कोयला आवंटन मामले में 5 कंपनियों पर केस दर्ज, संसद में गतिरोध जारी

नई दिल्ली, 4 सितंबर. कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमितता के मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने मंगलवार को पांच कंपनियों के खिलाफ धोखाधड़ी के लिए पांच मामला दर्ज किया है. साथ ही, अज्ञात अफसरों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है.

सीबीआई ने 11 शहरों के 30 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया. सीबीआई कई जगहों पर बीते दिनों से छापेमारी कर रही है. अभी तक आठ राज्यों के 11 शहरों में छापे की कार्रवाई की गई है. कुल तीस जगहों पर हुई कार्रवाई के बाद मिले दस्तावेजों के आधार पर कोयला आवंटन मामले में पांच कंपनियों को जांच के दायरे में लाते हुए इनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.  इस बीच, सीबीआई का दल छत्तीसगढ़ और झारखंड में टिका हुआ है और वह जांच के दायरे में आई कंपनियों के अधिकारियों की जांच कर रहा है.

भाजपा ने सीबीआई के कार्यप्रणाली पर खड़ा किया सवाल

भाजपा ने सरकार को घेरते हुए कहा कि सीबीआई के छापों के बाद यह साफ हो गया है कि कोयला घोटाले में सबकुछ  काला है. हालांकि सीबीआई चाहे तो निष्पक्ष तौर से भी काम कर सकती है. लेकिन इसकी संभावना कम है. भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावेडकर ने कहा कि सीबीआई कोल ब्लॉकों के मालिकों के पास आवंटित चिटठी खोज रही है. जबकि कोयला मंत्रालय के पास ही मुख्य पत्र है. ऐसे में कोयला मंत्रालय में सीबीआई को छापा मारा जाना चाहिए.

सूत्रों के अनुसार, कोयला ब्लॉक आवंटन से लाभ पाने वाली कम से कम 10 कंपनियां कथित तौर पर नियमों के उल्लंघन के लिए सीबीआई की जांच के घेरे में हैं. इन पांच केस के अलावा जांच एजेंसी अलग-अलग समूहों में मामले दायर करेगी. एनटीपीसी को हुआ दोबारा आवंटन- बिजली क्षेत्र की देश की सबसे बडी उत्पादन कंपनी एनटीपीसी ने आज कहा कि रद्द किये गये तीन कोयला ब्लाकों को फिर से उसे आवंटित कर दिया गया है.

एनटीपीसी के अध्यक्ष अरूप राय चौधरी ने  बताया कि कोयला ब्लाकों को विकसित नहीं करने की वजह से कोयला नियामक ने तीन ब्लाकों का आवंटन रद्द कर दिया था लेकिन एनटीपीसी द्वारा दिये गये जवाबों के बाद फिर से उसका आवंटन बहाल कर दिया गया है. हांलाकि इस संबंध में अभी तक एनटीपीसी को औपचारिक जानकारी नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि एनटीपीसी कोयला ब्लाकों का आंवटन किया गया था लेकिन इसे जुडी नियामक ंमंजूरिया उसे ही हासिल करनी थी जिसकी वजह से विकास करने में विलंब हो रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोयला ब्लाकों को विकसित करने में सात वर्ष लगता है जबकि भारत में यह काम सिर्फ् चार वर्षों में ही करने के लिए कहा जा रहा है जो संभव नहीं है.

सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि जांच एजेंसी नीतिगत मामले को नहीं देखेगी, बल्कि वह सिर्फ यह ध्यान देगी कि इसमें किसी तरह का आपराधिक मामला बनता है कि या नहीं. कोयला घोटाले मामले में सीबीआई उन 12 कंपनियों की जांच पर ध्यान केंद्रित कर रही है जिन्हें 'फास्ट ट्रैकÓ श्रेणी में लाइसेंस दिया गया है लेकिन अब तक आवंटित कोयला खान के खनन का काम शुरू नहीं हुआ है.  बीते दिनों खनन कार्य बिल्कुल शुरू नहीं होने की खबर के बीच सीबीआई का दल कोयला मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों से मिला और उक्त 12 कोयला खानों से जुड़े दस्तावेज मांगे, जिनमें से नौ छत्तीसगढ़ और तीन झारखंड में हैं. इसके अलावा मंत्रालय से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई. सीबीआई ने झारखंड के लिए और दल भेजे हैं और एजेंसी अन्य मंत्रालयों व राज्य सरकारों से संबंधित दस्तावेज इक_ा कर रही है.

सीबीआई की निष्पक्षता पर सवाल नहीं: जायसवाल

कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने आज कहा कि कोयला ब्लाक आवंटन घोटाले की जांच कर रहे  सीबीआई द्वारा इस मामले में पांच कंपनियों के विरूद्ध मामला दर्ज किये जाने के बाद जांच एजेंसी की निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए. श्री जायसवाल ने सीबीआई द्वारा इस संबंध में कंपनियों के यहां छापे मारने और पांच कंपनियों तथा अज्ञात अधिकारियों के विरूद्ध कोयला ब्लाक आंवटन घोटाले में मामला दर्ज किये जाने के बाद कहा कि सीबीआई पर सरकार के निर्देश पर काम करने का आरोप वाले वालों को अब जांच एजेंसी की कार्रवाई पर सोचना चाहिए.

उन लोगों से पूछिये जिन्होंने सीबीआई का नाम खराब किया हुआ है. सीबीआई ने तीन महीने पहले केन्द्रीय सर्तकता आयोग के निर्देश पर कोयला घोटाले की प्रारंभिक जांच शुरू की थी और अब मामले दर्ज किये गये हैं. जांच के दौरान कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने सीबीआई को बताया कि उन कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किये गये हैं जो कोयला ब्लाकों के आवंटन के बाद खनन गतिविधियों में विंलब कर रही हैं.

प्रमोशन में आरक्षण बिल को मंजूरी

सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण बिल को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है. बसपा, भाजपा ने जहां इस फैसले का स्वागत किया है वहीं सपा इसके विरोध में खुलकर सामने आ गई है. सरकार के इस फैसले से अनुसूचित जाति (एससी) और जनजाति (एसटी) के लोगों को फायदा मिलेगा जबकि सामान्य वर्ग के लोगों को इससे निराशा होगी.

मायावती ने विधेयक को पारित कराने में सभी राजनीतिक दलों खासकर राजग के सभी घटक दलों से सहयोग करने की अपील की है. मायावती ने कहा कि उनकी पहल पर कैबिनेट ने प्रमोशन में आरक्षण देने पर सहमति प्रदान कर दी है. अब सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि इस विधेयक को संसद में पारित कराने में मदद करें. इस बिल का सर्वदलीय बैठक में मुलायम सिंह यादव ने विरोध किया था, जबकि मायावती ने समर्थन किया था.

माया ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में संसद नहीं चलने दे रहे राजग से अनुरोध किया कि वह संसद में इस मामले पर अपना विरोध अपनी नीति के अनुसार जारी रखे, लेकिन प्रमोशन में आरक्षण पर कैबिनेट की मुहर लगने के बाद इसे अब संसद में पारित कराने में मदद करें. उन्होंने राजग से अनुरोध किया संसद का मानसून सत्र इसी सप्ताह समाप्त हो रहा है. यदि इस दौरान यह विधेयक पारित नहीं हुआ तो फिर लटक जाएगा, इसलिए एक दो घंटे तक संसद में इस विधेयक पर बहस होने दें और इसे पारित कराने में मदद करें. सरकार कल या परसों संसद के पटल पर इस बिल को रख सकती है.

दूसरी ओर सपा नेता मुलायम सिंह यादव ने कहा कि वे संसद में सरकार के इस फैसले का विरोध करेंगे. सरकार यह बिल कोयला घोटाले से लोगों का ध्यान हटाने के लिए ला रही है. हालांकि कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने उम्मीद जताई है कि सपा इस बिल का समर्थन करेगी. भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि ओबीसी के लिए वे संशोधन बिल लाएंगे. मालूम हो कि इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के कर्मियों के लिए आरक्षण लाभ को निरस्त कर दिया था.

मायावती ने सराहा

बसपा ने मंत्रिमंडल द्वारा सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूजित जनजाति के लोगों को आरक्षण सम्बंधी विधेयक पर मंजूरी देने के फैसले का स्वागत किया है. मायावती ने  कहा कि मैं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और खासतौर पर भाजपा से अपील करती हूं जिसने कोयला ब्लॉक आवंटन के मुद्दे पर संसद नहीं चलने दे रही है. मैं उनसे निवेदन करती हूं कि वे विधेयक को पारित होने दें क्योंकि इस पर पहले ही सर्वदलीय बैठक में चर्चा हो चुकी है और इस पर संसद में और चर्चा की आवश्यकता नहीं है.

संसद में गतिरोध जारी

कोयला ब्लॉक आवंटन में कथित अनियमितता को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे की मांग कर रही विपक्षी भाजपा के हंगामे के कारण मंगलवार को भी लोकसभा जहां दिनभर के लिए तो राज्य सभा की कार्यवाही चार बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. हंगामे के कारण लगातार दसवें दिन भी संसद की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ती दिख रही है. दो बार कार्यवाही स्थगित होने के बाद बाद राज्यसभा की बैठक दो बजे दोबारा शुरू हुई तो स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने सदन में एम्स विधेयक प्रस्तुत किया लेकिन भाजपा के हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित हुई. उप सभापति पी.जे. कुरियन का सदस्यों को शांत कराने का प्रयास व्यर्थ हो गया और सदन चार बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा.

छह शहरों में एम्स जैसे चिकित्सा संस्थान की स्थापना से सम्बंधित यह विधेयक पहले ही लोकसभा में पारित हो चुका है. इससे पहले लोकसभा की दोबारा बैठक 12 से शुरू हुई लेकिन विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण पीठासीन अधिकारी एवं कांग्रेसी सांसद पी.सी. चाको ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दिया. भाजपा सदस्यों ने सीएजी की रिपोर्ट के आधार पर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए हंगामा जारी रखा. इस बीच, हंगामे को नजरअंदाज करते हुए चाको ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज, बेंगलुरू, विधेयक 2012 पारित कर दिया. इसके साथ ही इस विधेयक को दोनों सदनों से मंजूरी मिल गई, क्योंकि उच्च सदन इसे पहले ही पारित कर चुका है. लोकसभा में भाजपा के सांसदों के साथ-साथ ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कडग़म (एआईएडीएमके) के सांसद भी नारेबाजी करते नजर आए. उनका विरोध श्रीलंका के राष्ट्रपति की आगामी भारत यात्रा को लेकर था.

एम्स विधेयक को संसद की हरी झंडी

संसद ने सरकार को देश के विभिन्न भागों में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) खोलने के लिए अधिकृत करने संबंधी विधेयक को आज मंजूरी दे दी जिससे नवस्थापित ऐसे संस्थानों में अब शैक्षणिक सत्र शुरू हो सकेगा. लोकसभा द्वारा पिछले सप्ताह पारित इस विधेयक को आज राज्यसभा में विपक्ष के शोरशराबे के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया गया.भाजपा के नेतृत्व में विपक्ष ने सदन में अपेक्षाकृत संयम दिखाया तथा उसके सदस्यों ने केवल अपने स्थान पर खडे होकर ही विरोध व्यक्त किया. सदस्य सभापति के आसन के पास नहीं आये. विधेयक पर चर्चा के लिए वामपंथी दलों के सदस्यों ने कोई आग्रह नहीं किया. विधेयक पारित होते ही विपक्ष का शोरशराबा बढ गया.

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी. नारायणसामी कुछ कहने के लिए खडे हुए लेकिन उनकी बात सुनाई नहीं दी. उपसभापति पी.जे. कूरियन ने शोर शराबा जारी रहने पर सदन की कार्रवायी को कल तक के लिए स्थगित कर दिया. स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद की ओर से पेश किये गये इस विधेयक पर संसद के किसी भी सदन में चर्चा नहीं हो पाई. यह विधेयक इस संबंध में जारी अध्यादेश का स्थान लेगा जिसमें एम्स जैसे छह संस्थानों में 15 सितम्बर से कामकाज शुरू करने की अनुमति दी गई है. ये संस्थान पटना, रिषिकेश, भुवनेश्वर, जोधपुर, भोपाल और रायपुर में स्थापित किये गये हैं. विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में यह कहा गया है कि संबंधित राज्य सरकारों ने केन्द्र सरकार से इन संस्थानों में कामकाज जल्दी से जल्दी शुरू करने और इनमें इसी सितम्बर से शिक्षा सत्र आरंभ करने का अनुरोध किया था. विधेयक में यह व्यवस्था भी की गई है कि केन्द्र सरकार एम्स जैसे संस्थान सरकारी राजपत्र में अधिसूचना के जरिये स्थापित कर सकती है.

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