हरदा में 100 गिरफ्तार, देवास जिले में भी आंदोलन

हरदा/देवास, 12 सितंबर. मध्यप्रदेश के हरदा जिले में इंदिरा सागर बांध की डूब में आ रहे गांवों के प्रभावितों के अपनी मांग के समर्थन में 15 दिनों तक चले जल सत्याग्रह के अब अन्य प्रभावितों ने भी सत्याग्रह का सहारा लेना शुरू कर दिया है. जबरन उठाकर सत्याग्रह समाप्त करने के बाद प्रभावितों में आक्रोश फैल गया. राज्य के हरदा तथा देवास जिले के सतवास में प्रभावितों ने आज अपना जल सत्याग्रह शुरू कर दिया.

खरदाना गांव में जल सत्याग्रहियों को सुबह करीब सात बजे जिला एवं पुलिस ने पानी के बाहर निकाल कर उन्हें हिरासत में ले लिया. इस दौरान अधिकारियों से झड़प करने पर पुलिस ने जिला कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण पवार, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कांग्रेस नेता हेमन्त टाल, नर्मदा बचाओ आंदोलन कार्यकर्ताओं सहित 100 से अधिक लोगो को गिरफ्तार कर लिया. जिला प्रशासन ने कल रात से यहां धारा 144 लागू कर भारी पुलिस बल तैनात कर रखा है.

सत्याग्रहियों को पानी के अंदर से जबरन उठाकर सत्याग्रह समाप्त करने के बाद प्रभावितों में आक्रोश फैल गया. हरदा कलेक्टर सुदान खांडे ने बताया कि जिला प्रशासन को नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा रिर्पोट मिली थी की बांध का जल स्तर बढ रहा है जिससे सत्याग्रहियों की जान को खतरा पैदा होने के कारण यह कार्यवाई की गई. उन्होंने कहा कि सभी सत्यग्राहियों का स्वास्थ्य परिक्षण कराया गया है. लम्बे समय तक पानी में बैठने से उनके स्वास्थ्य पर विपरीत असर पडा है. वहीं दूसरी तरफ देवास जिले के मेल पीपल्या में भी दोपहर करीब दो बजे से 22 डूब प्रभावितों ने अपनी घोषणा के अनुसार पानी के अंदर बैठकर जल सत्याग्रह शुरू कर दिया. नर्मदा नदी पर बने इंदिरा सागर बांध से डूब क्षेत्र में आ रहे देवास जिले की सतवास तहसील के अनेक गांवों के प्रभावितों ने मेल पीपल्या गांव में सुबह से एकत्रित दोपहर से जल सत्याग्रह शुरू करने की घोषणा की थी. प्रभावितों की मांग है कि इंदिरा सागर बांध का जल स्तर बढा देने से बेक वाटर के डूब में उनकी अन्य जमीने आ गई है और सरकार इसका मुआजवा दे.

जल सत्याग्रह के लिए प्रभावितों के एकत्रित होने की सूचना पर कलेक्टर एम.के.अग्रवाल और पुलिस अधीक्षक अनिल शर्मा ने भारी पुलिस बल के साथ यहां पहुंच गए और स्थिति पर नजर रखे हुए हं. जिला प्रशासन ने इस क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज के विदिशा संसदीय क्षेत्र में यह इलाका आने से जिला और पुलिस प्रशासन अधिक सतर्कता बरत रहा है. उल्लेखनीय है कि खंडवा जिले के घोघल गांव में डूब प्रभावितों ने 17 दिन तक और हरदा जिले के खरदाना गांव में 15 दिन तक पानी के अंदर बैठ कर जल सत्याग्रह किया. घोघल गांव का सत्याग्रह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा जमीन के बदले जमीन देने की मांग को स्वीकार कर लेने से 10 सितंबर को समाप्त हो गया है. वही खरदाना गांव में जिला एवं पुलिस प्रशासन ने बांध के बेक वाटर का जलस्तर बढऩे की संभावना को देखते हुए आज सुबह सत्याग्रहियों को पानी से बाहर निकाल कर यह सत्याग्रह समाप्त करा दिया था.

डूबने का खतरा होने के कारण हटाया

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि  खरदाना गांव में जल सत्याग्रह कर रहे आंदोलनकारियों को जल स्तर बढऩे से जान का खतरा होने के कारण हटाया गया है. भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दूसरे दिन मुख्यमंत्री श्री चौहान ने  कहा कि राज्य सरकार इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध के प्रभावितों के प्रति संवेदनशील है. इंदिरा सागर बांध के खरदाना गांव में जल सत्याग्रह करने वाले प्रभावितों की उचित मांगों को सुनने के लिए सरकार तैयार है. खरदाना में इंदिरा सागर बांध के जल स्तर बढने से सत्याग्रहियों की जान को खतरा होने के कारण उन्हें वहां से हटाया गया है.

डूब प्रभावितो से कहा कि वे आंदोलन के माध्यम से राजनीति करने वाले से सावधान रहे ंऔर यही लोग अपने स्वार्थ के चलते प्रभावितो को बरगला कर जल सत्याग्रह करने पर मजबूर कर रहे हैं. हरदा जिले में पिछले 14 दिनों से जल सत्याग्रह पर बैठे आंदोलनकारियों के प्रति सरकार अब कड़ा रवैया अपना रही है। सरकार ने जबरन 80 से अधिक लोगों को पानी से बाहर खदेड़ दिया है, वहीं 100 से ज्यादा सत्याग्रहियों को गिरफ्तार भी कर लिया है।  हालात को काबू में लाने के लिए सरकार ने जल सत्याग्रह स्थल पर धारा-144 लागू कर दी है, वहीं देवास के सतवास में भी सत्याग्रही मैदान में आ गए हैैं।

भूरिया-अजयसिंह पहुंचे

सरगर्मी तेज हो गई और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने यहां पहुंचकर जल सत्याग्रह कर रहे डूब प्रभावितों से चर्चा की. दोनों नेताओं ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी  सरकार पर प्रभावितों के साथ उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार प्रभावितों के मामले को गंभीरता से नही ले रही है और संवेदनशील नहीं है.

Related Posts: