाहिए. यहां की टोपोग्राफी समतली न होकर झील और ढलान के क्षेत्र की है. यदि ऐसे में वर्टिकल विकास किया जाता है तो आने वाले समय में पार्किंग समस्या विकराल रूप धारण कर लेगी. नए मास्टर प्लान में कमर्शियल जोन बनाने के साथ-साथ पृथक से ट्रांसपोर्ट नगर बनाया जाना चाहिए. मास्टर प्लान 2031 पर यह महत्वपूर्ण सुझाव बिल्डर, नर्सिग होम, इंडस्ट्री और ट्रांसपोर्ट एसोसिशन ने दिए.

इनका मानना है कि वर्तमान में राजधानी में पहले से ही पार्किंग समस्या है. यदि ऐसे में शहर का वर्टिकल विकास कर हाईराइज बिल्डिंग को बढ़ावा दिया जाता है तो पार्किंग को लोड और अधिक बढ़ेगा. वहीं यदि शहर की वास्तविक पहचान को बरकरार रखते हुए इसका होरिजेन्टल विकास किया जाता है तो इससे शहर के विकसित क्षेत्र का विस्तार होने के साथ-साथ आने वाले समय में पार्किंग समस्या विकराल रूप धारण नहीं कर पाएगी. बिल्डर एसोसिएशन ने कहा कि नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण को लेकर जो क्राइट एरिया प्रस्तावित किया गया है उसमें रियायत दी जाए. एसोसिएशन का कहना था कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो वहां व्यवस्थित विकास होने की बजाय झुग्गीवासियों का बसेरा बन जाएगा. आज राजधानी में जितनी भी झुग्गियां बनी हैं उनमें से अधिकांश क्षेत्र प्रतिबंधित और ग्रीन बेल्ट के हैं.

इंडस्ट्री एसोसिएशन ने कहा कि राजधानी का अधिकांश विकास दक्षिण दिशा होशंगाबाद रोड, मंडीदीप और औबेदुल्लागंज क्षेत्र की तरफ आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों का तेजी से विकास हो रहा है. वहीं दूसरी ओर एयरपोर्ट उत्तर दिशा में होने से उद्योगपतियों से लेकर अन्य संभ्रांत लोगों को हवाई उड़ान की सुविधा का लाभ लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता है. ऐसे में एयरपोर्ट को इन क्षेत्रों से जोडऩा आवश्यक है. चर्चा के दौरान टाउन एंड कंट्री प्लानिंग(टीएंडसीपी) कमिश्रर ने बड़े तालाब के बफर जोन को छोड़कर बाकी कैचमेंट एरिया में सीमित गतिविधियों की परमिशन दिए जाने पर राय मंागी. लेकिन इस मसले पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई. कुछ का कहना था कि कैचमेंट एरिया में किसी भी तरह की छेड़छाड़ बड़े तालाब के जीवन और जैव विविधता पर असर डालेगी. हालांकि बिल्डरों ने सीहोर(रातीबड़-ईटखेडी) रोड की ओर कैचमेंट में कुछ रिफ्रेशमेंट गतिविधियों के लिए परमिशन दिए जाने की पैरवी की.

टीएंडसीपी ने वर्टिकल एक्सपेंशन पर जानकारों से सुझाव मांगे थे. क्योंकि शुक्रवार को क्रेडाई के कोषाध्यक्ष विपिन गोयल ने भोपाल के लिए हॉरिजोंटल विस्तार की पैरवी की थी. शनिवार को कमिश्रर कहा कि वर्टिकल एक्सपेंशन भोपाल की जरूरत नहीं है. भोपाल में इन्फ्रास्ट्रक्चर भी इतना मजबूत नहीं कि वर्टिकल एक्सपेंशन को बोझ सहन कर सके. तालाबों के संरक्षण के लिए क्रेडाई ने मास्टर प्लान में लेक फ्रंट में ग्रीन बेल्ट का प्रावधान करने, कमर्शियल तैंडयूज बढ़ान, बीआटीएस जैसे और कॉरिडार बनाने, फ्लाई ओवर्स, मेट्रो आदि के लिए प्रावधान करने के सुझाव दिए.

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