मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान सरकार की भाजपा सरकार ने निजी निवेश के अस्पतालों की स्थापना के लिए स्वास्थ्य को ‘उद्योग’ का दर्जा दे दिया. सरकार के खुद के अस्पताल इतनी दुर्दशा में चले गए कि वह खैराती अस्पताल से भी ज्यादा बदतर हो गए. हाल ही में एक पत्रकार राजधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज के हमीदिया अस्पताल में परिजन के इलाज के लिए गये वहां डॉक्टर और इलाज दोनों गायब थे. उनके असर के कारण फौरन कोई व्यवस्था हो गई. साथ ही उनसे कहा गया कि आप यहां आए क्यों यह तो गरीबों का अस्पताल है. इशारा साफ था कि सरकारी बड़े अस्पताल से मरीज को निजी अस्पताल में भेजने का काम किया जाता है. सरकार की नई स्वास्थ्य सेवा निवेश नीति 2012 भी यही है.

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की लुभावनी बात कहकर उद्योग के नाम पर शहरी क्षेत्र के लोगों को निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर कर दो. निजी अस्पताल को ‘उद्योग’ के नाम जमीन, कर्ज, छूट सभी सुविधाएं मिल जायेंगी. सरकारी अस्पतालों में तो दिनोंदिन सुविधाएं खत्म ही होती जा रही हैं. वैसे अभी भी निजी अस्पताल ‘मानवीय’ भावनाओं से नहीं ‘उद्योग’ की भावना से ही चल रहे हैं जहां मरीज ठीक नहीं किये जाएं बल्कि मर्ज और मरीज दोनों बनाये जाते हैं. इतने प्रकार की जांचें की जाती हैं जैसे मानव शरीर में हो सकने वाले सभी रोग उसे हो गए हैं. यह ‘स्वास्थ्य उद्योगÓ बड़ी आबादी के शहरों में ही लगेंगे. ग्रामीण क्षेत्र जिस तरह स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में बीमार चल ही रहा है, उसी तरह इलाज, अस्पताल व डाक्टरों को तरसता ही रहेगा. स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, रोजगार, नागरिक सुविधाएं सरकार का कर्तव्य है. इस कर्तव्यहीनता से ही इन्हें ‘उद्योगÓ बना दिया गया है. लगता है अब सरकार का काम आम जनता से टैक्स वसूलना और कर्मचारियों को वेतन बांटना ही रह गया. बाकी सभी मानवीय सुविधाएं ‘उद्योगों’ के मार्फत बेची जायेंगी जिसकी सामथ्र्य हो खरीदे अन्यथा ईश्वर के भरोसे जियें.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
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