50 करोड़ के ऋण वसूली की आस, 2 करोड़ के कर्जे में

गोविन्द बड़ोने
ब्यावरा 30 मई, का. एक जमाने में कृषि और किसानों के विकास में महती भूमिका निभाने वाली लैंड डेव्हलपमेंट बैंक (एल.डी.बी.)  से आज किसानों ने दोहरी दूरी बना ली है. एक तो जिन किसानों पर बैंक का ऋण है उसे चुकाया नहीं जा रही है. दूसरा बैंक से सामान्य लेन-देन भी बंद कर देने से लाखों, करोड़ों का ऋण बांटने और बड़ा कारोबार करने वाली भूमि विकास बंैक की हालत यह हो गई है कि आज वह खुद कर्ज में डूबने की कगार पर खड़ी है.

भूमि विकास बैंक के कर्मचारियों को अब केन्द्रीय सहकारी बैंक (सी.सी.बी.) में मर्ज करने की कवायद चल रही है. यदि ऐसा होता है तो एलडीबी कर्मीं बहुत जल्द सीसीबी की नाव में सवार नजर आयेंगे. इसके लिये शासन स्तर पर तेजी से प्रयास किये जा रहे है. भूमि विकास बैंक की जिले में वर्तमान समय में 12 शाखाएं कार्य कर रहीं है. इन एक दर्जन शाखाओं का कार्य करना उस रोगी व्यक्ति की तरह है जो थोड़ी बहुत ऋण वसूली रूपी आक्सीजन से सांसे भर ले रहा है. दिखाने में वह जीवित है पर मृतप्राय पड़ी हुई है. जिले की 12 शाखाओं में करीब 125 से अधिक कर्मचारियों को वेतन मिले 6 माह से अधिक हो गया है.

आयुक्त सहकारी (पंजीयक) के एक पत्र ने इस समय सीसीबी और एलडीपी में कोहराम मचा दिया है. सूत्रों के अनुसार आयुक्त सहकारी पंजीयक ने हाल ही में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक राजगढ़ को एक पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने राजगढ़ जिले में कार्यरत एलडीबी के करीब 69 कर्मचारियों को सहकारी बैंकों में मर्ज करने की सहमति मांगी है. आयुक्त के इस पत्र से जहां एक ओर भूमि विकास बैंक कर्मचारियों की दिलों की धड़कन बढ़ गई है वहीं सहकारी बैंक मुख्यालय भी इस निर्णय से अचंभित है. हालांकि एलडीबी कर्मी इस बात से संतोष में है कि उनकी बैंक बदल जाने से वेतन सुचारू हो जायेगा. बताया जाता है कि केन्द्रीय सहकारी बैंक द्वारा पिछले कुछ समय पूर्व जिले की अपनी विभिन्न शाखाओं में रिक्त पड़े करीब 100 पदों की भर्ती के लिये आयुक्त सहकारी से अनुमति मांगी थी.

आयुक्त ने नई भर्ती करने की बजाय केन्द्रीय सहकारी बैंक को एलडीबी कर्मियों की सूची भेजते हुए यह पत्र लिखा है कि वे 69 कर्मियों को अपनी बैंक में मर्ज करने की सहमति प्रदान करें. उक्त पत्र में कुल 127 बैंक कर्मियों के नाम है. बाकी को जिले के बाहर स्थानांतरित करने की बात कही गई है. इस संबंध में केन्द्रीय सहकारी बैंक के चेयरमैन श्री कैलाश मौर्य एवं महाप्रबंधक श्री विशेष श्रीवास्तव का कहना है कि इस मेटर पर अंतिम निर्णय बैंक के बोर्ड को लेना है. फिर भी उन्होंने सुझाव दिया है कि हम इस पक्ष है कि एलडीबी के जूनियर कर्मियों को सेवाओं का मौका दें जिससे वे अधिक समय तक बैंक को कम वित्तीय भार के साथ अपनी सेवाएं दे सके. बैंक चेयरमैन ने बताया कि जिन 69 कर्मचारियों के विषय में हमसे सहमति मांगी गई है उनमें कईं तो अतिशीघ्र सेवानिवृत्त हो जायेंगे.

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