महंगाई से परेशान उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है, क्योंकि  खाद्य तेल सस्ते  है. कारोबारियों का कहना है कि त्योहार बीत जाने के बाद एक तो इनकी मांग कमजोर हुई है, वहीं दूसरी ओर नई फसल का भी दबाव बढ़ा है. इसलिए खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट आई है और आने वाले दिनों में खाद्य तेल 3 से 4 फीसदी और सस्ते हो सकते ह.

इंदौर. 11 नवंबर. सस्ते तेल का लाभ उपभोक्ताओं को तो मिल रहा है, लेकिन सोयाबीन किसान को कम भाव मिलने  से नाराजी है. बीते 10-12 दिनों के दौरान घरेलू बाजार में रिफाइंड सोया तेल इंदौर डिलिवरी के दाम  20 रुपये गिरकर 595 रुपये, सरसों तेल  डिलिवरी के दाम 672 रुपये से गिरकर 660 रुपये और मूंगफली तेल के दाम 80 रुपये गिरकर 850 रुपये प्रति 10 किलोग्राम रह गए हैं.

सोपा अध्यक्ष राजेश  अग्रवाल ने हाल ही में सोपा के अधिवेशन में कहा कि सोयाबीन की पैदावार लगातार बढ़ रही है,लेकिन अभी हमें वैश्विकस्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए और पैदावार बढ़ाने पर ध्यान देना हैं. इससे तेल उपभोक्ताओं को भी और राहत मिलेगी.  बीते माह त्योहारों के चलते खाद्य तेल महंगे हुए थे, लेकिन अब त्योहार बीतने के साथ ही मांग कमजोर हुई है। इसलिए खाद्य तेल की कीमतों में फिर से गिरावट आने लगी ह. पिछले साल की तरह इस साल भी तिलहन की पैदावार अधिक है. इसलिए त्योहारों के अवसर को छोड़ दिया जाए तो खाद्य तेलों की कीमतें नरम ही रही हैं. आने वाले दिनों में सोयाबीन, मूंगफली समेत अन्य तिलहन की आवक जोर पकड़ेगी.  ऐसे में खाद्य तेल 3 से 4 फीसदी सस्ते हो सकते हैं।

खाद्य तेल कारोबारी लगता है कि आने वाले दिनों में खाद्य तेल और सस्ते हो सकते है. बीते साल भी तिलहन की पैदावार अच्छी थी और इस बार भी पैदावार ज्यादा है. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी खाद्य तेल की उपलब्धता बेहतर है. इसलिए खाद्य तेल की कीमतों में नरमी का ही माहौल दिखाई दे रहा है.पहले सरकारी अग्रिम खरीफ अनुमान के मुताबिक देश में 208.9 लाख टन तिलहन की पैदावार होने की संभावना है, पिछले खरीफ में यह आंकड़ा 208.4 लाख टन था. वहीं सोयाबीन की पैदावार देश में बढ़कर 115 लाख टन आंकी जा रही है. इसमें 60 फीसदी हिस्सा म.प्र. का है. देश में तिलहन की पैदावार बढऩे की वजह से खाद्य तेलों के आयात में कमी आ रही है. तेल वर्ष (नवंबर 2010-सितंबर 2011) के दौरान खाद्य तेलों का आयात 7.6 फीसदी घटकर 77.73 लाख टन रह गया है. ब्रोकर रमणलाल जैन का कहना है कि सोयाबीन की आवक धीमी गति से बढ़ रही है. क्योंकि किसान को बेहतर दाम चाहिए. किसान 1800-2100 के बजाय 2300-2500 रुपए के भाव चाहते है. लेकिन फिलहाल ये भाव आना मुश्किल लग रहा है. किसान धन्नालाल बडग़ुर्जर का कहना है कि हर साल फसल की शुरुआत में किसान को पैसों की जरुरत रहती है तब अच्छे भाव नहीं मिलते और बाद में सटोरिए भाव तान देते हैं. जिसका लाभ किसानों को मिलने के बजाय व्यापारी और सटोरियों को मिल जाता है.

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