नई दिल्ली, 18 नवंबर. केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वो 21 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में लोकपाल बिल पेश कर देगी लेकिन उसका लोकपाल कितना ताकतवर होगा इसपर सवाल खड़े हो गए हैं। खुद टीम अन्ना भी केंद्र के दावे को शक की निगाह से देख रही है और उसकी नजर में ये लोकपाल कम, जोकपाल ज्यादा होगा।

टीम अन्ना के अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल इस बात से नाखुश हैं कि सीबीआई को लोकपाल के दायरे में नहीं लाया जा रहा। केजरीवाल ने ट्वीट किया कि सीबीआई के बिना लोकपाल पोस्ट ऑफिस की तरह होगा। लोकपाल जांच करने के लिए सीबीआई को शिकायत भेजेगा और उसकी रिपोर्ट कोर्ट को भेजेगा। क्या हम लोकपाल के लिए इस तरह की क्लर्की चाहते हैं? क्या ऐसे जोकपाल के लिए ही लाखों लोग सड़कों पर उतरे थे।

वहीं सरकार टीम अन्ना की आपत्तियों को भाव देने के मूड में नहीं लग रही। केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि लोकपाल बिल शीतकालीन सत्र में आएगा ये तो पता है, पर अन्ना टीम को लगता है कि भारत सरकार एक सशक्त लोकपाल बिल लाकर उनके आंदोलन को कम कर देगी। क्रेडिट उसे नहीं मिल पाएगा इसीलिए ऐसा कहती है।

वहीं बीजेपी ने भी साफ कर दिया है कि वो पीएम को लोकपाल के दायरे में लाकर ही रहेंगे। पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि लोकपाल बिल संसद में रखा जाता है तो देखेंगे कि ये किस स्वरूप में रखा जाता है। सरकार की नीयत ठीक नहीं है। लोकपाल की नियुक्ति में सरकार का कितना दखल होता है, ये सब देखेंगे। सबसे महत्वपूर्ण है कि प्रधानमंत्री पद लोकपाल के दायरे में आना चाहिए इस पर हमारा रुख साफ है। मनमोहन सिंह ने अपना रुख अभी तक साफ नहीं किया है।

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